बांग्लादेश में विपक्षी पार्टी के मुखपत्र पर ताला क्यों लगाया गया, पूरी कहानी क्या है?
बांग्लादेश में प्रेस फ्रीडम की बात क्यों हो रही है?

पहले कुछ तारीख़ों पर गौर कीजिए.
- मार्च 2021. मोरक्को में सरकार ने ‘अख़बर अल-अयूम’ न्यूज़पेपर को बैन किया.
- जून 2021. चीनी सरकार ने ‘ऐपल डेली’ अख़बार को बैन किया .
- जून 2021 में ही रूस ने ‘V-TIME’ नाम के ऑनलाइन न्यूज़पेपर को बैन कर दिया.
- इसी साल म्यांमार की सरकार ने सेवन-डे न्यूज और इलेवन नाम के दो अखबारों पर पाबंदी लगाई.
अगर हम पिछले कुछ सालों में दुनियाभर के मीडिया संस्थानों पर लगे बैन की लिस्ट बनाने जाएं तो कई मिनट इसी में खप जाएंगे. लिस्ट बहुत लंबी है. मगर इन सबमें जो चीज गौर करने वाली है, वो है पाबंदी की वजहें. मसलन, देश-विरोधी गतिविधि का आरोप, टैक्स चोरी का आरोप, नियमों के उल्लंघन का आरोप आदि. अधिकतर मामलों में इस तरह के आरोप पूर्वाग्रह से ग्रसित लगे.
किसी भी देश में लोकतंत्र को सलामत रखने के लिए बुनियादी अधिकारों, मानवाधिकारों की रक्षा, स्वतंत्र न्यायपालिका आदि के साथ-साथ दो और चीजें ज़रूरी होती हैं. दमदार विपक्ष और प्रेस की आज़ादी. जहां कहीं भी मीडिया पर चोट होती है, वहां लोकतंत्र का गला घुटते देर नहीं लगती. एक दफा अमेरिका के मशहूर पत्रकार वाल्टर क्रोनकाइट ने कहा था,
लेकिन आज हम मीडिया की आज़ादी की चर्चा क्यों कर रहे हैं? क्योंकि हमारे पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश में सरकार ने एक अखबार पर पाबंदी लगा दी है. ये बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) का मुख्यपत्र है. नाम है. ‘दैनिक दिनकाल’. इसको सिर्फ मुखपत्र कहकर खारिज करना सही नहीं होगा. ऐसे समय में जब अधिकतर मीडिया संस्थानों पर सरकार की पूजा करने के आरोप लगते हैं, ऐसे में विपक्ष का मुखपत्र ही उन्हें संतुलित कर सकता है. किसी भी पार्टी का मुखपत्र पत्रकारिता के मानदंडों के हिसाब से नहीं चलता. उसे सच्ची पत्रकारिता कहना भी भ्रामक है. फिर भी अगर उससे मुल्क़ की सुरक्षा और संप्रभुता को नुकसान नहीं पहुंचता, उसे बंद कर दिया जाना चिंता ज़रूर पैदा करता है. चिंता की कई वजहें हैं. मसलन, बांग्लादेश प्रेस फ़्रीडम इंडेक्स में 162वें नंबर पर है. शेख़ हसीना की सरकार पर राजनैतिक विरोधियों को कुचलने के आरोप लगते हैं. दैनिक दिनकाल अपनी पार्टी के फ़ायदे के लिए ही सही, लेकिन वो इन मुद्दों पर लगातार लिख रहा था.
आगे चलने से पहले थोड़ा इतिहास जान लेते हैं.1947 से पहले बांग्लादेश, ब्रिटिश भारत का हिस्सा था. इसे ईस्ट बंगाल के नाम से जाना जाता था. 1955 में ईस्ट बंगाल का नाम बदलकर ईस्ट पाकिस्तान कर दिया गया. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद ईस्ट पाकिस्तान बांग्लादेश बन गया. सत्ता शेख़ मुजीबुर रहमान के पास आई. उनकी पार्टी अवामी लीग थी. मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद पार्टी की ज़िम्मेदारी उनकी बेटी शेख़ हसीना ने संभाली. वो पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बनीं. तब से सत्ता उनके और BNP की ख़ालिदा ज़िया के बीच बदलती रही. हालांकि, समय के साथ गाड़ी पटरी से उतर गई. अवामी लीग का दबदबा बढ़ता गया, जबकि BNP हाशिये पर खिसकती गई.
