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शराब हुई बैन तो हॉस्पिटल बना बेवड़ों का ठिकाना

बिहार में शराबबंदी का आज तीसरा दिन है. हालात बुरे होते जा रहे हैं. डेली वाले पियक्कड़ों को शराब नहीं मिलती तो वो पागलों सी हरकतें कर रहे हैं.

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प्रतीकात्मक तस्वीर.
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आशुतोष चचा
6 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 5 अप्रैल 2016, 05:14 AM IST)
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बिहार में शराब पर पूरी तरह बैन लग गया. इसकी खुशी और गम फिफ्टी फिफ्टी है. पीने वालों को पीने का बहाना चाहिए. लेकिन अब किसी बहाने मिलने से रही. इसका गम है. चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने बिहार की महिलाओं से वादा किया था. कि मुख्यमंत्री बनते ही शराब बंदी होगी. हो गई. लेकिन बुरा हाल हो गया है रेगुलर पियक्कड़ों का. अजीब सी हरकतें कर रहे हैं. कोई पागल कोई बेहोश तो कोई खा रहा साबुन ईटीवी की खबर के मुताबिक 50 साल के हैं गौसुद्दीन. पिछले 20 साल से देसी शराब के भरोसे हैं. डेला पीते हैं, बिना नागा. दो दिन से शराब नहीं मिली. पागल जैसे हो गए. घर में रखा साबुन खाने लगे. घर वालों ने उनको रोका. पकड़ कर बेतिया के हॉस्पिटल में एडमिट कर दिया. मोतिहारी, चैनपुर के रहने वाले रघुनंदन बेसरा 50 साल के हैं. शराब बंद होने से उनके ऊपर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है. दो दिन से भीषण कंट्रोल करके रखा था. मंगलवार को परेशानी बढ़ गई. बेहोश हो गए. ढाका के रेफरल हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया. रिटायर्ड फौजियों की भी मुसीबत है. मुजफ्फरपुर के आर्मी कैंटीन में शराब मिल नहीं रही. रिटायर्ड फौजी लोग वहां पहुंचे. नहीं मिली तो हंगामे पर उतर आए. बड़ी मुश्किल से कंट्रोल करके उनको वापस घर भेजा गया. सीवान के नशा मुक्ति केंद्र में 9 नए मरीज आए हैं. जिनमें से पांच तो आए हैं दो दिन में. दो इतने परेशान हुए कि हालत बिगड़ गई. उनको PMCH भेज दिया गया. दुई दिन में ये हाल है तो आगे क्या होगा ऊपर वाला जाने. लेकिन बर्तन बेच कर दारू पीने वालों को कंट्रोल करने का तरीका कुछ हद तक ठीक है.

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