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चाड में पानी के लिए दो परिवारों की जंग पूरे गांव में फैली, 42 लोगों की मौत

सबकुछ शुरू हुआ एक पानी के कुएं को लेकर. दो परिवारों के बीच पानी लेने के लिए विवाद हुआ. दोनों उस कुएं से पानी भरना चाहते थे. मगर देखते-ही-देखते, यह छोटा सा झगड़ा पड़ोसी गांवों और दूसरी कम्युनिटीज़ तक फैल गया. दोनों तरफ से बदला लेना शुरू हुआ. गांवों में आग लगाई गई, लोग मारे गए.

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28 अप्रैल 2026 (अपडेटेड: 28 अप्रैल 2026, 07:51 PM IST)
water crisis 42 people killed
पानी के लिए दो परिवारों की जंग खूनी संघर्ष में बदली. (सांकेतिक तस्वीर- पीटीआई)
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“पानी के लिए लोग एक दिन आपस में ही लड़ मरेंगे.” अतीत में की गई ये डराने वाली ‘भविष्यवाणी’ वर्तमान का सच बन गई है. पानी के लिए दो परिवारों के बीच शुरू हुआ झगड़ा पूरे इलाका हिंसक संघर्ष बन गया. दुनिया को जब पता चला तब तक पानी की जंग में 42 लोगों की मौत हो चुकी थी. हालात संभालने के लिए सेना को उतरना पड़ा.

सबकुछ शुरू हुआ एक पानी के कुएं को लेकर. दो परिवारों के बीच पानी लेने के लिए विवाद हुआ. दोनों उस कुएं से पानी भरना चाहते थे. मगर देखते-ही-देखते, यह छोटा सा झगड़ा पड़ोसी गांवों और दूसरी कम्युनिटीज़ तक फैल गया. दोनों तरफ से बदला लेना शुरू हुआ. गांवों में आग लगाई गई, लोग मारे गए. 

ये सब कुछ हो रहा था सेंट्रल अफ्रीका के देश चाड में. अप्रैल 2026 के आख़िरी दिनों में चाड के पूर्वी इलाके वादी फिरा प्रांत की घटना है, जहां इगोते गांव आता है. इसी इगोते गांव में पानी के लिए हो रही लड़ाई में अब तक 42 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 10 लोग घायल हैं.

जब सिचुएशन बहुत ज़्यादा खराब हो गई तो चाड सरकार ने हालात कंट्रोल करने के लिए सेना को उतार दिया. सेना ने स्थिति नियंत्रण में ली. फिर हालात का जायज़ा लेने के लिए देश के उप प्रधानमंत्री लिमाने महामत खुद इगोते गांव पहुंचे, जहां का ये मामला है. उन्होंने वहां पहुंचकर बताया कि सिचुएशन अब कंट्रोल में है. लेकिन 42 लोगों की मौत इस बात का सीधा संकेत है कि चाड में पानी कितना बड़ा मुद्दा बन चुका है.

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उप प्रधानमंत्री लिमाने महामत ने खुद इगोते गांव जाकर हालात का जायज़ा लिया. (Photo: AP)

हिंसा की वजह बना चाड का जल संकट. चाड दुनिया के ऐसे 10 देशों में आता है, जहां पानी की सबसे ज़्यादा कमी है. यहां का ज्यादातर इलाका सहारा रेगिस्तान के किनारे बसा है. बारिश बहुत कम होती है और वो भी किसी पैटर्न के तहत नहीं होती. कब होगी, कब नहीं होगी — कुछ तय नहीं. गर्मी और सूखा इतना ज़्यादा है कि पानी के छोटे-छोटे सोर्सेज़ पर लोग जान देने को तैयार हो जाते हैं. 

क्लाइमेट चेंज, बढ़ती आबादी और सिंचाई के पुराने सिस्टम के कारण पानी की दिक्कत साल-दर-साल बदतर ही होती जा रही है. ऐसा इसलिए भी क्योंकि वॉटर सोर्सेज़ लगातार कम होते जा रहे हैं. चाड में पानी के मुख्य स्रोत हैं:

- झील चाड – जो कभी अफ्रीका की बड़ी झीलों में शुमार थी. लेकिन 1960 के दशक की तुलना में अब ये 90% सिकुड़ चुकी है.
- चारी और लोगोन नदियां.
- भूजल (अंडरग्राउंड वॉटर).
- मौसमी बारिशय

मगर इन वॉटर सोर्सेज़ पर प्रेशर बहुत ज़्यादा है. झील चाड का पानी सिंचाई, मछली पकड़ने और पीने के काम आता है. लेकिन सूखे और बहुत ज़्यादा इस्तेमाल ने इसे भी खतरे में डाल दिया है. इसके चलते चाड के लोगों में पानी पीने की मात्रा बेहद कम हो चुकी है. ताजा डेटा बताता है कि चाड में पानी की उपलब्धता प्रति व्यक्ति 813 क्यूबिक मीटर बची है. जबकि दुनिया में पानी की कमी की औसत लिमिट 1,000 क्यूबिक मीटर पर पर्सन मानी जाती है. चाड इससे भी नीचे है.

भारत में ये स्थिति 1,486 क्यूबिक मीटर प्रति व्यक्ति है. यानी भारत में हर व्यक्ति को 14 लाख 86 हज़ार लीटर पानी औसतन नसीब हो जाता है. मगर चाड में ऐसा नहीं है. सिर्फ़ 43-46% लोगों को ही पीने का साफ़ पानी मिल पाता है. बाक़ी लोगों को दूर-दूर से पानी लाना पड़ता है या फिर गंदा पानी पीना पड़ता है.

पानी इतना कम हो जाए तो बड़ी लड़ाइयां हो सकती हैं. जानलेवा लड़ाइयां… चाड में सूखा, गरीबी, बढ़ती आबादी और रिसोर्सेज़ पर इतना प्रेशर होने की वजह से पानी के झगड़े अब आम होते जा रहे हैं. ईस्टर्न चाड में सूडान से आए शरणार्थी भी वॉटर सोर्सेज़ पर बोझ बढ़ा रहे हैं. 

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर पानी की दिक्कत का परमानेंट सॉल्यूशन नहीं निकाला गया, तो ऐसे खूनी संघर्ष और बढ़ेंगे. आशंका है कि आगे इन झगड़ों और लड़ाइयों में और भी लोगों की जानें जाएं. 42 लोगों की मौत इसी की चेतावनी है.

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