तेलंगाना में ओमिक्रॉन के 3 केस, देश में अब तक 64, जानिए WHO ने क्या चेतावनी दी है?
महाराष्ट्र में अब तक सबसे ज्यादा 28 मामले सामने आए हैं
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एक्सपर्ट्स का कहना है कि भले ही ओमिक्रॉन लोगों को गंभीर रूप से बीमार ना करे लेकिन स्वास्थ्य ढांचे पर जबरदस्त दबाव डाल सकता है. (सांकेतिक फोटो-PTI)
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तेलंगाना के हैदराबाद में ओमिक्रॉन के 3 नए मामले सामने आए हैं. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक इनमें एक 7 साल का बच्चा भी शामिल है. बच्चा अबू धाबी से हैदराबाद आया था. वह हैदराबाद से कोलकाता गया था. बच्चा पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का रहने वाला है. बच्चे के नए वेरिएंट से संक्रमित पाए जाने के बाद इसे पश्चिम बंगाल का पहाल ओमिक्रॉन का मामला बताया जा रहा है. बाकी बचे 2 लोग केन्या और सोमालिया से हैदराबाद पहुंचे थे. इन 3 नए मामलों के साथ ही भारत में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन से संक्रमित लोगों की संख्या 64 हो गई है.
खबर लिखे जाने तक देश में ओमिक्रॉन के सबसे ज्यादा मामले महाराष्ट्र से सामने आए थे. यहां 28 लोग कोरोना के नए वेरिएंट से संक्रमित पाए गए हैं. मंगलवार, 14 दिसंबर को महाराष्ट्र में ओमिक्रॉन के 8 और नए केस मिले थे. इनमें से 7 मुंबई के हैं. वहीं, एक मामला वसई विरार का है. महाराष्ट्र के अलावा राजस्थान में अब तक 17, दिल्ली में 6, गुजरात में 4, कर्नाटक में 3, केरल, आंध्र प्रदेश और चंडीगढ़ में एक-एक मामला सामने आ चुका है.
WHO ने क्या कहा?
वहीं ओमिक्रॉन को लेकर WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी जारी की है. WHO ने कहा है कि ओमिक्रॉन अब तक 77 से ज्यादा देशों में फैल चुका है. लोग तेजी से ओमिक्रॉन से संक्रमित हो रहे हैं, भले ही इसका पता न चल रहा हो. WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एदोनाम गेब्रेसस का कहना है कि नया वेरिएंट खतरनाक तरीके से फैल रहा है. उन्होंने कहा,
"ओमिक्रॉन जिस तेजी से फैल रहा है. हमने किसी और वेरिएंट को इतनी तेजी के साथ फैलते नहीं देखा. हमारी चिंता ये है कि ओमिक्रॉन को लोग माइल्ड बताकर खारिज कर रहे हैं. अपने जोखिम पर इस वायरल को कम आंक रहे हैं. भले ही ओमक्रॉन कम खतरनाक है, लेकिन मामले बढ़ने से एक बार फिर हमारे हेल्थ सिस्टम को प्रभावित कर सकता है."बूस्टर डोज पर क्या कहा? बूस्टर डोज को लेकर भी WHO की ओर से एक बयान आया है. इसमें WHO के डायरेक्टर जनरल टेड्रोस एदोनाम गेब्रेसस ने कहा है कि ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए कई देश अपने यहां बूस्टर डोज लगा रहे हैं. लेकिन हमारे पास इसका कोई प्रभावशाली सबूत नहीं है कि बूस्टर डोज ओमिक्रॉन वेरिएंट पर असर करेगी या नहीं. उनके मुताबिक बूस्टर डोज जैसे कार्यक्रम से वैक्सीन की जमाखोरी बढ़ सकती है. और इससे उन लोगों को वैक्सीन मिलने में मुश्किलें आ सकती हैं, जिन्हें अभी तक एक भी डोज नहीं लगी है. टेड्रोस एदोनाम ने आगे कहा,
"बूस्टर डोज जैसे कार्यक्रम से असमानता बढ़ेगी. हालांकि ये भी साफ है कि जैसे-जैसे हम आगे बढ़ेंगे, बूस्टर डोज महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं...WHO बूस्टर डोज के खिलाफ नहीं है, बल्कि असमानता के खिलाफ है. गंभीर बीमारी या मृत्यु के कम रिस्क वालों को बूस्टर डोज देना, ज्यादा रिस्क वाले लोगों के जीवन को खतरे में डालता है क्योंकि सप्लाई की कमी के चलते 41 देश अब भी अपनी आबादी के 10 प्रतिशत हिस्से का टीकाकरण नहीं कर पाए हैं. हमारी मुख्य चिंता केवल कुछ देशों में ही नहीं, बल्कि हर जगह लोगों की जान बचाना है."हालांकि, WHO का यह भी कहना है कि कोई देश सिर्फ वैक्सीन के दम पर इस संकट से बाहर नहीं निकल सकता. ओमिक्रॉन का प्रसार, शुरुआत से अब तक अपनाए गए सभी उपायों को लागू करके ही रोका जा सकता है.

