'मैं बैंक मैनेजर हूं, अपने ही नोट नहीं बदलवा पाई हूं'
जानिए, इस बुरे समय में क्या हाल है बैंक में काम करने वालों का.
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फोटो - thelallantop
बीते दिनों बड़े टाइम बाद बुआ को फ़ोन किया. वजह, वो बैंक में काम करती हैं. ये वो समय है, जब देश भर में लोगों को अपने सारे पुराने दोस्त और रिश्तेदार याद आए. खासकर वो वाले, जो बैंक में काम करते हैं. लल्लो-चप्पो भी हो रही है और घर में मिठाई भी भिजवाई जा रही है. और उसके बाद लोग ये भी कह देते हैं, 'बाजपेयी जी, आप तो बैंक में हैं. जितने चाहे उतने पैसे बदलवा लीजिए.'
लेकिन अगर आप बैंक में काम करने वालों से बात करें, तो पाएंगे कि वो बेचारे खाने का वक़्त नहीं निकाल पा रहे हैं. उन्हें दिन भर फ़ोन आ रहे हैं. थक-हारकर रात को वो घर पहुंचते हैं, और अगले दिन सुबह-सुबह भाग जाते हैं. और तो और, सैटरडे-संडे को छुट्टी तक नहीं मिलती.
बैंक में काम करने वाली एक ऐसी ही लड़की से 'ह्यूमन्स ऑफ़ बॉम्बे' फेसबुक पेज ने बात की. और जो जवाब उस लड़की ने दिया, वो हम सबको पढ़ना चाहिए.'मैं एक बैंक मैनेजर हूं. 8 नवम्बर को मैं थोड़ी देर तक काम कर रही थी. मेरे पति ने मुझे कॉल किया और कहा, 'तुमने मुझे कैसे नहीं बताया कि 500 और 1000 के नोट बंद होने जा रहे हैं.' मुझे झटका लगा. हम में से किसी को नहीं पता था कि क्या हो रहा था. हमें बस ये पता था कि ये बड़ी चीज है. इसलिए हम अगले दिन तैयारी करके काम पर गए. लेकिन फिर भी हम तैयार नहीं थे कि क्या होने जा रहा है. लोग सिर्फ बैंक के बाहर लगी लाइन ही देख रहे हैं, लेकिन जो दरवाजों के पीछे हो रहा है, वो एकदम अलग है. हम सब इस देश के एक डर्टी सर्कल के भाग बन चुके हैं. एक तरफ चाय वाले, कपड़े प्रेस करने वाले अपनी गाढ़ी कमाई बैंक में जमा करा रहे थे और दूसरी तरफ हमारे पास काला धन भी आ रहा था, जो बहुत दिनों से छुपा कर रखा गया था. ये सारा कैश सड़े हुए चमड़े की तरह बदबू करता है. ये इतना बदबूदार था कि इससे निपटने के लिए हमारे बैंक की हर ब्रांच ने कैशियर के लिए मास्क ऑर्डर किए हैं. अगले ही दिन, कई दिनों से हमसे जुड़ा एक बिल्डर आया जिसका एक 'नॉन परफार्मिंग एसेट' में डिफ़ॉल्ट था (उसने कर्जा नहीं चुकाया था बैंक का). वो अपने पैसे लेकर आ गया. जब हम पिछले छह महीने से उसके पीछे पड़े थे, तब वो कभी सामने नहीं आया. उसके पास 300 करोड़ से ज्यादा काला धन था, लेकिन इससे पहले उसने क्लेम किया था कि उसके पास कुछ भी नहीं है. ये तो हाल है. मुझे गलत मत समझिये. जो कुछ हुआ, मैं उसकी शिकायत नहीं कर रही हूं. ये एक क्रांतिकारी कदम है और इससे हमारा देश मजबूत होगा और मुझे पता है आम आदमी पर क्या गुजर रही है, लेकिन हम क्या कर सकते हैं? हमारे पास पहले से बहुत सारा कैश है और इतनी भीड़ के लिए हमारे पास बहुत कम लोग हैं. सबसे बुरी बात ये है कि लोग हमारे साथ बहुत बुरी तरह बर्ताव कर रहे हैं. चार घंटे पहले ही मुझे एक फ़ोन आया नांदेड से. एक आदमी मुझ पर लगातार चिल्लाया. वो मराठी में मुझ पर चिल्ला रहा था और मैं चुपचाप बैठी सुन रही थी कि भला मैं इसमें क्या कर सकती हूं. इस तरह के दर्जनों फोन हमें रोज़ आ रहे हैं. यहां तक कि धमकियां भी मिलीं. लोग कहते हैं कि वो मीडिया वालों को भेज देंगे, हमें 'एक्सपोज' करने के लिए. हम कब सीखेंगे कि हम बैंकर हैं. हमारे पास पहले से ही बहुत काम होता है. हम पिछले कुछ दिनों में शायद ही सोए होंगे. छुट्टियां नहीं ले रहे हैं. यहां तक कि हमने अपने खुद के 500 रुपए नहीं एक्सचेंज किए हैं. हमारे बैंकों को घाटा हो रहा है. पहले से इतना कोलाहल है. सबकी एक ही स्थिति है. हम सब को बैठकर समझना होगा कि चीजों को ठीक करने की कोशिश की जा रही है. ये हमारे देश के भविष्य के लिए है और कम से कम इतना तो कर ही सकते हैं कि धैर्य बनाए रखें और विश्वास रखें कि सब कुछ जल्द ही ठीक हो जाएगा. और पहले से भ्रष्ट व्यवस्था को और भ्रष्ट ना करें. अब हमें इसकी और ज्यादा जरूरत नहीं है.'
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