किसान आंदोलन: अब ब्रिटेन की संसद में उठा भारत के किसानों का मुद्दा
मोदी के सामने मुद्दा उठाने को 36 सांसदों ने विदेश सचिव डॉमिनिक राब को लेटर लिखा.
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भारत में किसान आंदोलन का मुद्दा ब्रिटेन की संसद में भी उठा है. (फाइल फोटो- Reuters)
भारत में किसान आंदोलन चल रहा है. केंद्र सरकार के कृषि कानून के विरोध में पंजाब-हरियाणा और आस-पास के किसान राजधानी दिल्ली में जमा हैं. हफ्ते भर से ऊपर हो गया है. किसानों का मुद्दा देशभर में तो छाया ही है, विदेश में भी चर्चा है. किसान आंदोलन का मुद्दा ब्रिटेन की संसद में उठा है. वहां अलग-अलग पार्टियों के कुल 36 सांसदों ने विदेश सचिव डॉमिनिक राब को एक पत्र लिखा है. पत्र में उनसे मांग की गई है कि वे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात करें और किसानों का मुद्दा उठाएं. इन 36 सांसदों की अगुवाई कर रहे हैं लेबर पार्टी के सांसद तनमनजीत सिंह धेसी.
पत्र में सांसदों ने राब से मिलने का समय मांगा है और कहा है कि विदेश मंत्रालय ये भी बताए कि वो भारत से बात करने की ज़िम्मेदारी किस प्रतिनिधिमंडल को दे रहा है. पत्र में लिखा है –36 British MPs write to British Foreign Secretary @DominicRaab on #FarmersProtests in India pic.twitter.com/xn1mepRe6c
— Sidhant Sibal (@sidhant) December 4, 2020
“पिछले एक महीने में तमाम सांसदों ने आपको और भारतीय हाई कमीशन को पत्र लिखा. ये पत्र भारत में लाए गए तीन किसान कानूनों और उनके प्रभाव को लेकर है. इन कानून के आने के बाद भारत में कोविड-19 के बाद भी किसानों का हुजूम आंदोलन में उमड़ पड़ा है. वे अपने शोषण के ख़िलाफ और अपने उत्पाद के उचित दाम के लिए आवाज़ उठा रहे हैं. ये पत्र UK के सिख और हर उस शख़्स की चिंता को व्यक्त करने के लिए लिखा जा रहा है, जो पंजाब से जुड़ा है. हालांकि ये मुद्दा भारत के हर राज्य को प्रभावित करने वाला है. कई ब्रिटिश सिख और पंजाबियों ने अपने-अपने सांसदों के सामने ये मुद्दा उठाया है, क्योंकि उनकी पुश्तैनी ज़मीनें पंजाब में हैं, परिवार है. वे सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं.”इससे पहले लेबर पार्टी की सांसद प्रीति कौर गिल ने ट्विट किया था –
“हैरान करने वाली बात है. जो विवादित बिल किसानों की रोजी-रोटी को प्रभावित कर सकता है, उसके ख़िलाफ किसान शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं. लेकिन उन पर वाटर कैनन का इस्तेमाल किया जा रहा है. उन्हें चुप कराने के लिए आंसू गैस छोड़ी जा रही है.”
पत्र पर दस्तख़त करने वालों में लेबर, कन्ज़र्वेटिव और स्कॉटिश नेशनल पार्टी के सांसद शामिल हैं. पूर्व लेबर लीडर जेरेमी कोर्बिन, वीरेंद्र शर्मा, सीमा मल्होत्रा, नाडिया व्हिटोम ने भी पत्र पर दस्तख़त किए हैं.Shocking scenes from Delhi. Farmers are peacefully protesting over controversial bills that will impact their livelihoods. Water cannons, and tear gas, are being used to silence them. #HumanRights@BBCWorld#Indianfarmers#FarmersBill2020https://t.co/2ROyb5WSHI
— Preet Kaur Gill MP (@PreetKGillMP) November 28, 2020

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