कंप्यूटर में कीड़ा कैसे घुस जाता है?
10 साल का लड़का, एक बग खोज जकरबर्ग से 10 हजार डॉलर ले गया, हमें भी तो पता हो ये बग है क्या?

इंटरनेट पर जो भी वेबसाइट दिखती है ना उसके पीछे बहुत सारी प्रोग्रामिंग की जाती है. बैटरी से चलने वाले खिलौने याद हैं? बचपन में खेलते थे जिससे. या छोटे भाई-बहन, भांजे-भतीजे अब भी खेलते होंगे. उसके अंदर कितने सारे पुर्जे लगे होते हैं. लेकिन बाहर से दिखता क्या है? सिर्फ खिलौना. मान लो उसके अंदर हाथ वाले पुर्जे में गड़बड़ी आ जाये. अब खिलौना बाकी तो चलेगा लेकिन उसका हाथ नहीं चलेगा. बस कंप्यूटर की प्रोग्रामिंग में भी ऐसा ही होता है. किसी वेबसाइट में जो हमको स्क्रीन पर दिखता है वो खिलौना है. जो प्रोग्रामिंग है वो उसके पुर्जे हैं जिससे वो वेबसाइट चलती है. अब अगर प्रोग्रामिंग में कोई छोटी सी भी गलती हो जाए तो वेबसाइट या ऐप का काम भी गड़बड़ा जायेगा. यही जो गलती होती है उसको बग कहते हैं. कई बार ये इतनी छोटी होती हैं कि समझ में नहीं आतीं. ना तो प्रोग्रामिंग करने वाले को ना ही वेबसाइट यूज़ करने वाले को.
बग को हल्के में ना लिया जाये. एक छोटा सा बग भी NASA के पूरे मिशन को फेल कर सकता है.
ये वो जो हमको स्क्रीन पर दिखता है ये उसके पीछे की प्रोग्रामिंग
बग नाम कहां से पड़ा?
बग फिक्स करने का तरीका अब अगर लिखने में कुछ गड़बड़ हुई है तो उसको ठीक करने का भी कोई तरीका होगा. बिलकुल है. बग यानी कि प्रोग्रामिंग में जो गलत लिखा है उसको मिटा दिया. उसकी जगह सही लिख दिया. इसको डी-बगिंग कहते हैं. लेकिन ये काम थोड़ा मुश्किल है. एक्सपर्ट ही कर पाते हैं. कई बार एक जगह का बग हटाने में दूसरी जगह कुछ गलत हो जाता है. एक को सही करते करते नया बग बन जाता है. तो इसके लिए वही लोग ये काम कर पाते हैं जिनको कंप्यूटर और प्रोग्रामिंग का बहुत ज्ञान होता है. सबसे मुश्किल होता है 1000 से ज्यादा पन्नों के प्रोग्राम में से गलती यानी बग ढूंढने में. बात इसलिए चली कि ऊपर एक खबर का जिक्र हुआ था. फिनलैंड के 10 साल के एक बच्चे ने इस वेबसाइट को हैक कर लिया. इंस्टाग्राम के मालिक मार्क ज़करबर्ग को ईमेल भी किया कि आपके सिस्टम में गड़बड़ है. प्रोग्रामर्स को गड़बड़ समझ आ गई. उन्होंने तुरंत ही गलतियां सुधार लीं. फेसबुक की तरफ से उसको इसके लिए 67,000 रुपए ($10,000) का “बग बाउंटी” ईनाम दिया गया. फिनलैंड में रहने वाला जानी सबसे छोटी उम्र का शख्स है जिसको ये ईनाम मिला है. कोई फेसबुक और उसकी साथी कम्पनियों की प्रोग्रामिंग में कोई कमी बताता है तो उसे इसके लिए ये “बग बाउन्टी” ईनाम दिया जाता है. 2011 से अब तक कंपनी कुल 286,143,500 रुपये (4.3 मिलियन डॉलर) इस ईनाम में दे चुकी है. ये खबर पढ़कर दिमाग में एक बात आई. ये Bug है क्या बला? कंप्यूटर वाले तो जानते ही होंगे. हम नहीं जानते थे. तो हमने खोजबीन की. अब समझ गए. लगा, अपने जैसे बाकी लोगों से भी अपना 'ज्ञान' बांट लें. अब तो बेसिक एकदम क्लियर हो गया ना? अब कोई पूछेगा तो चौड़े होकर समझा भी लोगे. समझा कर हीरो भी बन जाओगे. हम अभी से कहे देते हैं, मेंशन नॉट. :)हिंदी में बग (bug) का मतलब होता है कीड़ा. 1946 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में कंप्यूटर लैब में काम चल रहा था. वहां पर काम करने वालों को मशीनों के बीच में एक कीड़ा फंसा मिला. लोगो ने उस कीड़े को निकाल कर एक नोट बुक में चिपका दिया. उसके साथ में लिख दिया, "आज हमने काम के दौरान एक बग पकड़ा." उस दिन के बाद से कंप्यूटर सॉफ्टवेयर में कोई भी गड़बड़ी होती थी. उसे बग ही कहा जाने लगा.

