नोटबंदी के बाद जन-धन अकाउंट में पहुंचे 21000 करोड़, पश्चिम बंगाल सबसे आगे
ममता दीदी नोटबंदी के खिलाफ हैं. उनके स्टेट में जन-धन के पैसों को तराजू से तौलना पड़ेगा.
Advertisement

फोटो - thelallantop
यहां ममता बनर्जी सरकार को नोटबंदी पर ललकार रही हैं, धरना दे रही हैं, वहां उनकी पीठ के पीछे लोग तेजी से पैसे जन-धन अकाउंट में जमा कर रहे हैं.
8 नवम्बर को प्रधानमन्त्री ने नोटबंदी की बात की थी. तब से जन-धन अकाउंट में 21,000 करोड़ रुपए जमा किए गए हैं. इसमें से सबसे ज्यादा पैसा पश्चिम बंगाल में ही जमा हुआ है. ऐसा लगता है जैसे जन-धन अकाउंट में दूसरे लोगों का पैसा जमा हो रहा है.
अब तक कुल 24 करोड़ जन-धन अकाउंट खोले गए हैं. फाइनेंस मिनिस्ट्री ने कहा था कि अगर कोई अपने अकाउंट का गलत इस्तेमाल कर रहा है या किसी दूसरे को करने दे रहा है तो उसे कठघरे में खड़ा किया जाएगा.
सारे बैंकों को ये निर्देश दिया गया है कि 500 और 1000 के पुराने नोट छोटी बचत स्कीम में न लिए जाएं. इन बचत स्कीमों में पब्लिक प्रोविडेंट फण्ड, पोस्ट ऑफिस स्कीम (PPF), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट(NSC),किसान विकास पत्र(KVP) हैं.
वेस्ट बंगाल में इतनी गरीबी है और वहीं पर सबसे ज्यादा पैसा जन-धन अकाउंट में जमा हुआ है. पता नहीं ये पैसा कहां गड़ा रहता है. कभी सिनेमा, एजुकेशन, गीत-संगीत के लिए बंगाल जाना जाता रहा है. लेकिन आज इसकी हालत खराब है. गरीबी है. बेरोजगारी है. 2013-14 में स्टेट की पर-कैपिटा इनकम सालाना 69,000 थी जो पूरे देश की औसत से बहुत कम है. तेंदुलकर कमेटी की रिपोर्ट के हिसाब से यहां बीस प्रतिशत से ज्यादा लोग पावर्टी लाइन के नीचे रहते हैं. गांवों की हालत और भी खराब है. दीनापुर, मालदा, बीरभूम, बांकुरा जिलों में गरीबी बहुत ज्यादा है.
1960 के बाद से ही यहां की स्थिति खराब होनी शुरू हो गई थी. 34 साल के कम्युनिस्ट शासन ने भी कुछ नहीं किया. ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार भी पश्चिम बंगाल को दौड़ा नहीं पा रही है. चिट फण्ड बिजनेस यहां सबसे ज्यादा काम करता है. बहुत सी पोंजी कम्पनियां यहां काम कर रही हैं. सारधा चिट फण्ड घोटाला वहां का सबसे बड़ा घोटाला है. जिसने करीब 10 लाख लोगों को 20,000 करोड़ रुपए का चूना लगाया था. इसमें बहुत से नेताओं के शामिल होने का आरोप भी लगा.
नोटबंदी पर जब ममता सरकार को घेर रही थीं तो भाजपा नेताओं ने उनके राज में हो रही चीजों की याद दिलानी शुरू कर दी. भाजपा के नेशनल सेक्रेटरी सिद्धार्थ नाथ सिंह ने कहा, ''ममता बनर्जी एक वित्तीय आपातकाल और गरीब लोगों की परेशानी के बारे में बात कर रही हैं. लेकिन वो और उनकी पार्टी तब कहां थी जब लोगों से पोंजी कंपनियां ठगी कर रही थीं. तृणमूल कांग्रेस के कई नेताओं की उनके साथ नजदीकियां थीं.''
अब ममता बनर्जी को घेरने के लिए ये अकाउंट वाला मसला भाजपा के हाथ लग गया है. अब वो कायदे से इसे भुना सकती है.
ये स्टोरी निशान्त ने की है.

.webp?width=60)

