मुंबई में 10 बरस पहले फटे 7 कुकर, 209 जानें चली गईं
2006 में मुंबई की लोकल ट्रेनों में हुए धमाकों की 10वीं बरसी.
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मुंबई 2006 लोकल ट्रेन में धमाकों के बाद की तस्वीर
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छोटे में एक बार कुकर फटा था. हमारा तोता घंटों तक एक आंख बंद करके कमरे में बैठा रहा था. उसकी दाईं आंख बंद थी. उसी तरफ किचेन था, जहां कुकर फटा था. ये तो घर में फटे कुकर की कहानी थी. लेकिन आज से 10 साल पहले मुंबई में 7 कुकर फटे थे और 209 लोगों की जिंदगी चली गई थी. उन कुकर में बम थे.
11 जुलाई 2006. मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 मिनट के अंदर हुए 7 धमाकों की आज दसवीं बरसी है.
ये धमाके मुंबई लोकल में हुए. ये शायद पहली बार था, जब बम धमाकों के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल किया गया. ताकि धमाका जोरदार हो सके. इन प्रेशर कुकरों में अमोनियम नाइट्रेट, फ्यूल कीलों और आरडीएक्स भरा गया था. बम लोकल ट्रेन के फर्स्ट क्लास कोच में रखे गए थे.
20 किलो आरडीएक्स गुजरात के कांडला के रास्ते मुंबई भेजा गया. अमोनियम नाइट्रेट मुंबई से और 8 प्रेशर कुकर सांता क्रूज की दो अलग दुकानों से खरीदे गए. पुलिस के मुताबिक, प्रेशर कुकर में बम फिट करने का काम गोवंडी में किया गया. बाद में इन तैयार प्रेशर कुकर बमों को बांद्रा ले जाया गया. धमाकों के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल बाद में भी किया गया. 2010 में स्टॉकहोम, 2010 टाइम्स स्क्वॉयर कार में प्लान किए धमाकों में भी प्रेशर कुकर का इस्तेमाल किया गया था, पर शुक्र है कि ये बम फटे नहीं.

इसके बाद बारी आई मुंबई की लोकल ट्रेनों में बम फिट करने की. पुलिस के मुताबिक, इस काम को अंजाम देने के लिए 7 छोटे ग्रुप बनाए गए. हर ग्रुप में 3 लोग. दो इंडियन, एक पाकिस्तानी. हर ग्रुप को एक प्रेशर कुकर दिया गया. ये कुकर काली थैली में लपेटकर रखे गए थे. धमाकों के बाद लश्कर-ए-तैयबा ने इसकी जिम्मेदारी ली और कहा, 'धमाकों के लिए बम रखने वाले सारे आतंकी सुरक्षित हैं.'
लश्कर-ए-तैयबा और इंडियन मुजाहिदीन. धमाकों के बाद सैकड़ों लोग पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए. 14 जुलाई को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लश्कर-ए-कह्हार ने ली. सिमी और पाकिस्तानी एजेंसी ISI भी जांच एजेंसियों के शक के घेरे में रहीं. आजम चीमा नाम के आतंकी ने बहावलपुर के एक ट्रेनिंग कैंप में 50 लड़ाकों को बम और बंदूक चलाने की ट्रेनिंग दी.

