बिजली के बिल के चलते बंद होने जा रहा है, 44 साल पुराना थिएटर
देश के टॉप-20 थिएटर्स में एक अक्षरा थिएटर बंद होने की कगार में हैं, बचाने के लिए ऑनलाइन मुहिम भी चालू है.
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Source- Akshara Theatre
देश के टॉप 20 थिएटरों में शामिल अक्षरा थिएटर अंधरे में डूबने की कगार पर है. और इसकी वजह है बिजली का बिल. थिएटर इस काबिल नहीं है कि इत्ता पैसा दे दे. बिजली बिल इकठ्ठा करने के लिए ‘बिटगिविंग’ पर एक ऑन लाइन मुहिम शुरू की गई है.
44 साल पुराने थिएटर के अधिकारियों का कहना है कि बिजली विभाग ने हमें तीन लाख रुपये का बिल भेजा था. जिसे जमा करने की आखिरी तारीख 1 मार्च थी. इत्ते पैसेइ नहीं पुजे. जब तीन लाख बिजली का बिल था तो किसी तरह तो हमने दो लाख रुपये जुटाए, नाक-भौं सिकोड़ने के बाद बिजली विभाग वालों ने लिया. कुछ दिन बाद फिर तीन लाख का बिल आ गया.
थिएटर को एक नोटिस मिला है जिसमें उन्हें बताया गया है कि अगर वे चार लाख रुपये का बकाया बिल 15 मार्च तक जमा नहीं कराते हैं तो थिएटर की बिजली काट दी जाएगी. 1972 में अक्षरा थिएटर शुरू हुआ था. शुरू किए थे. कवि,गायक, थिएटर और टेलीविजन निर्देशक गोपाल शर्मन, अभिनेत्री जलबाला वैद्य और उनकी बेटी अनुसूया भी साथ थे.
1980 में ये नो प्रॉफिट वाली थिएटर सोसाइटी " द अक्षरा नेशनल क्लासिक थिएटर ऑफ इंडिया" के नाम से रजिस्टर्ड हुआ. दिल्ली ये थिएटर पूरे एक एकड़ में फैला हुआ है. लाइव शो के लिए इनके पास चार अलग-अलग हिस्से हैं. लाइब्रेरी से लेकर एडिटिंग स्टूडियो, और भी सात-भांत की मशीनरी अलग. बच्चों और यूथ को सिखाने के लिए क्लासरूम भी हैं.
(जागृतिक, छोटू दबंग, टीम दी लल्लनटॉप)

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