पिछले कुछ महीनों में देश में कश्मीर की निगेटिव इमेज उभरी. सेना पर पत्थर फेंकतेवहां के लड़के. हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी बुरहान वानी के जनाज़े में उमड़ी भीड़ नेबाकी देश का दिमाग गरम कर दिया. सोशल मीडिया पर कश्मीरियों पर चुटकुलों और हेटमैसेजेस की बाढ़ आ गई. लेकिन रविवार को यहां की हवा बदली दिखी. शहीद पुलिसकॉन्स्टेबल अब्दुल करीम शेख के जनाज़े में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा. उनके गुस्सेका रुख पलटा हुआ दिखा. कश्मीर में चोगुल हंदवाड़ा है. वहां पुलिस टीम पैट्रोलिंग कररही थी. वहां घात लगाए आतंकियों ने टीम पर हमला कर दिया. हमले में कॉन्स्टेबलअब्दुल शहीद हो गए. ये अटैक पहला तो है नहीं. बीती जुलाई से पुलिस की कई टीमों परहमले हुए हैं. अब्दुल का जनाज़ा निकला तो साथ में भारी भीड़ चली. मोहम्मद जमालअब्दुल के पड़ोसी हैं. कहा कि "ये जिहाद नहीं है. इस्लाम के खिलाफ है. हम ऐसे जिहादको गुड बाय कहते हैं जिसमें लोगों का कत्ल किया जा रहा है." अब्दुल करीम ने 12 सालसे ज्यादा SPO में सर्विस की. यानी स्पेशल पुलिस सर्विस. 2013 में परमानेंट हो गए.जानने वाले बताते हैं कि अब्दुल ने फर्जी कभी किसी को परेशान नहीं किया. जरूरतमंदलोगों की हेल्प की. सबसे खास बात ये रही कि जनाज़े में सबसे आगे इंजीनियर राशिद.विधायक हैं. ये सरकार के एंटी पार्टी हैं. अलगाव वादियों का समर्थन करते हैं. सेनाने जब सर्जिकल स्ट्राइक की थी तो उस पर सवाल उठाया था. और अच्छे से याद करो तोकश्मीर असेंबली का वो सीन याद आएगा जब बीजेपी विधायकों ने इन पर अटैक कर दिया था.स्याही से नहला दिया था. कश्मीर में बदलती हवा का झोंका उस वक्त आया है जब उधर केमाहौल को बड़ा संवेदनशील बताया जा रहा है. खैर ये वाकई पाजिटिव बदलाव है या सिर्फएक हादसे पर उड़ रही बर्फ है. ये बाद में पता चलेगा.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: किसानों की ख़ुदकुशी दर 42 परसेंट बढ़ी, भाषणों का अचार डालें?