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फर्जी सरकारी वेबसाइट बनाई, प्लॉट का लकी ड्रॉ निकाल एक करोड़ की ठगी कर डाली, ऐसे हुआ खुलासा

लकी ड्रॉ में प्लॉट के रजिस्ट्रेशन के नाम पर लोगों से 15 हजार से लेकर 31 हजार रुपये तक जमा कर लिए!

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The accused who cheated crores by creating fake website of Yamuna Authority
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी. (फोटो: ट्विटर/@noidapolice)
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सुरभि गुप्ता
14 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 14 नवंबर 2022, 10:29 PM IST)
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यमुना एक्सप्रेस वे विकास प्राधिकरण से मिलती-जुलती वेबसाइट थी. उस पर आवासीय योजनाओं के लिए स्कीम निकली थी. एक्सप्रेस वे के किनारे सस्ते दामों पर प्लॉट के लिए लकी ड्रॉ का रजिस्ट्रेशन हो रहा था. 15 हजार से लेकर 31 हजार तक की रजिस्ट्रेशन फीस रखी गई. फिर क्या था, लोगों को ऑफर भा गया और लकी ड्रॉ के नाम पर लोगों ने प्लॉट के लिए वेबसाइट पर जाकर पैसे जमा किए. इस तरह एक फर्जी वेबसाइट के जरिए करोड़ों की ठगी को अंजाम दिया गया. इस दौरान प्लॉट बुक करने वाले एक शख्स को साइट के फर्जी होने का शक हुआ. पुलिस के पास शिकायत दर्ज हुई. जांच हुई तो ठगी का ये मामला सामने आया. 

दो महीने पहले बनाई वेबसाइट

इस मामले में ग्रेटर नोएडा के बिसरख थाने की पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है. आजतक के अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने नोएडा सेक्टर 128 के रहने वाले मधुर सहगल नाम के शख्स को पकड़ा है. आरोप है कि उसने दो महीने पहले यमुना विकास एक्सप्रेसवे प्राधिकरण की फर्जी वेबसाइट www.yerdawasiyayojna.com बनाई थी. इस पर यमुना एक्सप्रेस वे विकास प्राधिकरण की साइट से मिलते-जुलते कागजात अपलोड किए. 

फर्जी वेबसाइट पर यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे भागीरथी सोसायटी में सस्ते दामों पर प्लॉट देने की स्कीम निकाली. इस स्कीम के तहत प्लॉट की बुकिंग करने के लिए कई तरह के लकी ड्रॉ की सूचना दी गई. 15 हजार, 21 हजार और 31 हजार रुपये के लकी ड्रॉ. ठगों ने लकी ड्रा के लिए रजिस्ट्रेशन कर पैसे जमा करवाए. पैसे ऑनलाइन जमा करने का ऑप्शन दिया गया था.

इस तरह से एक करोड़ रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई. गिरफ्तार आरोपी के 4 और साथी बताए जा रहे हैं, जो फिलहाल फरार हैं.

रिसीविंग नहीं मिलने पर शिकायत

बिसरख थाना क्षेत्र प्रभारी उमेश बहादुर का कहना है कि मनोज नाम के पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी. पीड़ित के मुताबिक, 5 अक्टूबर को उसने यमुना प्राधिकरण की वेबसाइट पर आवासीय योजना में एक प्लॉट का ऑप्शन फिल किया था. रजिस्ट्रेश के लिए उन्होंने 31 हजार रुपए जमा कराए थे. पैसे जमा करने के बाद न तो अमाउंट की रिसीविंग मिली और न ही वो वेबसाइट खुली. 

पीड़ित को इस वेबसाइट के फर्जी होने का शक हुआ. उन्होंने पुलिस में शिकायत की. फिर जांच में पता चला कि अब तक इस साइट के नाम पर लगभग 400 लोगों के साथ ठगी हुई है. पुलिस का कहना है कि जो लोग इस जालसाजी में शामिल हैं, जल्द ही उनके पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर लिया जाएगा.

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