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हम कितनी तरक्की कर गए, 19 बच्चे भूख से मर गए

उड़ीसा में राजधानी भुबनेश्वर से महज सौ किलोमीटर दूर है ये 'कुपोषित जिला.'

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22 जुलाई 2016 (अपडेटेड: 22 जुलाई 2016, 08:06 AM IST)
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हम यहां देश बदलने और आगे बढ़ाने के गाने गा रहे हैं. उड़ीसा में इस गाने की म्यूजिक में मैयत की शहनाई मिल गई है. 19 आदिवासी बच्चे भूख से मर गए. उनके परिवारों का हाल देखोगे तो कलेजा जल जाएगा. odisha 1 उड़ीसा की राजधानी भुबनेश्वर. यहां से मुश्किल से 100 किलोमीटर दूर है सुकिंदा ब्लॉक. इसके ऊबड़ खाबड़ पहाड़ी एरिया में बसा है नगादा गांव. जिला जाजपुर लगता है. जुआंग जाति के आदिवासियों का घर है ये. और सिर्फ इनके बनाए घर ही हैं यहां. उसके अलावा सरकार के द्वारी दी गई सुविधाएं जीरो बटे सन्नाटा.
इसी गांव में पिछले तीन महीनों में 19 बच्चों की मौत हो गई. कुपोषण से. खाने के लिए खाना है न पीने के लिए पानी. पढ़ने के लिए स्कूल है न इलाज के लिए अस्पताल. सड़कें भी नहीं हैं. माने जिंदगी की मिनिमम जरूरतें भी नहीं पूरी हो पा रहीं इनकी.
odisha 2 कालियापानी के टाटा हॉस्पिटल में इसी तरह के और 19 बच्चे भर्ती हैं. उनका इलाज चल रहा है. महिला और बाल विकास डिपार्टमेंट की स्टेट मिनिस्टर हैं उषा देवी. वो बताती हैं कि "हमने अरेंजमेंट्स किए हैं. आंगनवाड़ी खोल रहे हैं. उनमें ये व्यवस्था होगी कि आंगनवाड़ी वर्कर्स घरों तक राशन भी पहुंचाएंगे." उड़ीसा के प्रिंसिपल सेक्रेटरी मनोज आहूजा पहुंचे हॉस्पिटल. डॉक्टरों से बात की. मरीजों का जायजा लिया. बताया कि "फैमिली प्लानिंग नाम की कोई चीज ही नहीं है इन घरों में. 8- 9 बच्चे होना तो आम बात है. यहां तक कि एक बच्चा साल भर का नहीं होता, उसके पहले एक और पैदा हो जाता है." उड़ीसा सरकार ने एक टास्क फोर्स बनाई है. जाजपुर इलाके में बच्चों की मौत वाले केस की जांच करने के लिए.

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