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7 से 26 जुलाई के बीच यूं लिखी गई नीतीश के इस्तीफे की स्क्रिप्ट

नीतीश ने इस्तीफे का फैसला अचानक नहीं लिया था, इसके पीछे पूरा स्टेज तैयार किया गया था.

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27 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 26 जुलाई 2017, 05:16 AM IST)
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तेजस्वी यादव पर बेनामी संपत्ति और भ्रष्टाचार के मामलों की गर्मी के बीच नीतीश कुमार ने 26 जुलाई को सीएम पद से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफा देने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश को बधाई दी और कुछ देर बाद बीजेपी की तरफ से नीतीश को बिना शर्त समर्थन की घोषणा कर दी गई. बीजेपी-जेडीयू के दोबारा साथ आने के बाद से राजनीतिक पंडित आकलन करने लगे कि कब से, कहां से और कैसे नीतीश दोबारा बीजेपी की तरफ आकर्षित हो गए.

ये वही नीतीश हैं, जिन्होंने मोदी पर गुजरात दंगों के दाग होने की वजह से सालों तक उनके साथ मंच साझा नहीं किया. हालांकि, इस साल जनवरी में वो मोदी के साथ मंच पर दिखे थे. बीजेपी-जेडीयू की ये लव-स्टोरी तो अब चलती ही रहेगी, लेकिन हम आपको बता रहे हैं कि लालू और नीतीश हेट स्टोरी कहां से शुरू हुई. जानिए 7 से 25 जुलाई के बीच बिहार में हुए उन राजनीतिक घटनाक्रम के बारे में, जिनका परिणाम बिहार ने 26 जुलाई को देखा.

7 जुलाई

रेलमंत्री रहते हुए रेलवे की संपत्ति को मनमाने ढंग से ठेके पर देने के मामले में लालू यादव के घर CBI ने छापा मारा. लालू की पत्नी और बिहार की पूर्व सीएम राबड़ी देवी और उनके बेटे तेजस्वी यादव से पूछताछ की गई. हंगामा हुआ. लालू ने इसे बदले की राजनीति बताया.

8 जुलाई

पहले छापे के अगले ही दिन CBI ने लालू के 12 ठिकानों पर एक साथ छापे मारे. साथ ही, उनकी बेटी मीसा भारती और दामाद शैलेष के तीन ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापा मारा.

9 जुलाई

भ्रष्टाचार पर सख्त रुख रखने वाले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजगीर से लौटे और उन पर तेजस्वी यादव पर एक्शन लेने का दबाव बढ़ा. रेलमंत्री रहते हुए लालू द्वारा रेलवे के एक होटल को लीज पर देने के बदले में जमीन अपने नाम लिखवाने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने CBI से FIR की कॉपी मांगी.

10 जुलाई

नीतीश कुमार ने तेजस्वी के भ्रष्टाचार के मुद्दे पर लालू यादव से फोन पर बात की. उधर आरजेडी विधायकों की मीटिंग चल रही थी, जिसमें फैसला लिया गया कि तेजस्वी खुद उप-मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देंगे. इसी के साथ ये कयास लगाए जाने शुरू हो गए कि अगर तेजस्वी नहीं हटे, तो नीतीश खुद इस्तीफा दे सकते हैं.

12 जुलाई

नीतीश कुमार ने बिहार में महागठबंधन के तीसरे साथी कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी से बात की.

14 जुलाई

केंद्र को निशाना बनाते हुए लालू यादव ने बयान दिया कि वो किसी तरह की गीदड़भभकी से डरने वाले नहीं हैं. इस दिन बिहार कांग्रेस के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने नीतीश और लालू, दोनों से बात की.

15 जुलाई

पटना के ज्ञान भवन में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें तेजस्वी यादव को पहुंचना था, लेकिन वो नहीं पहुंचे. मंच पर उनका नाम लिखा हुआ था, जिसे बाद में ढक दिया गया.

16 जुलाई

जेडीयू नेता शरद यादव और शिवानंद तिवारी ने लालू और नीतीश के बीच बात सुलझाने की कोशिश की, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला.

17 जुलाई

तेजस्वी यादव खुद सामने आए. मुखर हुए. बोले कि उनके इस्तीफा देने की बात मीडिया की फैलाई हुई अफवाह है. वो इस्तीफा नहीं देंगे.

18 जुलाई

तेजस्वी यादव ने खुद नीतीश कुमार को सफाई दी. सीएम नीतीश ने उनसे कुछ और मामलों पर सफाई मांगी.

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19 जुलाई

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने दिल्ली में शरद यादव से बात की. दूसरी तरफ पटना में अशोक चौधरी ने जेडीयू और आरजेडी के बड़े नेताओं के बीच में संपर्क बनाए रखा. सबको पता था कि गठबंधन किस तरफ बढ़ रहा है और इसे बचाने की कोशिश जारी थी.

20 जुलाई

लालू के करीबी माने जाने वाले सपा नेता शिवानंद तिवारी ने बयान दिया कि नीतीश कुमार जिद्दी सीएम हैं और वो जानबूझकर लालू से बात नहीं कर रहे हैं, जिससे महागठबंधन के नेतृत्व कौशल पर सवाल उठ रहा है. शिवानंद के इस बयान से आरजेडी और जेडीयू में तल्खी और बढ़ गई.

21 जुलाई

लालू ने एक बार फिर बात संभालने की कोशिश करते हुए कहा कि महागठबंधन में सब ठीक चल रहा है. उधर जेडीयू के राष्ट्रीय महासचिव केसी त्यागी ने कहा कि गठबंधन के भविष्य पर आखिरी फैसला सीएम नीतीश कुमार करेंगे.

22 जुलाई

नीतीश कुमार ने दिल्ली में राहुल गांधी से तेजस्वी यादव पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों पर चर्चा की.

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24 जुलाई

भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे तेजस्वी यादव खुद दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिले. आरजेडी नेता रघुवंश प्रसाद ने बयान दिया कि नीतीश के कार्यकाल में बिहार में रिश्वतखोरी चरम पर पहुंच गई. आरजेडी सांसद तस्लीमुद्दीन ने नीतीश को अवसरवादी नेता करार दिया. आरजेडी की तरफ से कहा गया कि वो राज्य की सबसे बड़ी पार्टी है, इसलिए जो चाहे करेगी.

25 जुलाई

देश के 14वें राष्ट्रपति के तौर पर शपथ ले रहे रामनाथ कोविंद के शपथ-ग्रहण समारोग में पहुंचे नीतीश कुमार और फिर शाम को पटना वापस भी आ गए.

26 जुलाई

शाम को नीतीश कुमार ने इस्तीफे का ऐलान कर दिया. बोले कि लालू ने उनसे कहा था कि वो संकट में हैं, उन्हें बचा लो. नीतीश ने कहा कि उनके लिए काम करना मुश्किल हो रहा था, इसलिए उन्होंने अंतरात्मा की आवाज सुनी.


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