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मुंबई हमला हुआ ना, इसीलिए इस मुस्लिम औरत ने ट्रंप को वोट किया

4 साल की उम्र में अमेरिका चली गई थीं असरा नोमानी.

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ऋषभ
11 नवंबर 2016 (Updated: 11 नवंबर 2016, 01:38 PM IST)
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असरा नोमानी. अमेरिका में रहती हैं. ट्रंप को वोट किया है. जबकि ट्रंप ने एक साल से मुसलमानों के खिलाफ धान बो रखा है. क्या है ऐसा कि आठ साल तक प्रेसिडेंट रहे ओबामा की बात नहीं मानी लोगों ने. असरा ने भी नहीं माना. पढ़िए उन्हीं का कहा हुआ:
मैं एक मुसलमान हूं. औरत. अमेरिका में जन्म नहीं हुआ. पर रहती यही हूं. और मैंने ट्रंप को वोट किया है. मैं रेसिस्ट नहीं हूं. मैं किसी को मारना नहीं चाहती. पर मैंने वोट दिया है. इसकी वजह है. पर्सनल.


2008 में मैं वर्जीनिया रहने चली गई. क्योंकि इस स्टेट ने ओबामा को वोट किया था. स्लेवरी से निकले राज्य ने पहला अफ्रीकन-अमेरिकन प्रेसिडेंट चुनने में मदद की थी.


पर 8 साल बाद जब मैं वोट करने गई तो मैंने हाथ में पेन दबाए ट्रंप के नाम के आगे कलर किया. फिर मैंने देखा कि हिलेरी ने ट्रंप को फोन कर अपनी हार मानी. तो मेरे एक दोस्त ने ट्विटर पर पूरी दुनिया से माफी मांगी. कि लाखों ऐसे अमेरिकन हैं जो ट्रंप से एग्री नहीं करते हैं. उन लाखों के लिए मैं शर्मिंदा हूं जो ट्रंप से एग्री करते हैं.
मेरे दोस्त ने एज्यूम कर लिया होगा कि मैं भी उन्हीं में से एक हूं. हां, ये सच है कि मैं हिलेरी की पार्टी के एबॉर्शन, सेम-सेक्स शादी और क्लाइमेट चेंज पर के स्टैंड को मानती हूं.
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Video: WUSA9 / Photo: Asra Nomani Washington Post



पर मैं एक सिंगल मदर हूं. मेरा बच्चा है. तलाक हो चुका है. पर मैं ओबामा के हेल्थ इंश्योरेंस को अफोर्ड नहीं कर सकती. फिर मैंने घर लिया था. ओबामा का मॉर्टगेज वाला प्लान भी मेरे इस काम नहीं आया. आज मैं वर्जीनिया में देखती हूं कि मेरे जैसे अमेरिकन दो जून खाने के लिए भी परेशान हैं.


फिर अब इस्लाम की बात करते हैं. मैं एक लिबरल मुस्लिम हूं. पर मैं दुनिया में इस्लामी आतंकवाद भी देख रही हूं. इस मामले में मैं ओबामा से सहमत नहीं हूं. ये लोग इस्लाम के आगे-पीछे नाच रहे हैं. हां, ये सही है कि ट्रंप ने इस मामले में बहुत सी ऐसी बातें कहीं जो मुझे अच्छी नहीं लगतीं. पर इस बात को अरब देशों ने बहुत ज्यादा बढ़ा-चढ़ा के कहा है. उतना भी ट्रंप ने नहीं कहा था.


ट्रंप के विरोध के ये सारे लोग उस आतंकवादी इस्लाम की बात नहीं करते जिसने मुंबई के ताज होटल में खून बहाया था. पल्स के नाइटक्लब में खून बहाया था. जून में हुए पल्स हमले के बाद ट्रंप ने तो सीधा-सीधा कह दिया था कि क्या अब ओबामा कहेंगे कि इस्लामी आतंकवाद है ये? अगर नहीं करते तो रिजाइन कर दें.


हिलेरी ने उस वक्त ओबामा की ही तरह बातों पर नाचते हुए कहा कि ये सब गलत है. किसी को मारना. पर आप जो भी शब्द कहें, सब एक ही बात है. मेरे ख्याल से सबका एक ही मतलब है.
फिर विकीलीक्स से हिलेरी क्लिंटन के ई-मेल भी लीक हुए. पता चला कि ये लोग इस्लामी आतंकवाद पर वही बातें कर रहे हैं. कि डिप्लोमेटिक प्रेशर बनायेंगे कतर और सऊदी अरब पर. पर फिर पता चला कि क्लिंटन फाउंडेशन को यही देश फंड कर रहे हैं. तो कौन किस पर प्रेशर बनायेगा?
मैं ट्रंप के लड़कियों वाले टेप की बात को नहीं मानती. वो उन्होंने अपने प्राइवेट स्पेस में कहा था. मैं मैक्सिको बॉर्डर पर दीवार बनाने की बात को भी नहीं मानती. मैं मुसलमानों को बैन करने की बात भी नहीं मानती. मैं ये मानती हूं कि ये पॉलिटिकल चीजें हैं. बढ़ा-बढ़ा के कही जाती हैं ये बातें. मैं अमेरिका के लोगों पर भरोसा करती हूं. मैं उन लोगों पर भरोसा नहीं करती जिन्होंने ट्रंप और उनके सपोर्टर्स को राक्षस बना दिया है.


चुनाव से पहले इंडिया के एक जर्नलिस्ट ने मुझे फोन कर के पूछा कि ट्रंप के अमेरिका में मुस्लिम बन के रहना कैसा लगेगा? मैंने कहा कि इंडिया की हूं मैं. 4 साल की उम्र में अमेरिका आई थी. मुझे कोई डर नहीं है. अमेरिका को इतिहास बताता है कि मुझे कोई डर नहीं रहेगा. मुझे ज्यादा डर है उन मुस्लिम तानाशाहों से. कतर और सऊदी अरब के जो हिलेरी के अमेरिका में हैं.


हमें सिर्फ ये नहीं कहना है कि मुस्लिमों से नफरत मत करो. हमें ये भी कहना है कि मुस्लिमों की की गई नफरत को भी कम करना है. जिससे कि हर इंसान सुकून से रहे.
वाशिंगटन पोस्ट के हवाले से


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