कैंसर से जूझते हुए ये लड़का 96 परसेंट नंबर लाया
किताबों और अस्पताल के बीच झूलता रहा, लेकिन हिम्मत नहीं हारी.
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फोटो - thelallantop
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18 साल का राघव कोलकाता के हेरिटेज स्कूल में पढ़ता था. 10वीं के एग्जाम के पहले 6 महीनों तक स्कूल नहीं जा पाया. क्योंकि उसे ब्लड कैंसर था.
दिगांत डीपीएस का स्टूडेंट है. सांस की बीमारी से लड़ रहा था.
लेकिन दोनों घर से ही पढ़ते रहे. मेहनत करते रहे. एग्जाम हुए. और रिजल्ट भी आए.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया के मुताबिक राघव कीमोथेरेपी और किताबों के बीच झूलता रहता. दिगांत ने तो एग्जाम ही अस्पताल से दिए. लेकिन मेहनती लोगों को लक्ष्य से भटका पाए, ऐसी कोई बीमारी नहीं होती. रिजल्ट में राघव को मिले 96 पर सेंट नंबर. और दिगांत को मिले 91 पर सेंट.
राघव, जो 6 महीनों तक स्कूल नहीं जा पाया, ने रिजल्ट का सारा श्रेय अपने स्कूल के टीचरों को दिया. राघव के पापा ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया:
"अगर वो क्लास अटेंड करता तो इससे भी अच्छे रिजल्ट लाता. लेकिन इस बामारी ने उसकी नसों को फौलाद बना दिया. वो हर रोज़ पहले से भी ज्यादा पढ़ता. राघव अब कंप्यूटर साइंस पढ़ना चाहता है."दिगांत, जिसके फेफड़ों से हवा लीक होती थी, ने अस्पताल से एग्जाम दिए. उसने अख़बार को बताया:
"मैंने नहीं सोचा था इतना अच्छा कर पाऊंगा. लेकिन इतना ज़रूर पता था कि खुद को निराश नहीं होने दूंगा. बीमारी ने मुझे पीछे खींचा. अगर पढ़ कर नॉर्मल तरह से एग्जाम देता तो इससे अच्छे मार्क्स ला पाता."दिगांत एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग करना चाहता है. वहीं दिगांत के मम्मी-पापा स्कूल और अस्पताल को श्रेय देते हैं. जिन्होंने ये मुमकिन कराया कि दिगांत पेपर दे सके और उसका एक साल न बर्बाद न हो. लल्लन का सलाम इन युवाओं को.

