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छोटे से दाने से शुरू हो बैताल बन गया औरत के शरीर का ये ट्यूमर

एक महिला के शरीर से 5.5 किलो का ट्यूमर सक्सेसफुली निकला गया.

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रामवती
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लल्लनटॉप
30 नवंबर 2016 (Updated: 30 नवंबर 2016, 10:24 AM IST)
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28 साल की रामवती बिहार के समस्तीपुर की रहने वाली है. वो रोज अपनी जिंदगी के लिए जंग लड़ रही थी. रामवती न्यूरोफिब्रोमा से जूझ रही थी. जो कि नर्वस सिस्टम से रिलेटेड जेनेटिक डिसऑर्डर है. उसका शरीर रोज 5.5 किलो ट्यूमर को ढोता था. ये  ट्यूमर रामवती के छाती, कंधे और पीठ तक फैला हुआ था. रामवती का जीवन बहुत ही दुखद हो गया था. इस वजह से वो मानसिक रूप से भी परेशान रहती थी. पर अब रामवती की जिंदगी बदल गई है. अब से वो भी नॉर्मल जिंदगी जिएगी. सोमवार को रामवती के ट्यूमर को राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल में सक्सेसफुल तरीके से सर्जरी कर निकाल दिया गया. एक्सपर्ट्स का कहना है कि न्यूरोफिब्रोमा ट्यूमर कोई संक्रामक बीमारी नहीं है. बल्कि ये बीमारी बॉडी में सेल्स के एबनॉर्मल ग्रोथ की वजह से होता है. वैसे ये बीमारी रेयर है. रामवती बिहार के सभी अच्छे हॉस्पिटल्स के चक्कर लगाने के बाद दिल्ली के राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल इलाज कराने पहुंची थी. इतने बड़े और खतरनाक ट्यूमर को निकालना सर्जन्स के लिए एक टफ चैलेंज था. पर सर्जंस के हार्ड वर्क और काबिलियत की वजह से सर्जरी सक्सेसफुल रहा. रामवती का वजन 45 केजी से घटकर अब 39 केजी हो गया है. सर्जरी के बाद रामवती की जिंदगी बदल गई है. अब वो हल्का महसूस कर रही है. फिलहाल हो हॉस्पिटल में ही एडमिट है. जहां उसके हेल्थ में सुधार हो रहा है. सर्जरी डिवीजन के डॉक्टर समीक भट्टाचार्य ने बताया कि "यह न्यूरोफिब्रोमा का पहला ऐसा केस है, जिसमें ट्यूमर नाक, कंधा और पीठ तक फैला हुआ था. पर ये ट्यूमर कैंसर वाला नहीं था." डॉक्टर भट्टाचार्य ने साथ ही बताया, "सबसे बड़ी कठिनाई ये थी कि ट्यूमर बहुत ही क्रूशियल नर्व्स से जुड़े हुए थे. सर्जरी के दौरान इस बात का पूरा ध्यान रखा कि नर्व्स और ब्लड वेसल को कोई नुकसान न हो. और सर्जरी के दौरान ब्लीडिंग को कंट्रोल में रखना भी एक बड़ा चैलेंज था हमारे लिए. इसके लिए हमने ग्रेजुअली ट्यूमर को निकालना शुरू किया. उसके बाद ट्यूमर निकालने के बाद खाली हुए पार्ट को जांघ के टिश्यूज के द्वारा भरा गया." न्यूरोफिब्रोमा के इलाज का कोई मेडिसीन नहीं है. इसका सर्जिकल प्रोसीजर ही एक मात्र विकल्प है. ये सबसे ज्यादा बच्चों में पाया जाता है. शुरुआत में ये छोटे से दाने के तरह होता है. और ऐसा ही रामवती के साथ भी हुआ. रामवती ने बताया कि "कुछ ही सालों में ट्यूमर मेरे छाती, नाक और पीठ तक बढ़ गया. मैं ढंग से कपड़े तक नहीं पहन सकती थी. और न ही सो पाती थी. इसके बाद मैंने लोगों के बीच जाना छोड़ दिया. मेरे पति और बच्चे भी मुझसे दूर रहने लगे."

ये स्टोरी आदित्य प्रकाश ने की है 


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