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अडाणी के गिरते शेयरों पर LIC चेयरमैन अपने शेयर होल्डर्स से बोले- 'आपने घबराना नहीं है'

“शेयरधारकों और पॉलिसीधारकों को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है."

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11 फ़रवरी 2023 (अपडेटेड: 11 फ़रवरी 2023, 07:07 PM IST)
Adani Group
अडाणी, एम. आर. कुमार (साभार-आजतक)
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हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद से वो लोग भी चिंता में थे जिन्होंने LIC में इन्वेस्ट किया हुआ है. उनकी चिंताओं को दूर करने के लिए LIC के चेयरमैन एम. आर. कुमार का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि घबराने वाली कोई बात नहीं है. एम. आर. कुमार ने बिजनेस टुडे से बातचीत में कहा है कि LIC के पॉलिसी होल्डर्स और शेयर धारकों को अपने निवेश के बारे में बिल्कुल भी चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

कुमार ने आगे कहा, 

“शेयरधारकों और पॉलिसीधारकों को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है. उनके लिए एक प्रतिशत भी जोखिम नहीं है. उनके निवेश पर इसका कोई असर नहीं होगा.”

जब उनसे ये पूछा गया कि क्या वो अडाणी ग्रुप के टॉप मैनेजमेंट यानी शीर्ष प्रबंधन से मिल चुके हैं. उन्होंने जवाब देते हुए कहा,

"हम जल्द ही उनसे संपर्क करेंगे और इस पूरी सिचुएशन को समझने की कोशिश करेंगे. साथ ही ये भी जानने की कोशिश करेंगे कि वो इस पूरे मामले से निपटने के लिए क्या प्लानिंग कर रहे हैं."

अब वापस आते हैं LIC और अडाणी पर. हुआ ये कि शॉर्ट-सेलर हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट के बाद से अडाणी ग्रुप की कंपनियों के शेयर बुरी तरह गिरने लगे. 10 दिनों के भीतर ही Adani Group का मार्केट कैपिटलाइजेशन आधा रह गया था. खुद गौतम अडाणी भी दुनिया के टॉप अरबपतियों की लिस्ट में तीसरे पायदान से नीचे आकर टॉप-20 तक से बाहर हो गए.

शेयर गिरने के बीच सबसे ज्यादा चर्चा है सरकारी बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC की. LIC अडाणी ग्रुप की कंपनियों में सबसे बड़ा घरेलू निवेशक है. चूंकि शेयर में निवेश कर रखा है तो LIC को भी बुरा झटका लगा है. शेयरों के दाम लगातार घट रहे हैं. 

7 फरवरी को केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भागवत किशनराव कराड ने संसद को बताया था कि LIC ने अडाणी  समूह की अलग-अलग कंपनियों में इक्विटी हिस्सेदारी खरीदी है. जिसे खरीदने के लिए पिछले कुछ सालों में 30,127 करोड़ रुपये का निवेश किया है. राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में कराड ने कहा था कि 31 दिसंबर 2022 तक अडाणी समूह की कंपनियों में LIC की कुल हिस्सेदारी 35,917 करोड़ रुपये है. इसमें इक्विटी और लोन दोनों शामिल हैं.

ये सब खबरें सुनने के बाद से ही उन लोगों को भी अपने पैसे की चिंता होने लगी है, जिन्होंने LIC की पॉलिसी ले रखी है. अब इस पूरे मामले को समझने के लिए हमने संपर्क साधा वित्तीय मामलों के जानकार शरद कोहली से. उन्होंने हमें बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का LIC पॉलिसी से कोई लेना-देना नहीं है. अगर शेयर मार्केट में उतार-चढ़ाव से कंपनियां डूबने लगीं तो रोज हजारों कंपनियां डूब जाएंगी.

कोहली ने बताया,

"मुनाफा या घाटा तब होता है जब आप उस शेयर को बेचेंगे. अगर आपने एक लाख रुपये के शेयर लेकर रखे हैं, कल उसकी वैल्यू 2 लाख रुपये हो गई. तो जब तक आप उसे बेचे नहीं आपको सही मायने में मुनाफा नहीं हुआ. इसे नोशनल मुनाफा या नुकसान कहते हैं. इसे असल घाटा या लाभ नहीं मानना चाहिए. इसी तरह LIC को कोई घाटा नहीं हुआ है, क्योंकि LIC ने शेयर अभी बेचे नहीं हैं. जब बेचेंगे तब घाटा होगा. आज अगर मार्केट ऊपर जाता है तो शेयरों की कीमत बढ़ जाएगी. अमीर लोगों की संपत्ति रोज हजारों करोड़ ऊपर नीचे होती है."

खैर अब यही बात LIC के चेयरमैन एम. आर. कुमार ने कही है. उनका कहना है कि लोगों को चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.

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