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सैकड़ों लोग मरते अगर ये आदमी ऐन वक्त पर ट्रेन के आगे न कूदता

देबबर्मा ने ट्रेन एक्सीडेंट रोकने के लिए जो किया, वो जानकर आप खड़े होकर तालियां बजाएंगे.

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16 जून 2018 (अपडेटेड: 18 जून 2018, 06:57 AM IST)
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अपनी बच्ची के साथ खड़े दबबर्मा और साथ में हैं ट्रेन के ड्राइवर.
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त्रिपुरा के साउथ में एक जगह है. नाम है अथरमुड़ा. पहाड़ी इलाका है. रोज़ कई ट्रेनें इस रूट से गुज़रती हैं. 15 तारीख को भी ऐसी ही एक ट्रेन वहां से निकलने वाली थी. लेकिन मौसम रोज़ जैसा नहीं था, थोड़ी बारिश हो रही थी. शाम के समय में कुछ लोग अपना काम खत्म कर घर लौट रहे थे. उसी भीड़ में एक आदमी था, जिसने वहां पर एक बड़ा ट्रेन एक्सीडेंट होने से रोक लिया.
जब देबबर्मा अपना काम निपटाकर अपनी बेटी के साथ घर जा रहे थे, रेलवे लाइन क्रॉस करते समय उन्हें वहां कुछ गड़बड़ लगा. तांक-झांक करने लगे. पता चला कि पटरी में कुछ दिक्कत है, अगर ठीक नहीं हुई तो आने वाली ट्रेन डीरेल हो जाएगी. अंबासा से अगरतला जाने वाली इस लाइन पर कुछ ही देर में एक ट्रेन आने वाली थी. देबबर्मा को उसे ठीक करना तो आता नहीं था, इसलिए उन्होंने तय किया कि ट्रेन के आने तक यहीं रुके रहेंगे. अगर वो इस चीज़ को नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ जाते, तो यहां एक्सीडेंट हो जाता, जिसमें बहुत से लोगों की जान जा सकती थी. लेकिन वो ठहरे रहे. दो घंटे बाद वहां एक ट्रेन आई. इसके बाद देबबर्मा ने क्या किया वो हमें बताया है उसी ट्रेन पर सवार एक यात्री संजय ने.
संजय ने दी लल्लनटॉप से बात करते हुए बताया-
हम लोग अथरमुड़ा के आस-पास पहुंच रहे थे. लोग ट्रेन की खिड़की-दरवाजों से बाहर देख रहे थे. मैं इंजन के ठीक पीछे वाली बोगी में था. अचानक से झटका लगा और ट्रेन रुकने लगी. थोड़ा आगे खिसकी और रुक गई. ट्रेन में सवार लोग परेशान हो गए. हमने नीचे उतरकर देखा तो एक आदमी अपने तौलिए के साथ ट्रैक के बीच में खड़ा था. हम भागते हुए उसके पास गए. पूछा कि क्या हुआ भाई? ट्रेन के रास्ते में क्यों खड़े हो? इसके बाद उस आदमी ने हमे बताया कि यहां के ट्रैक में कुछ गड़बड़ है. जब ड्राइवर ने वो देखा तो उसकी हलक सूख गई. क्योंकि उसे इसकी कोई जानकारी नहीं थी. फिर उन्होंने हमें बताया कि वो यहां पिछले दो घंटे से ट्रेन के इंतज़ार में यहां खड़े हैं. अगर ये आदमी नहीं होता तो आज कई लोगों की जान चली जाती. इसके बाद बहुत सारे लोगों ने उसका धन्यवाद किया और फोटो/सेल्फी वगैरह खींची. जनता की भीड़ के बीच ही वो आदमी अपनी बेटी को बताने लगा कि उसने आज कई लोगों की जान बचाई है. जाते वक्त देबबर्मा ने बताया कि आज वो बहुत खुश है कि उसने इतना अच्छा काम किया है.
ट्रैक में दिक्कत दिखने के बाद देबबर्मा दो घंटे तक ट्रेन के इंतज़ार में वहीं बैठे रहे.
ट्रैक में दिक्कत दिखने के बाद देबबर्मा दो घंटे तक ट्रेन के इंतज़ार में वहीं बैठे रहे.

दरअसल बारिश वगैरह के चलते रेलवे ट्रैक के नीचे की मिट्टी खिसक गई थी. इसे कैसे सही किया जाए, देबबर्मा को नहीं पता था. इसलिए उन्होंने ट्रेन रुकने के बाद ड्राइवर को दिखाया. इसके बाद रेलवे को इसकी जानकारी दी गई. रेलवे ने तत्काल प्रभाव से इसे ठीक करवाय, जिसके बाद वो ट्रेन वहां से गई. देबबर्मा त्रिपुरी समुदाय से आते हैं और मुंगियाकमी के पास में रहते हैं. इससे ज़्यादा उनके बारे में किसी को कुछ नहीं पता.


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