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29 साल से नाम और हुलिया बदलकर पुलिस को चकमा दे रहा था दंगा आरोपी, ऐसे धरा गया!

1993 में हुए एक दंगे का मुख्य आरोपी है अतहर बेग रियाज. 2004 में कोर्ट ने उसे भगोड़ा घोषित कर दिया था.

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Riot accused Atahar Beig Riyaz Beig
(प्रतीकात्मक फोटो)
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धीरज मिश्रा
7 सितंबर 2022 (Updated: 7 सितंबर 2022, 07:46 PM IST)
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साल 1993 के एक दंगे (1993 Riot) से जुड़े आरोपी अतहर बेग रियाज बेग को मुंबई पुलिस (Mumbai Police) ने लंबी खोजबीन के बाद गिरफ्तार किया है. वो पिछले 29 सालों से अपना नाम और हुलिया बदलकर पुलिस को चकमा देता आ रहा था. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, बेग को दंगा मामले में गिरफ्तार किया गया था, लेकिन उसे 1993 में ही जमानत मिल गई थी. इसके बाद से ही वो ऐसे तमाम तरीके अपना रहा था कि पुलिस उसे गिरफ्तार न कर पाए. पुलिस से बचने के लिए उसने अपने नाम के आगे 'मिर्जा' शब्द जोड़ लिया था. साथ ही उसने अपनी दाढ़ी बढ़ा ली थी ताकि वो पहचान में न आ सके.

जब कभी पुलिस उसका दरवाजा खटखटाती थी कि उन्हें 'अतहर बेग रियाज बेग' से मिलना है, तो आरोपी व्यक्ति जवाब देता था कि उसका नाम 'अतहर बेग रियाज बेग मिर्जा' है और पुलिस जिसे ढूंढ रही है वो उस स्थान पर नहीं रहता है. हालांकि पिछले हफ्ते पुलिस को पता चला की बेग दक्षिणी मुंबई के नल बाजार में रहता है, जहां वो सुपारी बेचने का भी काम करता था. इस सूचना के बाद पुलिस ने आरोपी शख्स को गिरफ्तार कर लिया.

वारंट जारी हुआ था 

साल 1993 के दंगा और हत्या की कोशिश मामले में बेग मुख्य आरोपी है. इसके अलावा 11 और लोग भी इस केस में आरोपी हैं. सभी 12 व्यक्तियों को बाद में जमानत पर रिहा कर दिया गया था. लेकिन कोर्ट में पेश न होने के कारण साल 2004 में आरोपी को भगोड़ा घोषित कर दिया गया था. इसके बाद भी जब वो कोर्ट के सामने नहीं आया, तो उसके खिलाफ स्थाई वारंट जारी किया गया था.

पुलिस के सामने शुरुआत में ही बड़ी मुश्किल ये आई कि बेग ने कागजों में जो आवासीय पता दिया था, वो हकीकत में था ही नही. एक ऑफिसर ने इंडियन एक्सप्रेस अखबार को बताया, 

'वो मोहम्मद अली रोड पर बीआईटी चॉल में रहा करता था, लेकिन 1990 के दशक के आखिर में इसे ढहा दिया गया था. पुलिस बेग का पता इसलिए नहीं लगा पा रही थी क्योंकि किसी को नहीं पता था कि वो कहां रहता है.'

हालांकि, बहुत कोशिशों के बाद पुलिस को पता चला कि वो नल बाजार की कच्छवाला बिल्डिंग में रहता है. लेकिन जब पुलिस यहां जाती थी, तो आरोपी व्यक्ति अपने नाम में मिर्जा जुड़ा हुआ बताता था और एक आधार कार्ड भी दिखाता था. लेकिन हाल के दिनों में जब पुलिस को पता चला कि ये वही व्यक्ति है, तो पुलिस ने आरोपी से सवाल किया कि वो अपने नाम के आगे 'मिर्जा' शब्द कब से लगा रहा है. सब-इंस्पेक्टर श्याम भिसे ने कहा कि इसके बाद आरोपी को समझ आ गया कि वो पकड़ा गया है और उसने अपना गुनाह कबूल किया. पुलिस ने बताया कि बेग को 8 सितंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.

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