आतंकी का बेटा निकला चचा गालिब का भी गुरु
अफजल गुरु के बेटे का नाम है गालिब गुरु. 10वी में लाया है 94.8 परसेंट नंबर. सोशल मीडिया पर मिल रही शाबाशी.
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फोटो - thelallantop
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एक आतंकी के बेटे को आप किस तरह इमैजिन करते हैं? वह या तो कट्टरपंथी ताकतों के लिए उर्वर संभावना होगा या बुरी संगत में पड़कर बर्बाद हो गया होगा? लेकिन अफजल गुरु के बेटे ने ये धारणा तोड़ दी है.
अफजल गुरु के बेटे ने दसवीं के एग्जाम शानदार नंबरों से पास किए हैं. और उसका नाम भी क्या खूब है, गालिब गुरु.
गालिब को नंबर मिले हैं 500 में से 474. यानी 94.8 परसेंट. पांचों सब्जेक्ट में A1 ग्रेड. उसके पिता अफजल गुरु को 2002 के संसद हमले में दोषी पाया गया था और उसे 9 फरवरी 2013 को गुपचुप तरीके से फांसी दे दी गई थी.

2006 की तस्वीर. Source: Reuters
गालिब जम्मू-कश्मीर के सोपोर में SRM वेल्किन्स स्कूल में पढ़ता है. एग्जाम में उसकी परफॉर्मेंस सोशल मीडिया पर भी चर्चा बटोर रही है. लोग लिख रहे हैं कि तमाम तरह की मुश्किलात के बाद उसकी परफॉर्मेंस असाधारण है.
जिस दिन गालिब के पिता को फांसी दी गई थी, उसने कहा था कि वह दिल का डॉक्टर बनना चाहता है. उसने कहा था, 'दिल जिस्म का मजबूत अंग है.'

2006 की तस्वीर. Source: Reuters
एक गालिब ये है. एक गालिब और थे. चचा गालिब. जो कह गए कि 'दिल ही तो है, न संगो-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यों. रोएंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों.' गालिब तो गुरु निकला. चचा गालिब को गलत साबित कर दिया.
अफजल गुरु के बेटे ने दसवीं के एग्जाम शानदार नंबरों से पास किए हैं. और उसका नाम भी क्या खूब है, गालिब गुरु.
गालिब को नंबर मिले हैं 500 में से 474. यानी 94.8 परसेंट. पांचों सब्जेक्ट में A1 ग्रेड. उसके पिता अफजल गुरु को 2002 के संसद हमले में दोषी पाया गया था और उसे 9 फरवरी 2013 को गुपचुप तरीके से फांसी दे दी गई थी.

2006 की तस्वीर. Source: Reuters
गालिब जम्मू-कश्मीर के सोपोर में SRM वेल्किन्स स्कूल में पढ़ता है. एग्जाम में उसकी परफॉर्मेंस सोशल मीडिया पर भी चर्चा बटोर रही है. लोग लिख रहे हैं कि तमाम तरह की मुश्किलात के बाद उसकी परफॉर्मेंस असाधारण है.
जिस दिन गालिब के पिता को फांसी दी गई थी, उसने कहा था कि वह दिल का डॉक्टर बनना चाहता है. उसने कहा था, 'दिल जिस्म का मजबूत अंग है.'

2006 की तस्वीर. Source: Reuters
एक गालिब ये है. एक गालिब और थे. चचा गालिब. जो कह गए कि 'दिल ही तो है, न संगो-ख़िश्त, दर्द से भर न आए क्यों. रोएंगे हम हज़ार बार, कोई हमें सताए क्यों.' गालिब तो गुरु निकला. चचा गालिब को गलत साबित कर दिया.

