900 चूहे खाकर चुनाव आयोग की बिल्ली हज को चली: अब बंगाल में रैलियां नहीं होंगी
कोर्ट के आदेश के बाद आंख खुली.
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पश्चिम बंगाल के हुगली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक रोड शो का नजारा. अब Election Commission ने ऐसे रोड शो पर रोक लगा दी है. (फोटो: PTI)
कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते जा रहे संकट को देखते हुए चुनाव आयोग (Election Commission) ने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी है. राज्य में विधानसभा चुनाव के 6 चरण पूरे हो चुके हैं, दो बाकी हैं. चुनाव आयोग ने कहा कि आखिरी के दो चरणों के लिए किसी भी तरह की सार्वजनिक रैली, रोड शो और पैदल मार्च की इजाजत नहीं होगी. हालांकि, जनसभाएं जारी रहेंगी. लेकिन इनमें 500 से अधिक लोग शामिल नहीं हो पाएंगे. इन जनसभाओं में कोविड प्रोटोकॉल्स का पालन करने का आदेश भी आयोग ने दिया है.
चुनाव आयोग ने यह घोषणा तब की है, जब पिछले दिन देश में तीन लाख से अधिक कोरोना वायरस मामले दर्ज किए गए और दो हजार से अधिक लोगों की बीमारी की वजह से मौत हो गई.
इससे पहले कोलकाता हाई कोर्ट ने कोरोना के बढ़ते मामलों के मद्देनजर चुनाव आयोग को जरूरी कदम उठाने का आदेश दिया था. हाई कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें कहा गया था कि कोरोना को देखते हुए चुनावी रैलियां 'सुपर स्प्रेडर इवेंट' बन सकती हैं. कोर्ट ने ये माना कि अधिकार होने के बाद भी चुनाव आयोग ने इस मामले में पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं.
इंडिया टुडे से जुड़ीं पौलोमी साहा और एश्वर्या पालीवाल की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 324 का इस्तेमाल करते हुए यह आदेश जारी किया है. संविधान का अनुच्छेद 324 इलेक्शन कमीशन को यह पावर देता है कि वह संसद और विधानसभाओं के चुनाव के साथ-साथ राष्ट्रपति और उप राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए ना केवल तैयारियां करेगा, बल्कि इस पूरी प्रक्रिया की देख-रेख और जरूरत पड़ने पर जरूरी निर्देश भी देगा. कुल मिलाकर इन चुनावों का पूरा नियंत्रण केंद्रीय चुनाव आयोग के पास होता है.
अपने आदेश में चुनाव आयोग ने यह भी बताया कि कई पार्टियां और उम्मीदवार कोरोना प्रोटोकॉल्स का पालन नहीं कर रहे हैं. इससे पहले आयोग ने 16 अप्रैल को 7 बजे शाम से अगले दिन सुबह दस बजे तक किसी भी प्रकार के चुनाव प्रचार, रैलियों और जनसभाओं पर बैन लगाने का आदेश दिया था.
दूसरी तरफ कई पार्टियों ने भी चुनाव प्रचार को या तो बंद करने या फिर उसे स्केल डाउन करने की घोषणा की थी. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने 18 अप्रैल को ट्वीट किया था कि वे अब पश्चिम बंगाल में चुनावी रैलियां नहीं करेंगे. उन्होंने दूसरी पार्टियों से भी ऐसा करने का अनुरोध किया था. कांग्रेस के बाद सीपीएम ने भी चुनाव प्रचार रोकने की बात कही थी. तृणमूल कांग्रेस और बीजेपी की तरफ से भी चुनाव प्रचार को सीमित करने की बात कही गई थी. बीजेपी ने कहा था कि कोरोना के देखते हुए राज्य में केवल 500 लोगों की मौजूदगी वाली जनसभाएं होंगी.
इधर कोरोना वायरस हालात की समीक्षा के लिए बैठक के चलते पीएम मोदी ने 23 अप्रैल को अपनी बंगाल यात्रा रद्द कर दी है. उन्हें राज्य में तीन रैलियां संबोधित करनी थीं. हालांकि, अब वे वर्चुअल तरीके से इन रैलियों को संबोधित करेंगे. पश्चिम बंगाल चुनाव का रिजल्ट दो मई को आएगा.
लेटेस्ट जानकारी के मुताबिक़, पश्चिम बंगाल में 21 अप्रैल को कोरोना के 10 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं. वहीं विधानसभा चुनाव के आखिरी दो चरणों के लिए 26 और 29 अप्रैल को वोटिंग होनी है.

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