63 साल की इलाहाबादी दादी ई-रिक्शा चलाती हैं
जिंदगी भर नौकरी की. लेकिन रिटायरमेंट के बाद सौतेले बेटों ने हाथ खींच लिए. अब रिक्शा चलाती हैं. अपना और अपनी छोटी बहन का खयाल रखती हैं.
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आशुतोष चचा
13 अप्रैल 2016 (अपडेटेड: 13 अप्रैल 2016, 02:09 PM IST)
अपने इलाके की बुजुर्ग महिलाओं को देखना. 60 साल पार करने के बाद उनकी मजबूरी होती है हर काम के लिए फैमिली पर डिपेंड हो जाना. लेकिन ये दादी तो गजब हैं. 63 साल की उम्र में ई रिक्शा चलाती हैं.
इलाहाबाद की वीणापाणी ई रिक्शा चलाती हैं. वजह कुछ खास नहीं है. वही कि फैमिली ने हाथ खींच लिए. चाहती तो घर परिवार को कोसते हुए जैसे तैसे दिन काटतीं. लेकिन नहीं. उन्होंने सिर उठा कर जीने का और कमाने का फैसला किया. उनके पति के अलावा तीन सौतेले बेटे हैं. ये सब अब पड़ोसियों की गालियां खाते हैं. वीणा अपनी चाल में चलती जाती हैं.
हमेशा सेल्फ डिपेंड रहीं, लेकिन रिटायरमेंट के बाद...
शुरुआती दौर में ही नौकरी कर ली. एक प्राइवेट कंपनी में. उसके अलावा जनगणना विभाग में. लेकिन 60 के पार तो रिटायरमेंट होनी ही थी. पति पहले ही छोड़ चुका था. सौतेले बेटों ने भी साथ छोड़ दिया.
वीणा के ऊपर खुद के अलावा छोटी बहन की भी जिम्मेदारी थी. रिटायरमेंट से मिले पैसे और कुछ कर्ज लिया. इन पैसों से ई रिक्शा खरीदा. उसको चलाने के लिए ड्राइवर रखा. लेकिन हर ड्राइवर कुछ दिन काम करके नौटंकी फैला देता. तंग आकर फैसला लिया कि खुद चलाएंगी.
सर्दी गर्मी झेलते हुए, उसमें रिक्शा चलाते हुए उनके चेहरे पर कभी गुस्सा या तकलीफ नहीं दिखती. हमेशा एक मन मोहने वाली मुस्कान रहती है. देखो ये वो दौर है जब बड़े बड़े डिग्री डिप्लोमा वाले हार मान जाते हैं. कुछ सुसाइड कर लेते हैं. जरूरत है कि हार मानने वाले आएं और दादी से ट्रेनिंग लें.