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41 साल बाद कनाडा ने माना, खालिस्तानी आतंकियों ने किया था 'एयर इंडिया फ्लाइट 182' ब्लास्ट

Air india Kanishka Flight 182: 41 साल बाद आखिरकार कनाडा ने कबूल कर लिया है कि एयर इंडिया के कनिष्का फ्लाइट 182 के ब्लास्ट के पीछे खालिस्तानी संगठनों का हाथ था. इस ब्लास्ट में सभी यात्रियों की मौत हो गई थी.

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26 जून 2026 (अपडेटेड: 26 जून 2026, 09:02 AM IST)
after 40 years canada admits there was khalistani plot in air india flight 182 bombing which killed 329 people
विमान का मलबा बटोर कर लाईं आयरलैंड की नेवी (PHOTO-Getty)
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साल 1985. कनाडा के मॉनट्रियल एयरपोर्ट से एक फ्लाइट ने टेक ऑफ किया. इस फ्लाइट की मंजिल मुंबई था. लेकिन बीच में फ्लाइट को लंदन में हॉल्ट लेना था. इसलिए फ्लाइट आयरलैंड के एयर स्पेस में एंटर होती है. आइरिश कोस्ट के करीब 200 मील की दूरी, जब प्लेन अटलांटिक महासागर के ऊपर था, तब वो अचानक रडार से गायब हो गया. अनहोनी की आशंका सही साबित हुई. प्लेन 31 हजार फीटट की ऊंचाई से सीधा समुन्द्र में गिरा. और 82 बच्चों, चार नवजातों समेत 329 लोगों के लिए अटलांटिक उस दिन कब्रगाह बन गया. इस हमले को जिसने अंजाम दिया वो था आतंकी संगठन बब्बर खालसा जो कि खालिस्तानी आतंकियों का एक कट्टर संगठन है. अब 41 साल बाद कनाडा ने आखिरकार मान लिया है कि इस हमले में खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था.

कनाडा की एजेंसी ने माना खालिस्तान का हाथ

कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने पहली बार माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 जिसका नाम सम्राट कनिष्क था, उसमें हुए बम धमाके में खालिस्तानी आतंकवादी शामिल थे. इस धमाके में प्लेन में सवार सभी 329 लोग मारे गए थे. इनमें अधिकतर लोग भारतीय मूल के कनाडाई नागरिक थे. लेकिन हादसा समुद्र के ऊपर हुआ था, इसलिए अटलांटिक महासागर से सिर्फ 131 शव ही बरामद किए जा सके.

भारत का यह पुराना स्टैंड रहा है कि यह बम धमाका कनाडा से ऑपरेट करने वाले खालिस्तानी चरमपंथियों ने करवाया था. 4 दशक तक कनाडा ने इस बात को स्वीकार नहीं किया. CSIS ने इस भयानक हमले को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला बताते हुए कहा कि यह हमला नेशनल सिक्योरिटी कम्युनिटी के लिए एक अहम मोड़ साबित हुआ था. एक फेसबुक पोस्ट में CSIS ने लिखा,

आतंकवाद के पीड़ितों की याद में मनाए जाने वाले इस राष्ट्रीय दिवस पर, CSIS एयर इंडिया की फ़्लाइट 182 पर सवार उन 329 लोगों को याद करता है जिनकी जान एक भयानक आतंकी हमले में चली गई थी. 23 जून 1985 को, कनाडा में मौजूद खालिस्तानी चरमपंथियों ने विमान में बम लगाया था, जिससे उसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई, जिनमें से ज्यादातर कनाडाई नागरिक थे.

एजेंसी ने आगे लिखा,

उस समय CSIS को बने हुए एक साल से भी कम समय हुआ था, और इस त्रासदी ने हमारे विकास को एक नई दिशा दी. पिछले चार दशकों से, हम कनाडाई लोगों को राजनीतिक, धार्मिक और विचारधारा से प्रेरित हिंसा से बचाने के लिए प्रतिबद्ध रहे हैं.

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CSIS की फेसबुक पोस्ट (PHOTO-FB/CSIS)
कनाडाई पीएम ने क्या कहा?

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि यह बम धमाका देश के इतिहास का सबसे घातक हमला था और देश हर तरह के आतंकवाद के खिलाफ है. 2005 में, कनाडा सरकार ने आधिकारिक तौर पर 23 जून को आतंकवाद के पीड़ितों की याद में 'राष्ट्रीय स्मृति दिवस' घोषित किया था. 

इस हमले को अंजाम देने वाले बब्बर खालसा ने विमान के सामान रखने वाले हिस्से (कार्गो होल्ड) में बम रखा था. लेकिन बम रखने वाला खुद उस फ्लाइट में सवार नहीं हुआ. इस विमान के हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरने से 45 मिनट पहले ही हवा में वह बम फट गया. लेकिन उस दिन यह आतंकियों का इकलौता हमला नहीं था. वहां से करीब 1 हजार मील दूर टोक्यो के एयरपोर्ट पर उसी दिन एक और घटना हुई. इस प्लेन हादसे से करीब एक घंटा पहले ही टोक्यो में बैगेज एरिया में एक बम फटा और दो लोगों की जान चली गई. 

जांच शुरू हुई, तब किसी ने सोचा भी नहीं था कि इन दोनों हादसों का आपस में गहरा कनेक्शन था. बाद में पता चला कि आतंकी संगठन बब्बर खालसा ने ही इस हमले को भी अंजाम दिया था. लेकिन वो बैग प्लेन में चढ़ाए जाने से पहले ही फट गया था.

(यह भी पढ़ें: जब कनाडा से चले एयर इंडिया के विमान को खालिस्तानियों ने बीच हवा में बम से उड़ा दिया

वीडियो: कनाडा में शो के दौरान दिलजीत दोसांझ ने खालिस्तानियों को कैसे सबक सिखाया?

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