शेख़ हसीना मौजूदा दौर में बांग्लादेश की प्रधानमंत्री हैं. जबकि खालिदा ज़िया जेल की सज़ा काट रहीं है. BNP अपने नेता को रिहा करने की मांग पर कई बार प्रोटेस्ट कर चुकी है. पार्टी सरकार पर लोकतंत्र को खत्म करने का आरोप भी लगाती रहती है. बांग्लादेश में अगला आम चुनाव दिसंबर 2023 में होना है. BNP का कहना है कि शेख हसीना का चुनाव में धांधली का इतिहास रहा है. इसलिए, इस बार भी चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे. BNP का एक आरोप ये भी है कि पिछले एक दशक में पार्टी के 1 लाख 80 हज़ार से ज़्यादा सदस्यों पर फ़र्ज़ी मामले दर्ज किए गए हैं. और, पार्टी के 3 हज़ार से ज़्यादा सदस्यों की हत्या हुई है.
अब आते हैं हालिया घटना पर. अब सरकार ने BNP के मुखपत्र दैनिक दिनकाल को बंद करने के आदेश दिए हैं. दैनिक दिनकाल BNP का अखबार है. ये 3 दशकों से ज़्यादा समय से बांग्लादेश में काम कर रहा है. अखबार में सैंकड़ों की तादात में पत्रकार और प्रेस कर्मी काम करते हैं. अचानक बैन लगने के बाद ढाका में प्रोटेस्ट भी हुए. कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में BNP और बड़ा प्रदर्शन कर सकती है.
दैनिक दिनकाल की पाबंदी के आदेश पिछले साल दिसंबर में ही दे दिए थे. लेकिन BNP ने इसके ख़िलाफ़ प्रेस काउंसिल में याचिका दायर की और अपना काम जारी रखा. इस काउंसिल में हाईकोर्ट के जज शामिल थे. अखबार चलेगा या बैन होगा, ये फैसला अटका हुआ था. लेकिन 19 फरवरी को 2023 को काउंसिल ने इसकी पाबंदी पर मुहर लगा दी. काउंसिल ने ये भी कहा कि अखबार के पब्लिशर तारिक रहमान को एक मामले में अपराधी पाया गया था. उन्होंने अखबार की अपनी ज़िम्मेदारी किसी और को सौंपी नहीं है और विदेश में जाकर रह रहे हैं. BNP ने इससे इनकार किया है. कहा है कि तारिक ने अखबार से अपना इस्तीफ़ा दे दिया था और अखबार का नया पब्लिशर भी बनाया जा चुका है. सरकार देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी को खत्म करना चाह रही है. तारिक रहमान, खालिदा ज़िया के बेटे हैं, उनको भ्रष्टाचार समेत दूसरे आरोपों में दोषी पाया गया है. वो फिलहाल लंदन में रह रहे हैं.
समाचार एजेंसी AFP को प्रेस काउंसिल के आदेश की एक कॉपी मिली है. आदेश में कहा गया है कि अखबार ने बांग्लादेश के प्रिंटिंग और पब्लिकेशन लॉ को तोड़ा है. इस वजह से इसपर पाबंदी लगाई जा रही है. रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स समेत कई दूसरे संगठनों ने अखबार पर पाबंदी लगाए जाने की निंदा की है. और इसे प्रेस फ्रीडम के लिए खतरा बताया है. साल 2022 वर्ल्ड की प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में बांग्लादेश 162वें स्थान पर था. जो रूस और अफगानिस्तान से भी बदतर है.
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