कैलिफोर्निया में 57 साल की एक औरत है. डायनी यडेल्सन नाम है. पेशे से फोटोग्राफरहै. ढेर सारे अवॉर्ड विनिंग फोटोज क्लिक कर चुकी हैं. इसके अलावा वो एक मां है. उनबच्चों की जो इस दुनिया में आ न सके. इन दिनों ये उन मम्मियों को जीना सिखा रहीहैं. जिन्होंने अपने बच्चे गर्भ में ही खो दिए. डायनी एक फोटो सीरीज के जरिए अपनीकहानी सबको बता रही हैं. 'लॉस्ट' नाम से इस फोटो सीरीज में डायनी के बनाए अपनेबच्चों के लिए कपड़े, जूते और खिलौने हैं. कुल 11 फोटोज की ब्लैक एंड वाइट सीरीजहै. हर फोटो उनके मिसकैरिज से जुड़ा है. आप भी फोटोज देखिए और डायनी की कहानीपढ़िए. डायनी 34 साल की थीं जब पहली बार मां बनीं. सब औरतों की तरह वो भी खुश थीं.सपने संजो रही थीं. बच्चे के आने के दिन गिन रही थीं. कपड़े, स्वेटर, जूते बना रहीथीं. खिलौनों से घर भर रही थीं. बिल्कुल मेरी बुआ की तरह. वो भी जब प्रेग्नेंटथीं तो ऐसा ही करती थीं. ठंड के दिनों में धूप सेंकतीं और आने वाले बाबू के लिएस्वेटर बुनतीं. उन्होंने तो आने वाले बच्चे का नाम भी सोच लिया था. बुआ का बेबी भीगर्भ में ही मर गया था. तब मैं बित्ते भर की थी. पता नहीं था कि ये होता क्या है. नये कि बच्चे आते कहां से हैं. बुआ इस हादसे के बाद कई दिनों तक उदास रही थीं. खानाभी दादी के जबरदस्ती करने पर खाती थीं. और जब देखो रोते ही रहती थी. हम पूछते थे परमम्मी कहतीं, बुआ को परेशान मत करो. और भगा देतीं. मेरी बुआ ने तो खैर एक बारमिसकेरिज का दर्द झेला. पर डायनी 11 बार इस तकलीफ से दो-चार हुईं. 1993 से लेकर साल2005 के बीच लगातार डायनी के मिसकेरिज होते रहे. इसके बाद वो कभी मां नहीं बन पाईं.लेकिन प्रेग्नेंसी के टाइम वो बच्चे के लिए कुछ न कुछ रचती-बुनती रहीं. पर नन्हेबच्चे पर इन कपड़ों को सजते देखना उनका सपना ही रह गया. 2005 के बाद करीब 10 साल तकडायनी उन्हीं यादों के साथ रही. साल 2015 में तय किया कि वो अपनी कहानी सबकोबताएंगी. डायनी का कहना है कि ऐसा कई मम्मियों के साथ हुआ होगा. बस फर्क इतना है किमेरे साथ 11 बार हुआ. मिसकेरिज 1 बार हो या 11 बार तकलीफ उतनी ही होती है. फिर क्याथा. डायनी ने उन औरतों से बात करने का फैसला किया, जिन्होंने अपना बच्चा गर्भ मेंही खोया. उन्होंने अपने अल्ट्रासाउंड्स की इमेज सोशल साइट्स पर शेयर कीं. और कहा किउनके जैसी औरतों को अपना दर्द जरूर शेयर करना चाहिए. इससे उन्हें थोड़ी राहतमिलेगी. और वो खुलकर जी पाएंगी.अल्ट्रासाउंड की तस्वीरें लोगों के साथ शेयर करने के बाद मुझे थोड़ा हल्का महसूसहुआ: डायनीडायनी से लोग अक्सर सवाल पूछते हैं कि इतना सब होने के बाद भी वो इतनी पॉजिटिव कैसेरहती हैं. डायनी इसका जवाब बड़े प्यार से देती हैं. कहती हैं, 'कभी दर्द के डर सेअपनी खुशियों की कोशिश नहीं छोड़नी चाहिए.' 'लॉस्ट' फोटो सीरrज मेरी तरफ से उन सभीबच्चों के लिए सम्मान है जो इस दुनिया में आ नहीं सके. इस सीरीज के जरिए वो हमेशामेरे करीब रहेंगे. (सभी तस्वीरें pinterest से हैं. स्टोरी हमारी इंटर्न जागृतिक नेएडिट की है)