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इंडिया में भटकता ये अफ़ग़ानी परिवार बेबसी का दूसरा नाम है

हिंदी नहीं आती, जेब में पैसे नहीं. इनकी मदद कौन करेगा?

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An Afghan boy wields a stick as his flock of domesticated pigeons fly atop the roof of his house in Kabul January 19, 2016. REUTERS/Ahmad Masood TPX IMAGES OF THE DAY - RTX230AF
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प्रतीक्षा पीपी
20 जून 2016 (Updated: 20 जून 2016, 01:30 PM IST)
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एक परिवार अपने बेटे के इलाज के लिए अफ़ग़ानिस्तान से दिल्ली आया. लेकिन यहां उनका बेटा खो गया. और अब ये अपने बेटे की तस्वीर हाथ में लेकर सड़कों पर भटक रहे हैं. सुल्तान अली अपनी बेगम और दो बच्चों के साथ महीने भर पहले दिल्ली आए थे. अपने 16 साल के बेटे ओमीद के दिमागी इलाज के लिए. दिल्ली आना इसलिए हुआ, क्योंकि यहां पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकती हैं. सुल्तान पेशे से टैक्सी ड्राइवर हैं. इतने पैसे नहीं थे कि विदेश में इलाज करवा सकें. इसलिए रिश्तेदारों से पैसे उधार भी लिए थे. दिल्ली आने के लिए सुल्तान को अपने दो बच्चे रिश्तेदारों की देखरेख में छोड़कर आना पड़ा. दिल्ली के मैक्स अस्पताल में सुल्तान ने ओमीद को दिखाया. दवाइयां लेकर अफ़ग़ानिस्तान जाने का समय आ ही रहा था, कि उनका बेटा गायब हो गया. सुल्तान एक रोज़ बाज़ार गए थे. तभी ओमीद 100 डॉलर का नोट लेकर निकल गया. और तबसे उसका कोई भी अता-पता नहीं है. परिवार ने पुलिस में मामला दर्ज करवा दिया. लेकिन पुलिस को अबतक कोई सफलता नहीं मिली. परिवार को इंडिया आए एक महीने से ऊपर हो गया है. और उनके गुमशुदा बेटे को हिंदी भी नहीं आती. सुल्तान का वीजा एक्सपायर हो गया है, और जेब में पैसे ख़त्म हो गए हैं. न वापस जाने का कोई रास्ता है, न यहां रह पाने की गुंजाइश. वहां अफ़ग़ानिस्तान में दो बच्चों का जीना भी मुश्किल हो रखा है. सुल्तान इंडिया वालों से मदद की अपील कर रहा है. लेकिन हिंदी न आने की वजह से इनकी तकलीफें ख़त्म नहीं हो रही हैं.

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