सूर्यासंगिनी चौधरी 6 साल की बच्ची है. उत्तर प्रदेश की रहने वाली है. बागपत जिलेके बरौत गांव में अपने मम्मी-पापा और भाई-बहन के साथ रहती है. इसके पापा संदीपचौधरी एक केमिकल इंजीनियर हैं और मम्मी मनीषा दिल्ली विश्वविद्यालय से डेवलपमेंटसाइकोलॉजी में डॉक्टरेट हैं. पहाड़ पर चढ़ना सूर्यासंगिनी को अच्छा लगता है. परबड़ी होकर पॉलिटिशियन बनना चाहती है. ताकि देश की सेवा कर सके. 16,300 फीट ऊंचीकंचनजंगा बेस कैंप तक वो चढ़ गई . ऐसा करने वाली वो अबतक की सबसे कम उम्र की ट्रेकरबन गई है. 27 फरवरी 2016 को सूर्यासंगिनी ने अपने परिवार के साथ कंचनजंगा पर चढ़नाशुरू किया था. 10 दिन की चढ़ाई में सूर्यासंगिनी और उसके घरवालों को कई मुश्किलेंभी आई. ऑक्जसीन की कमी और टेंपरेचर भी फेवरेबल नहीं था. कंचनजंगा बेस कैंप परट्रेकिंग करने के लिए सिक्किम के युक्सम गांव के ग्राम पंचायत से परमिशन लेनी पड़तीहै. बाद में ट्रेकर को सर्टिफिकेट भी देते हैं. सूर्यासंगिनी को भी युक्सम गांव केग्राम पंचायत ने सर्टिफिकेट दिया है. जिसमें ये साफ-साफ लिखा है कि सूर्यासंगिनी नेसफलतापूर्वक चढ़ाई की है. उसने साफ़ लिखा था यहां तक जा चढ़ने वाली सूर्यासंगिनी सबसेकम उम्र की ट्रेकर है. इसके पहले भी ढ़ाई साल की उम्र में सूर्यासंगिनी ने 12,500फीट उंची पिंडारी ग्लेशियर की चढ़ाई की थी. बीते पांच साल में सूर्यासंगिनी अपनेपरिवार के साथ कई बार ट्रेकिंग कर चुकी है.