15 साल की बच्ची. 8वीं क्लास में पढ़ती थी. अपने परिवार के साथ खुश थी. और बच्चियोंकी तरह वो भी हंसती-खेलती थी. पढ़ती थी, शैतानी करती थी और घरवालों की लाडली थी. एकदिन अचानक उसकी दुनिया बदल गई. इसी साल 28 जून को स्कूल से लौटते वक्त उसका पांचलोगों ने अपहरण कर लिया. इन सभी लोगों ने पांच दिनों तक उस बच्ची के साथ गैंगरेपकिया और फिर उसे 4 जुलाई को गांव के रास्ते में फेंक दिया. मामला बागपत के रमालाइलाके के एक गांव का है. बच्ची घर पहुंची और उसने घरवालों को पूरी बात बताई. इसकेबाद 6 जुलाई को रमाला थाने में केस दर्ज करवाया गया. बच्ची का मेडिकल करवाया गया,जिसमें बच्ची के साथ गैंगरेप की पुष्टि हुई थी. इसके 10 दिन के बाद ही थाने के एसओनवीन चिकारा को पता नहीं क्या सूझा कि उन्होंने मामले को झूठा बता दिया और फिरफाइनल रिपोर्ट लगा दी.योगी आदित्यनाथ के पास भी पहुंची थी शिकायतपुलिस की ओर से क्लोजर रिपोर्टर लगने के बाद पीड़िता अपने पिता के साथ लखनऊ पहुंचीऔर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में शिकायत दर्ज करवाई. मुख्यमंत्री ने तत्कालीन एसपीरहे अनिल राय को जांच के आदेश दिए, लेकिन कोई ऐक्शन नहीं लिया गया.Case was registered in July. We Probed&concluded the 5 accused bearrested&produced before court. IO who probed earlier suspended:Baghpat SPpic.twitter.com/FVIfP3towR— ANI UP (@ANINewsUP) October 15, 2017 फिर आई 13 अक्टूबर की तारीख. बच्ची बाजारमें थी. वहां फिर से वहीं पांच दरिंद पहुंचे और उससे छेड़खानी करने लगे. पुलिस औरमुख्यमंत्री से मिलने के बाद भी जब पीड़िता को न्याय नहीं मिला और फिर से छेड़खानीहुई तो वह घर आई और फांसी लगाकर झूल गई. जब उसकी मौत का पता चला तो पुलिस ने एक बारफिर से निकम्मापन दिखाया. उसने पहले तो इस मौत के लिए घरेलू कलह को जिम्मेदारठहराया, लेकिन बाद में दबाव बढ़ा शव का पोस्टमॉर्टम करवाया. मौत की बात मुख्यमंत्रीको भी पता चली, तो उन्होंने एसपी जयप्रकाश को फिर से केस खोलने के आदेश दिए. इसकेबाद सभी पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिनके नाम सोनू, मोनू, रोहित,सागर और पप्पू हैं. एसपी जयप्रकाश ने मीडिया को बताया कि रेप की पुष्टि के बाद भीजिस थानाध्यक्ष शरद तिलारा ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी, उसे सस्पेंड कर दिया गया है.इसके अलावा और भी जो पुलिसवाले हैं, उनकी भूमिका की भी जांच की जा रही है. Baghpat:5 people, accused of raping a minor girl, arrested. The girl allegedly committedsuicide yesterday. pic.twitter.com/QlmNxjjSws — ANI UP (@ANINewsUP) October 15,2017 एक ऐंगल जाति का भी हैरेप की पुष्टि के बाद भी थानाध्यक्ष शरद तिलारा ने सभी आरोपियों को क्लीन चिट देदी. वजह तो साफ नहीं है, लेकिन पीड़ित पक्ष का कहना है थानाध्यक्ष और सभी आरोपी एकही जाति के हैं. अपनी जाति के लोगों को बचाने के लिए शरद ने क्लीन चिट दे दी थी.वहीं पीड़ित पक्ष की जाति के लोगों का कहना है कि ऊंची जाति के लोग अक्सर उनको औरउनकी लड़कियों को परेशान करते रहते हैं. पुलिसवाले भी ऊंची जाति के लोगों की हीसुनते हैं, इसलिए हम अब अपनी बच्चियों को स्कूल नहीं भेजेंगे. ऐंगल चाहे जो हो,लेकिन हकीकत ये है कि बच्ची अब इस दुनिया में नहीं है. इसके लिए उन पांच लोगों कीदरिंदगी के साथ ही पुलिस का निकम्मापन भी जिम्मेदार है. अलबत्ता पुलिस को इतना तोसक्रिय रहना ही चाहिए था कि दिनदहाड़े किसी बच्ची का अपहरण न होने पाए, कोई उसेउठाकर ले जाए और उससे गैंगरेप करे, ऐसा होने के बाद शिकायत दर्ज की जाए तो पुलिसतुरंत ऐक्शन ले. लेकिन पुलिस हर जगह नाकाम रही और रिजल्ट सबके सामने है कि वो बच्चीअब इस दुनिया में नहीं है.