एक चेहरा बीते दिनों अमेरिका में हुए विमेंस मार्च में कई पोस्टरों पर देखा गया. एकलड़की, सीधे कैमरे की ओर देखती हुई. अमेरिकी झंडे से बना हिजाब पहने हुए. इस पोस्टरके नीचे लिखा था, 'हम बराबरी में विश्वास रखते हैं.' ये तस्वीर है अब 32 साल की होचुकी मुनीरा अहमद की. मुनीरा बांग्लादेशी मूल की अमेरिकी औरत हैं. और इसका पोस्टरबनाया था उन्हीं शेफर्ड फेयरी ने, जिन्होंने बराक ओबामा का सबसे पॉपुलर पोस्टरबनाया था. वो पोस्टर जिसे पूरे अमेरिका में 'होप' यानी आशा का प्रतीक माना था.मुनीरा की शक्ल लिए ये पोस्टर पिछले शनिवार हुए विमेंस मार्च में कई हाथों मेंदिखा. सिर्फ इतना ही नहीं, कुछ बड़े अमेरिकी अखबारों में ये तस्वीर फुल पेज पर छपी,घर घर पहुंची. लोगों ने माना कि ये महज एक तस्वीर नहीं, ये एक आवाज है. अमेरिका केअंदर पल रहे इस्लामोफोबिया और मुसलामान देशों के प्रति नफरत के खिलाफ. मुनीरा बतातीहैं: 'ये तस्वीर बस इतना कहती है कि मैं भी उतनी ही अमेरिकी हूं, जितने तुम हो. येतस्वीर किसी के खिलाफ नहीं है, कोई नफरत नहीं फैलाती.' कमाल की बात ये है कि इसतस्वीर को देखते ही लगता है कि ये लड़की जरूर हिजाब पहनती होगी. या सिर ढककर रखतीहोगी. मगर ऐसा नहीं है. मुनीरा अपना सर खुला रखती हैं. और इस तस्वीर के जरिए वोकेवल मुसलमानों ही नहीं, औरतों के लिए भी बुलंद आवाज बनना चाहती हैं. 'ये सिर्फ इससमाज में हमारे भी होने और गिने जाने के लिए एक कोशिश है.' 'कुछ लड़कियों ने मुझसेआकर पूछा कि मैंने अपना सिर ढकना कब बंद किया. मैंने जवाब दिया, 'कभी नहीं.' इसतस्वीर को सात साल पहले रिदवान अदहमी नाम के फोटोग्राफर ने खींचा था. इस तस्वीर कोखींचने के लिए रिदवान और मुनीरा न्यू यॉर्क स्टॉक एक्सचेंज गए थे. ताकि स्टॉकएक्सचेंज को बैकग्राउंड में रख तस्वीर को मायने दे सकें. ये वही जगह थी जहां 9-11के ब्लास्ट हुए थे. 9-11 के बाद अमेरिका में बसे मुसलामानों के प्रति लोगों मेंइतना डर और दहशत फ़ैल गया था कि किसी भी दाढ़ी या टोपी वाले व्यक्ति पर आतंकवादी होनेका शक होता था. अगर आपने मोहसिन हामिद की किताब 'द रिलक्टेंट फंडामेंटलिस्ट' पढ़ीहो, या इसी किताब पर इसी नाम से बनी मीरा नायर की फिल्म देखी हो, तो शायद आप समझपाएंगे कि अमेरिका में मुसलमानों, खासकर पाकिस्तानियों से किस तरह का भेदभाव था. जबकई मुसलमान देशों से अमेरिका के राजनैतिक संबंध ख़राब हैं, ऐसे में अमेरिका मेंमुसलमान होना कैसा होता है, इस बात को ये तस्वीर बयां करती है. मुनीरा ने 'दगार्डियन' अखबार से बात करते हुए कहा: मुझे उन लोगों को देखकर दुख होता है जोट्रम्प का गलत वजहों से साथ देते हैं. ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि अमेरिका में अब भीलोग सोचते हैं कि दूसरे मूल के लोगों को अमेरिका में जगह नहीं मिलनी चाहिए. मुझेनहीं लगता कि जिन मूल्यों पर अमेरिका खड़ा है, वो ये कहते हैं. लोग याद रखें किअमेरिका देश अगर प्रगति कर रहा है तो उसमें बाहर से आए लोगों का एक बड़ा हाथ है. औरहां, जो इस देश को महान बनाता है वो भी इसकी हर तरह के लोगों को स्वीकारने औरअनेकता में एकता बनाए रखने में है.' जब गार्डियन ने मुनीरा से पूछा कि हिजाब मेंअमेरिका का झंडा क्यों: हिजाब में झंडा होना अपने आप में एक स्टेटमेंट है. इससेहमें याद आता है कि इस देश नींव में ही लोगों को हर तरह के धर्म मानने की छूट है.अमेरिका के इतिहास में हर तरह, हर मूल के लोगों को अपनाया गया है. यही अमेरिका कीताकत है.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: 'मिस्टर प्रेसिडेंट, आप शरणार्थियों को नहीं निकाल सकते': अमेरिकीकोर्ट आलिया भट्ट ने अपनी फेवरेट सेक्स पोजीशन बताई तो वो हमारे लिए खबर क्यों है?50 साल का आदमी पॉर्न देखे वो गंदा नहीं, गंदे वो हैं जो ख़ून बहाते और युद्ध करतेहैं