तालिबान राज के 2 साल बाद भारत में अफगानिस्तान दूतावास बंद हुआ, ये वजहें गिनाईं
दूतावास ने बंद करने के पीछे भारत सरकार की तरफ से समर्थन की कमी का भी हवाला दिया है.

अफगानिस्तान ने भारत में अपने दूतावास (Afghanistan Embassy) को बंद करने का एलान कर दिया है. एक अक्टूबर से भारत दूतावास बंद हो जाएगा. इसके पीछे दूतावास ने कई अलग-अलग वजहों का हवाला दिया है. जैसे भारत की तरफ से समर्थन की कमी, अफगानिस्तान की अपेक्षाओं को पूरा करने में विफलता, संसाधनों में कमी वगैरह-वगैरह. फैसले की घोषणा करते हुए दूतावास ने खेद भी जताया है.
30 सितंबर को अफगानिस्तान दूतावास ने एक बयान जारी किया. इसमें लिखा गया,
दूतावास ने क्या-क्या वजहें गिनाईं?“बेहद दुख, अफसोस और निराशा के साथ नई दिल्ली में अपने संचालन को 1 अक्टूबर से बंद करने के फैसले की घोषणा करते हैं. ये फैसला अफगानिस्तान और भारत के बीच ऐतिहासिक संबंधों और साझेदारी को ध्यान में रखते हुए सावधानीपूर्वक विचार-विमर्श के बाद लिया गया है.”
- एंबेसी ने आरोप लगाया कि उसे भारत सरकार की तरफ से समर्थन में कमी महसूस हुई, जिसके चलते उनके अधिकारी अपना काम प्रभावी ढंग से पूरा नहीं कर पा रहे हैं.
- भारत की तरफ से राजनयिक समर्थन की कमी और राजधानी काबुल में कामकाजी सरकार की अनुपस्थिति का हवाला देते हुए दूतावास ने माना कि वो दोनों देशों के नागरिकों की उम्मीदों को पूरा नहीं कर सका.
- अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों के चलते उनके पास कर्मियों और संसाधनों दोनों में कमी आई है. इसके कारण उनके लिए दूतावास का संचालन जारी रखना मुश्किल हो गया.
- राजनयिकों के लिए वीजा रीन्यूअल और बाकी जरूरी क्षेत्रों में समय पर और पर्याप्त समर्थन की कमी के चलते उनकी टीम में निराशा पैदा हुई. काम करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
फिलहाल, भारत में अफगानिस्तान एंबेसी का नेतृत्व राजदूत फरीद मामुन्दज़ई कर रहे थे. मामुन्दज़ई को अशरफ गनी सरकार के दौरान नियुक्त किया गया था. अगस्त 2021 में तालिबान के आने के बाद भी वो अफगानी दूत के तौर पर काम करते रहे. जान लें, भारत ने अब तक तालिबान की स्थापना को मान्यता नहीं दी है.
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बाकी देशों में तालिबान के दूतावासों का क्या हाल?अप्रैल, 2022 में तालिबान ने चीन और रूस के दूतावासों में नए अधिकारियों को कार्यकारी राजदूत बना दिया था. इसके बाद उन दूतावासों में तत्कालीन राजदूतों को इस्तीफा देना पड़ा था. इनके अलावा, पाकिस्तान, ईरान, उज़्बेकिस्तान, तुर्की, कतर, UAE, रूस, मलेशिया, कजाकिस्तान जैसे देशों में भी तालिबान समर्थित राजनयिक दूतावास का काम संभाल रहे हैं. इनमें से कई राजदूत ऐसे हैं जो पहले से दूतावासों में कार्यरत थे और उन्होंने पाला बदलकर तालिबान का साथ पकड़ लिया.
60 से ज्यादा देश ऐसे भी हैं जहां तैनात राजदूतों ने तालिबान की सत्ता को मानने से इनकार कर दिया था. और उनके पास दूतावास चलाने के लिए पैसे की भी कमी थी. ऐसे में इन देशों में अफगानिस्तान के दूतावास बंद पड़े हैं.

