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प्यासे ऊंट पानी पीने गए थे, एक के बाद एक 25 की मौत हो गई, वजह दुखी कर देगी!

गांववालों को बहुत प्यारे थे ऊंट.

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25 camels dies after drinking polluted water from pond in Bharuch Gujarat
ये ऊंट इन ग्रामीणों की आजीवका का मुख्य साधन थे. (सांकेतिक फोटो- पेक्सेल)
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ज्योति जोशी
23 मई 2023 (अपडेटेड: 23 मई 2023, 01:01 PM IST)
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गुजरात (Gujarat) में 25 ऊंटों की मौत (25 Camels Dead) का मामला सामने आया है. बताया जा रहा है कि उन सभी ने एक तालाब से दूषित पानी पी लिया था. आरोप है कि तालाब के पास कच्चे तेल की एक पाइपलाइन लीक हो रही थी जिसके चलते तालाब का पानी दूषित हो गया. मामला भरूच जिले में वागरा तालुका के कच्चीपुरा गांव का है. गांववालों का कहना है कि वो लोग काफी समय से पानी के संकट से जूझ रहे हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, घटना 21 मई की है. गांव के लोग चिलचिलाती गर्मी से राहत के लिए 30 ऊंटों को पांच किलोमीटर दूर चंचवेल झील पर ले जा रहे थे. इसी बीच ऊंट कथित दूषित तालाब के पास पहुंचे और सुस्त अवस्था में वहीं लेटे हुए मिले. पुलिस और पशु चिकित्सका अस्पताल को मामले की जानाकरी दी गई.  

सरकारी पशु चिकित्सक डॉ. हर्ष गोस्वामी ने 25 ऊंटों की मौत की पुष्टि की है. बाकी पांच ऊंटों में कुछ लापता हैं और कुछ का इलाज चल रहा है. हालांकि, ऊंटों की मौत का सही कारण अब तक पता नहीं चला है. डॉ. हर्ष ने कहा कि मौत की वजह मेडिकल रिपोर्ट आने पर पता चलेगी. जांच जारी है.

ONGC का कुआं मौजूद है

रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है. गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एक टीम 22 मई को जांच करने के लिए घटनास्थल पर पहुंची थी. भरूच में प्रदूषण निगरानी के क्षेत्रीय अधिकारी मार्गी पटेल ने बताया कि आसपास के क्षेत्र में ONGC का एक कुआं मौजूद है लेकिन रिसाव की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. उन्होंने बताया कि उस क्षेत्र से सैंपल इकट्ठा किए गए हैं जहां ऊंटों के शव पाए गए थे. पोस्ट-मॉर्टम रिपोर्ट के बाद चीजें साफ हो जाएंगी. 

गांव के एक निवासी रहमानभाई जाट का परिवार 1916 से ऊंटों समेत कई जानवारों के पशुपालन में शामिल है. वो बताते हैं कि उन्हें कुछ प्राइवेट सप्लायर से पानी के टैंकर मिलते थे जो कि पिछले दो महीनों से बंद हैं. गांव पानी की किल्लत से जूझ रहा है. कच्चीपुरा गांव की आबादी 250 है और वहां लगभग 60 घर हैं. यहां के लोग मवेशी चरवाहों के मालधारी समुदाय के हैं. ऊंटों की मौत से ग्रामीण काफी निराश हैं. वो ऊंट इन ग्रामीणों की आजीवका का मुख्य साधन थे.

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