मुंबई 2006 लोकल ट्रेन में धमाकों के बाद की तस्वीर. फोटो क्रेडिट- Reuters
18 जुलाई को केस में पहली बड़ी गिरफ्तारी हुई. नाम अब्दुल करीब टुंडा. पर ये वो टुंडा नहीं था, जो बम बनाते वक्त अपना एक हाथ खो चुका था. असली आरोपी टुंडा 2013 में पकड़ा गया, नेपाल बॉर्डर के पास. लेकिन मार्च 2016 में टुंडा को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने आतंक के चार मामलों में बरी कर दिया. कहा, टुंडा के खिलाफ सबूत नहीं हैं.
2009 में इंडियन मुजाहिदीन लीडर सादिक शेख पकड़ा गया. शेख ने 2006 ट्रेन धमाकों की की जिम्मेदारी ली. ये दावा जांच एजेंसियों के पुराने दावों से अलग था. कोर्ट में वकीलों ने शेख को होस्टाइल विटनेस माना.
11 जुलाई 2006. मुंबई की लोकल ट्रेनों में 11 मिनट के अंदर हुए 7 धमाकों की आज दसवीं बरसी है.
ये धमाके मुंबई लोकल में हुए. ये शायद पहली बार था, जब बम धमाकों के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल किया गया. ताकि धमाका जोरदार हो सके. इन प्रेशर कुकरों में अमोनियम नाइट्रेट, फ्यूल कीलों और आरडीएक्स भरा गया था. बम लोकल ट्रेन के फर्स्ट क्लास कोच में रखे गए थे.
मुंबई. 11 जुलाई 2006 की शाम. Black Wednesday.
ये 7 धमाके मुंबई की जिन जगहों पर हुए, वो थे...6.24: खार रोड- सांताक्रूज 6.24: बांद्रा-खार रोड 6.25: जोगेश्वरी 6.26: माहिम जंक्शन 6.29: मीरा रोड-भायंदर 6.30: माटुंगा रोड- माहिम जंक्शन 6.35: बोरीवलीकहां से जुटा धमाके का सामान?
20 किलो आरडीएक्स गुजरात के कांडला के रास्ते मुंबई भेजा गया. अमोनियम नाइट्रेट मुंबई से और 8 प्रेशर कुकर सांता क्रूज की दो अलग दुकानों से खरीदे गए. पुलिस के मुताबिक, प्रेशर कुकर में बम फिट करने का काम गोवंडी में किया गया. बाद में इन तैयार प्रेशर कुकर बमों को बांद्रा ले जाया गया. धमाकों के लिए प्रेशर कुकर का इस्तेमाल बाद में भी किया गया. 2010 में स्टॉकहोम, 2010 टाइम्स स्क्वॉयर कार में प्लान किए धमाकों में भी प्रेशर कुकर का इस्तेमाल किया गया था, पर शुक्र है कि ये बम फटे नहीं.

इसके बाद बारी आई मुंबई की लोकल ट्रेनों में बम फिट करने की. पुलिस के मुताबिक, इस काम को अंजाम देने के लिए 7 छोटे ग्रुप बनाए गए. हर ग्रुप में 3 लोग. दो इंडियन, एक पाकिस्तानी. हर ग्रुप को एक प्रेशर कुकर दिया गया. ये कुकर काली थैली में लपेटकर रखे गए थे. धमाकों के बाद लश्कर-ए-तैयबा ने इसकी जिम्मेदारी ली और कहा, 'धमाकों के लिए बम रखने वाले सारे आतंकी सुरक्षित हैं.'
धमाकों के बाद किसी को कुछ समझ नहीं आया. धमाकों की जगह पर कुकर मिले. नए कुकर. पुलिस ने इसे जांच की कड़ी बनाया. दुकानों को खोजा गया. पता चला कि धमाकों से कुछ रोज पहले ही मुंबई के सांता क्रूज की दुकानों से खरीदे गए.किसने ली जिम्मेदारी?
लश्कर-ए-तैयबा और इंडियन मुजाहिदीन. धमाकों के बाद सैकड़ों लोग पूछताछ के लिए हिरासत में लिए गए. 14 जुलाई को लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लश्कर-ए-कह्हार ने ली. सिमी और पाकिस्तानी एजेंसी ISI भी जांच एजेंसियों के शक के घेरे में रहीं. आजम चीमा नाम के आतंकी ने बहावलपुर के एक ट्रेनिंग कैंप में 50 लड़ाकों को बम और बंदूक चलाने की ट्रेनिंग दी.

मुंबई 2006 लोकल ट्रेन में धमाकों के बाद की तस्वीर. फोटो क्रेडिट- Reuters
18 जुलाई को केस में पहली बड़ी गिरफ्तारी हुई. नाम अब्दुल करीब टुंडा. पर ये वो टुंडा नहीं था, जो बम बनाते वक्त अपना एक हाथ खो चुका था. असली आरोपी टुंडा 2013 में पकड़ा गया, नेपाल बॉर्डर के पास. लेकिन मार्च 2016 में टुंडा को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने आतंक के चार मामलों में बरी कर दिया. कहा, टुंडा के खिलाफ सबूत नहीं हैं.
2009 में इंडियन मुजाहिदीन लीडर सादिक शेख पकड़ा गया. शेख ने 2006 ट्रेन धमाकों की की जिम्मेदारी ली. ये दावा जांच एजेंसियों के पुराने दावों से अलग था. कोर्ट में वकीलों ने शेख को होस्टाइल विटनेस माना.
इस केस में सितंबर 2015 में मकोका की स्पेशल कोर्ट ने 12 लोगों को धमाकों का दोषी माना. अक्टूबर 2015 में इन 12 में से 5 दोषियों को मुंबई की स्पेशल कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई, जबकि 7 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई.

