The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • News
  • Know all about Krishna Janmabhoomi and Shahi Idgah Masjid case in mathura

मथुरा वाले बवाल की कहानी यहां के अलावा कहीं नहीं मिलेगी!

मामले की अदालती कार्यवाही का रास्ता अब साफ हो गया है

Advertisement
pic
19 मई 2022 (अपडेटेड: 19 मई 2022, 05:45 PM IST)
Know all about Krishna Janmabhoomi and Shahi Idgah Masjid case
कृष्ण जन्मभूमि (फोटो- आजतक)
Quick AI Highlights
Click here to view more

मथुरा के डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मस्जिद विवाद में अदालती सुनवाई की इजाजत दे दी है. गुरुवार 19 मई को जिला अदालत ने कृष्ण जन्मभूमि से सटी ईदगाह मस्जिद को हटाने की मांग वाली याचिका को मंजूरी दे दी. इससे मामले की अदालती कार्यवाही का रास्ता अब साफ हो गया है. इससे पहले बीती 6 मई को जिला अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी कर ली थी. उसने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

बता दें कि याचिका में भगवान कृष्ण विराजमान की ओर से अदालत से अपील की गई है कि वो श्रीकृष्ण जन्मस्थान की जमीन वापस दिलाएं. याचिका में दावा किया गया है कि करीब 400 साल पहले इस जमीन पर बने मंदिर को मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर ढाह दिया गया था. उसके बाद वहां ईदगाह मस्जिद बना दी गई.

क्या है मामला?
ये विवाद 13.37 एकड़ भूमि के मालिकाना हक का है. 25 सितंबर 2020 को सिविल जज सीनियर डिविजन की अदालत में श्रीकृष्ण विराजमान सूट दायर किया गया था. सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन, विष्णु शंकर जैन, रंजना अग्निहोत्री और सात अन्य लोगों की ओर से ये सूट दायर किया गया. इस मामले में अब तक 10 सूट फाइल किए जा चुके हैं.

सूट में क्या कहा गया?
कहा गया कि 12 अक्टूबर 1968 को श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह के प्रतिनिधियों के बीच एक समझौता किया गया जो भगवान केशवदेव और उनके भक्तों के हितों और भावनाओं के विपरीत था. रिपोर्ट के मुताबिक मस्जिद ईदगाह के बीच हुए समझौते को इस आधार पर रद्द करने की मांग की गई है कि श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को ये समझौता करने का अधिकार नहीं था. इन अधिवक्ताओं ने श्रीकृष्ण के भक्त होने का दावा किया है.

सूट में श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर बने मंदिरों का इतिहास भी बताया गया है. कहा गया है कि सन् 1618 में राजा वीर सिंह देव बुंदेला ने 33 लाख रुपये खर्च कर श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर पहला मंदिर बनवाया था. फिर औरंगजेब ने मंदिर को तुड़वाकर कृष्ण जन्मस्थान की भूमि पर शाही मस्जिद ईदगाह का निर्माण करावाया.

सूट में कहा गया कि कटरा केशव देव की सम्पूर्ण सम्पत्ति ट्रस्ट की है और श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ को उसका मालिकाना हक नहीं दिया जा सकता, इसलिए उसका किया समझौता अवैध है. कटरा केशव देव की सम्पत्ति पर शाही मस्जिद ईदगाह का अधिकार नहीं हो सकता. उस पर किया गया निर्माण भी अवैध है.

इसी आधार पर शाही मस्जिद ईदगाह को हटाने की बात कही गई है.

इस सूट में अब तक 20 महीने में 19 बार सुनवाई हो चुकी है, लेकिन गुरुवार 19 मई 2022 से पहले जिला अदालत ने ये तय नहीं किया था कि ये सूट कोर्ट प्रोसीडिंग्स के योग्य है या हाई कोर्ट ही इस मामले की सुनवाई कर सकेगा. ऐसे मे सबकी निगाहें गुरुवार के फैसले पर टिकी हुई थीं. आखिरकार अदालत ने सूट को चलाने की अनुमति दे दी है.

वीडियो- ज्ञानवापी मस्जिद में शिवलिंग के दावे पर सपा MP शफीकुर रहमान का भड़काऊ बयान!

Advertisement

Advertisement

()