77 बरस की उम्र में भी दिल कहे, चोरी में ही है मज़ा
वेस्ट दिल्ली में रहने वाले एक बुजुर्ग को चोरी करने की लत है.
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Credit: video screengarb
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पुरानी आदतें जल्दी नहीं जाती हैं दोस्त. ऐसा ही इन दादू के साथ भी है. ये 77 साल के हैं. पर आज भी खुद को कार चुराने से रोक नहीं पाते. पुलिस रिकार्ड्स में सुपर नटवरलाल , इंडियन चार्ल्स शोभराज और सुपर चोर के नाम से इनको जाना जाता है. वैसे इनका असली नाम है धनी राम मित्तल.मित्तल साहब वेस्ट दिल्ली में रहते हैं. उनको मंगलवार को पुलिस से फिर से अरेस्ट कर लिया. इससे पहले वो कुल 24 बार अरेस्ट हो चुके हैं. अरेस्ट होने की इनकी बोहनी हुई थी सन 1964 में. उसके बाद तो ये सिलसिला चल निकला. अभी 2016 की शुरुआत में ही अरेस्ट हुए थे. जून में ही तो बेल मिली थी इनको. लेकिन 5 जुलाई को ये फिर से धरा गए. क्योंकि ये महानुभाव आदत से मजबूर हैं.
करीब एक महीने पहले की बात है. कहीं पार्किंग में एक कार खड़ी थी. मारुती एस्टीम. मित्तल साहब फ़ोन पर बात करने की एक्टिंग करते हुए कार के पास आए. कुछ सेकंड इधर-उधर देखा. कोई नहीं था. फिर अपनी मास्टर चाभी से कार का लॉक खोल लिया. और कार ले कर निकल लिए. सोच रहे होंगे किसी ने नहीं देखा. लेकिन ऊपर वाला सब देख रहा है. CCTV कैमरे में ये चोरी रिकॉर्ड हो गई. गाड़ी के मालिक ने गाड़ी चोरी होने की FIR कर दी थी. पुलिस खोजबीन में लगी थी.5 जुलाई को पुलिस ने चोरी हुई कार देखी. और देखा कि उसको एक बुज़ुर्ग आदमी चला रहा है. डाउट हुआ. गाड़ी रुकवाई. और मित्तल को अरेस्ट कर लिया. पुलिस अब उनसे पूछताछ कर रही है. पुलिस के एक इंचार्ज ने मित्तल से जुड़ी कुछ बातें बताईं. कहा कि इतने बुज़ुर्ग होने के बावजूद वो अपना चोरी करने का काम छोड़ना नहीं चाहते. यही उनके जीने का तरीका है. पिछले एक महीने में वो 4 कारें चुरा चुके हैं.
मित्तल ने अपनी ज़िन्दगी में बहुत बड़े-बड़े कारनामे किए हैं. चोरी और फ्रॉड का इनका करियर 52 साल का है. इस दौरान उनके खिलाफ 128 FIR दर्ज की गईं हैं. मित्तल लॉ में ग्रेजुएट हैं. कैलीग्राफी के स्टूडेंट रहे हैं. 1960 में वो रोहतक कोर्ट में क्लर्क थे. एक बार जज गए छुट्टी पर. करीब दो महीनों के लिए. उस टाइम मित्तल साहब जज बन कर कुर्सी पर बैठ गए. दो महीने के लिए. किसी को पता भी नहीं चला. और फिर बहुत सारे क्रिमिनल्स को बेल दे दी. जब असलियत सामने आई, वहां से मित्तल साहब को निकाल दिया गया.उसके बाद इन्होंने रोहतक रेलवे स्टेशन में क्लर्क की जॉब की. जॉब झूठे पेपर दिखा कर मिली थी. पर एक साल बाद धांधली पकड़ी गई तो वहां से भी काल दिया गया. कुछ दिनों तक ये रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर बनकर नकली पेपर बनाते रहे. फिर इन्होंने कारें चुराना शुरू किया. पुलिस के हिसाब से अब तक मित्तल साहब ने कुल 500 से ज्यादा कारें चुराई हैं. चुराकर वो उनको यूज़ की हुई कारों के डीलर को बेच देते थे. एक कार के तीस हज़ार से पचास हज़ार रुपए तक मिल जाते थे. मित्तल साहब को पैसे की कोई कमी नहीं है. लेकिन आदत है. चोरी की. अब ये आदत भी इनके साथ ही जाएगी. जब अरेस्ट होते हैं, अपना केस भी खुद ही लड़ लेते हैं. लॉ पढ़े हैं ना. घर में बीवी हैं. एक बहु है. लेकिन बेटे इनकी आदत से इत्ते ज्यादा परेशान हो गए कि घर ही छोड़ दिया. अब कहीं और जा कर रहते हैं.
मित्तल साहब की जो कंडीशन है. उसको क्लेप्टोमेनिया कहते हैं. चोरी करने की आदत. भीतर से एक तड़प सी होती है. चोरी करने की अपनी इस तड़प पर इस मेंटल कंडीशन वाले लोग कंट्रोल नहीं कर पाते. एक तरह की मानसिक समस्या है जिसका इलाज किया जाना ज़रूरी है.फिलहाल तो मित्तल साहब पुलिस की कस्टडी में हैं. CCTV का जो फुटेज उनको चोरी करते हुए दिखा रहा है. वो आप भी देख लो. https://www.youtube.com/watch?time_continue=65&v=5RahtOiGG5k
इस खबर में इनपुट अविनाश जानू ने दिया है.

