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भारत में हर दस लाख लोगों पर कितने जज? सरकार का जवाब सुन कहेंगे- फिर कैसे मिलेगा न्याय?

लॉ कमीशन ने 1987 में अपनी 120वीं रिपोर्ट में भारतीय आबादी के हर दस लाख लोगों पर 50 जजों का अनुपात रखने की सिफारिश की थी. लेकिन करीब 5 दशक बीतने के बाद भी हम ये अनुपात हासिल नहीं कर पाए हैं.

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Supreme Court
देश में तय मानक से जजों की संख्या काफी कम है.
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सौरभ
29 जनवरी 2026 (पब्लिश्ड: 11:45 PM IST)
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देशभर की अदालतों में करोड़ों के लंबित पड़े हैं. आंकड़े भारत की न्याय व्यवस्था पर अक्सर सवाल उठाने को मजबूर करते हैं. केंद्र सरकार का एक बयान इस सवाल पर जाने-अनजाने मुहर लगाता है. 29 जनवरी को सरकार ने राज्यसभा में बताया कि भारत में हर 10 लाख की आबादी पर लगभग 22 जज हैं. 

लॉ कमीशन ने 1987 में अपनी 120वीं रिपोर्ट में भारतीय आबादी के हर दस लाख लोगों पर 50 जजों का अनुपात रखने की सिफारिश की थी. लेकिन करीब 5 दशक बीतने के बाद भी हम ये अनुपात हासिल नहीं कर पाए हैं.

एक लिखित जवाब में कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि फिलहाल देश में जज-टू-पॉपुलेशन रेश्यो लगभग 22 जज प्रति मिलियन आबादी है. यानी प्रति 10 लाख की आबादी पर सिर्फ 22 जज. उन्होंने कहा,

"प्रति 10 लाख आबादी पर जजों की संख्या का अनुपात निकालने के लिए, सरकार ने 2011 की जनगणना के आबादी डेटा का इस्तेमाल किया है. उस हिसाब से 121 करोड़ की आबादी और साल 2026 में सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट और डिस्ट्रिक्ट और सबऑर्डिनेट कोर्ट में जजों की मंज़ूर संख्या के आधार पर रेश्यो निकाला गया है."

मेघवाल ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में देश में 3 लाख 89,910 अंडरट्रायल कैदी थे. यानी ऐसे आरोपी जिनके मामले अभी अदालत में चल रहे हैं और फैसला नहीं हुआ है. उन्होंने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि मामलों का निपटारा पूरी तरह न्यायपालिका के अधिकार क्षेत्र में आता है.

अदालतों में मामलों के लंबित रहने के कई कारण होते हैं. इनमें मामलों की जटिलता, सबूत, वकील, जांच एजेंसियों की कार्रवाई, गवाहों और पक्षकारों का सहयोग, साथ ही अदालतों में बुनियादी सुविधाओं और स्टाफ की उपलब्धता जैसे कारण शामिल हैं.

देश की अदालतों में लंबित मामलों पर बहस लंबे समय से चल रही है. अदालत में लंबित मामलों पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू भी चिंता जाहिर कर चुकी हैं. कई रिटायर्ड चीफ जस्टिस ने अपने कार्यकाल के दौरान भी विचाराधीन कैदियों को लेकर चिंता जाहिर की है. हालांकि, न तो न्यापालिका की तरफ से न ही सरकार की तरफ से इस विषय पर कोई ठोस कदम उठाए गए.

वीडियो: क्या निष्पक्ष हैं भारतीय जज? हार्वर्ड और इम्पीरियल कॉलेज की रिसर्च में जवाब आया

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