70 के दशक के शुरूआती सालों की बात है, उस वक़्त भारत परमाणु अप्रसार संधि का पक्षधरथा. इस संधि के तहत कुल पांच मुल्कों को ही परमाणु तकनीक विकसित करने की छूट थी. येथे अमेरिका, सोवियत रूस, चीन, इंग्लैंड और फ्रांस. हालांकि, जवाहर लाल नेहरू केकहने के बाद डॉ होमी जहांगीर भाभा भी शांतिपूर्ण कार्यों के लिए परमाणु शक्तिविकसित करने लगे थे. साल 1966 में इंदिरा गांधी देश की प्रधानमंत्री बनीं, एक सालबाद ही उन्होंने परमाणु बम बनाने की दिशा में काम तेज़ कर दिया. कुछ वैज्ञानिकों कोसोवियत रूस भेजा गया, जहां उन्होंने रूसी परमाणु क्षमताओं और रिएक्टरों को समझा.वहां से प्रेरित होकर भारतीय वैज्ञानिकों ने पूर्णिमा नाम से एक रिएक्टर विकसितकिया, जो प्लूटोनियम यानी परमाणु बम बनाने में काम आने वाला रेडियोधर्मी पदार्थ काइस्तेमाल करता. देखिए वीडियो.