जज ने कूड़े के ढेर के पास कुर्सी लगा ली और कहा: जब तक कूड़ा हटेगा नहीं, यहीं बैठूंगा
बार-बार कहने के बावजूद कूड़ा हटाया नहीं जा रहा था.
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बाजार के इलाके में रहने वालों ने कूड़े के इस ढेर की शिकायत की थी. निगरानी के लिए ए एम बशीर वहां पहुंचे. बाईं तरफ कूड़े के ढेर का एक हिस्सा. दाहिनी तरफ नाक पर मास्क लगाकर बैठे ए एम बशीर (फोटो: ANI)
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'स्वच्छ भारत' अभियान को बड़े सारे चेहरे मिले. साफ जगह पर टोकरी भर सूखे पत्ते गिराकर फोटो खिंचवाने के लिए झाडू थामे नेता. छोटे नेता, बड़े नेता. सिलेब्रिटी नेता. मगर सच्ची वाली डेडिकेशन कम ही दिखाई देती है. आज ऐसे ही डेडिकेशन की एक तस्वीर केरल से आई है. केरल का अर्नाकुलम जिला. यहां जिला प्रशासन में एक अधिकारी हैं. नाम है, ए एम बशीर. डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी सेक्रटरी के पोस्ट पर हैं. सब-जज भी हैं. ये जनाब अर्नाकुलम बाजार में धरने पर बैठ गए हैं. क्यों? क्योंकि वो कचरे के ढेर से परेशान हैं. असल में परेशान तो उस इलाके के लोग हैं. ए एम बशीर लोगों की परेशानी से परेशान हैं. इसीलिए वो कूड़े के ढेर के पास बैठ गए. कि जब तक ये हटता नहीं, तब तक मैं जाऊंगा नहीं.

ये बाजार में पड़े कचरे का ढेर है. लोगों ने जिला प्रशासन से बार-बार इसकी शिकायत की थी (फोटो: ANI)
मॉनसून में कूड़े का ढेर और तंग करता है बशीर साहब यहां बाजार में निकले थे. इंस्पेक्शन के लिए. उन्हें लोगों की शिकायत मिली थी. कि बाजार में कूड़े का ढेर पड़ा गंधाता रहता है. फल-सब्जियां. सब पड़ी सड़ती रहती हैं. इसकी वजह से लोगों को दिक्कत होती है. मच्छर, मख्खियां. गंध अलग. मॉनसून भी आ चुका है. बारिश के मौसम में कूड़ा और ज्यादा सड़ता और तंग करता है. ए एम बशीर इन्हीं शिकायतों का जायजा लेने बाजार पहुंचे. उन्होंने कूड़े का ढेर देखा. हटवाने की कोशिश की. फिर उन्होंने क्या किया कि कुर्सी मंगवाई. नाक पर मास्क बांधा. और कुर्सी पर बैठ गए. बोले, जब तक कूड़ा नहीं हटता तब तक ऐसे ही बैठा रहूंगा.

परमेश्वरन ये संदेश देना चाहते थे कि शौचालय साफ करना कोई घृणित काम नहीं है. इसे रोजमर्रा के बाकी कामों की तरह किया जाना चाहिए. गांवों में अक्सर ये वाले शौचालय बनाए जाते हैं. गड्ढा भर जाता है, तो उसके अंदर जमा हुआ मल खाद बन जाता है.
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ये बाजार में पड़े कचरे का ढेर है. लोगों ने जिला प्रशासन से बार-बार इसकी शिकायत की थी (फोटो: ANI)
मॉनसून में कूड़े का ढेर और तंग करता है बशीर साहब यहां बाजार में निकले थे. इंस्पेक्शन के लिए. उन्हें लोगों की शिकायत मिली थी. कि बाजार में कूड़े का ढेर पड़ा गंधाता रहता है. फल-सब्जियां. सब पड़ी सड़ती रहती हैं. इसकी वजह से लोगों को दिक्कत होती है. मच्छर, मख्खियां. गंध अलग. मॉनसून भी आ चुका है. बारिश के मौसम में कूड़ा और ज्यादा सड़ता और तंग करता है. ए एम बशीर इन्हीं शिकायतों का जायजा लेने बाजार पहुंचे. उन्होंने कूड़े का ढेर देखा. हटवाने की कोशिश की. फिर उन्होंने क्या किया कि कुर्सी मंगवाई. नाक पर मास्क बांधा. और कुर्सी पर बैठ गए. बोले, जब तक कूड़ा नहीं हटता तब तक ऐसे ही बैठा रहूंगा.
...और हमें परमेश्वरन अय्यर याद आ गए ए एम बशीर को देखकर हमें परमेश्वरन अय्यर की याद आई. 1981 बैच के IAS अफसर. जिन्होंने 2009 में समय से पहले रिटायरमेंट ले लिया. सफाई के लिए खूब काम किया. बस भारत में नहीं, दूसरे देशों में भी. उनकी एक तस्वीर भी आई थी. वो एक गड्ढे में उतरे हुए हैं. और कुदाल से मल निकालकर गड्ढा साफ कर रहे हैं.Kochi: District Legal Services Authority Secretary & Sub judge,AM Basheer, sat beside a garbage pile in Ernakulam market & said he would only return after garbage is removed from the spot. He had went to market for inspection after receiving complaints about it #Kerala
— ANI (@ANI) June 13, 2018
(12.06.18) pic.twitter.com/fBrkYoJu8i

परमेश्वरन ये संदेश देना चाहते थे कि शौचालय साफ करना कोई घृणित काम नहीं है. इसे रोजमर्रा के बाकी कामों की तरह किया जाना चाहिए. गांवों में अक्सर ये वाले शौचालय बनाए जाते हैं. गड्ढा भर जाता है, तो उसके अंदर जमा हुआ मल खाद बन जाता है.
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