मासूमों को पीटते, 'सेवा' के नाम पर जबरन बनाते थे इसाई
ग्रेटर नोएडा और मेरठ में चलने वाला 'इमैनुएल सेवा ग्रुप' से छुड़ाए गए 30 बच्चे.
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फोटो - thelallantop
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"वो मुझे पीटते, कलाइयां पंखे से बांध मुझे लटका देते, कई दिनों तक भूखा रखते." कहने वाला बच्चा है वो जिसे इस 'सेवा' ग्रुप ने जबरन इसाई धर्म में कन्वर्ट कर दिया है.
ग्रेटर नोएडा और मेरठ में चलने वाला 'इमैनुएल सेवा ग्रुप' जाने कितने बच्चों के साथ ऐसा कर चुका था. तकरीबन हफ्ते भर पहले जब दो सताए हुए बच्चों की मां ने पुलिस में कंप्लेंट की, तब पता चला कि ये किसी एक बच्चे का केस नहीं, बल्कि असल में पूरा का पूरा रैकेट है. जो जबरन बच्चों का धर्म बदल कर उन्हें इसाई बना देता है. औरत की शिकायत के बाद पड़े छापे से 30 बच्चों को उनके लिए जेल बन चुके शेल्टर होम से निकाला.

किचन से निकले कॉकरोच और चूहे की पॉटी
एक बच्चे ने हिंदुस्तान टाइम्स अखबार को बताया, "मुझे मेरे घरवालों से 15 महीनों तक मिलने नहीं दिया. सिर्फ बाइबल पढ़ने को मिलती. मुझसे जबरदस्ती बाइबल के पैसेज रटवाए जाते थे. भैंस का गोश्त खिलाते थे और अगर कोई डोनर आ जाए तो उसके सामने मुझसे परेड करवाते थे." बच्चों की मानें तो उनके दो नाम होते थे. एक वो जो उनके घर वालों ने दिया था. और एक वो जो उन्हें ग्रुप वाले तब देते थे जब वो बाइबल पढ़ना सीख जाते थे.
"अगर बाइबल पढ़ते समय कोई गलती हो जाए तो बेंत और बेल्ट से मारते थे. अगर कोई बाहरी कभी आता तो अच्छे कपड़े पहनाकर तैयार करते. और उनके जाते ही कपड़ों के साथ साथ उनके लाए हुए मिठाइयां और गिफ्ट भी छीन लेते." ग्रुप के लोग बच्चों को जमीन पर सुलाते. घर से बाहर नहीं जाने देते. और अगर बाइबल का कोई पैसेज भूल जाए तो तीन दिन खाना नहीं देते थे.
बच्चे की मां के मुताबिक तीन साल पहले ग्रुप का एक आदमी उससे दिल्ली के एक अस्पताल में मिला था. ये वादा करते हुए कि उसके बच्चों को अफसर बना देगा, उसने उसके बच्चों को भर्ती किया. बच्चों ही नहीं, उसके मां-बाप से भी बाइबल की प्रतियां लोगों में बंटवाते थे.
छापे के समय शेल्टर में मौजूद लोगों के पास उनसे जुड़े किसी भी तरह के ऑफीशियल कागज नहीं मिले. न ही बच्चों के कोई ऑफीशियल डिटेल्स मिले.
ग्रेटर नोएडा और मेरठ में चलने वाला 'इमैनुएल सेवा ग्रुप' जाने कितने बच्चों के साथ ऐसा कर चुका था. तकरीबन हफ्ते भर पहले जब दो सताए हुए बच्चों की मां ने पुलिस में कंप्लेंट की, तब पता चला कि ये किसी एक बच्चे का केस नहीं, बल्कि असल में पूरा का पूरा रैकेट है. जो जबरन बच्चों का धर्म बदल कर उन्हें इसाई बना देता है. औरत की शिकायत के बाद पड़े छापे से 30 बच्चों को उनके लिए जेल बन चुके शेल्टर होम से निकाला.

किचन से निकले कॉकरोच और चूहे की पॉटी
एक बच्चे ने हिंदुस्तान टाइम्स अखबार को बताया, "मुझे मेरे घरवालों से 15 महीनों तक मिलने नहीं दिया. सिर्फ बाइबल पढ़ने को मिलती. मुझसे जबरदस्ती बाइबल के पैसेज रटवाए जाते थे. भैंस का गोश्त खिलाते थे और अगर कोई डोनर आ जाए तो उसके सामने मुझसे परेड करवाते थे." बच्चों की मानें तो उनके दो नाम होते थे. एक वो जो उनके घर वालों ने दिया था. और एक वो जो उन्हें ग्रुप वाले तब देते थे जब वो बाइबल पढ़ना सीख जाते थे.
"अगर बाइबल पढ़ते समय कोई गलती हो जाए तो बेंत और बेल्ट से मारते थे. अगर कोई बाहरी कभी आता तो अच्छे कपड़े पहनाकर तैयार करते. और उनके जाते ही कपड़ों के साथ साथ उनके लाए हुए मिठाइयां और गिफ्ट भी छीन लेते." ग्रुप के लोग बच्चों को जमीन पर सुलाते. घर से बाहर नहीं जाने देते. और अगर बाइबल का कोई पैसेज भूल जाए तो तीन दिन खाना नहीं देते थे.
बच्चे की मां के मुताबिक तीन साल पहले ग्रुप का एक आदमी उससे दिल्ली के एक अस्पताल में मिला था. ये वादा करते हुए कि उसके बच्चों को अफसर बना देगा, उसने उसके बच्चों को भर्ती किया. बच्चों ही नहीं, उसके मां-बाप से भी बाइबल की प्रतियां लोगों में बंटवाते थे.
छापे के समय शेल्टर में मौजूद लोगों के पास उनसे जुड़े किसी भी तरह के ऑफीशियल कागज नहीं मिले. न ही बच्चों के कोई ऑफीशियल डिटेल्स मिले.

