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क्यों शेख मोहम्मद को तलाक़ के लिए चुकाने होंगे 5 हज़ार करोड़?

इसे ब्रिटेन के इतिहास का सबसे महंगा तलाक बताया जा रहा है

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22 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 22 दिसंबर 2021, 02:32 PM IST)
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इसे ब्रिटेन के इतिहास का सबसे महंगा तलाक बताया जा रहा है
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ब्रिटिश लीगल हिस्ट्री के सबसे हाई-प्रोफ़ाइल डिवोर्स केस का फ़ैसला आ चुका है. फ़ैसले के बाद उसमें सबसे महंगे का टैग भी जुड़ गया. ये मामला एक देश के प्रधानमंत्री से जुड़ा है. इस डिवोर्स की पूरी कहानी बताएंगे. अलगाव की बात आई तो चीन याद आया. चीन में एक मज़दूर रहता था. इमारतें बनाता था. फिर एक दिन उसने अपनी इमारत खड़ी कर ली. दौलत और शोहरत की. दुनिया उसे कैसिनो किंग के नाम से जानने लगी. दो दशक तक चीन उसे झूला झुलाता रहा. जब मन भर गया तो जेल में डलवा दिया. उसका पूरा राज-पाट खत्म कर दिया. अर्श से फर्श वाले मुहावरे का जीता-जागता उदाहरण. अतीत का अरबपति और वर्तमान का संगीन आरोपी कौन है? उसकी पूरी कहानी क्या है? और, चीन ने उससे कट्टी क्यों कर ली? पहले ब्रिटेन में हुए तलाक की बात. ये कहानी प्रिंसेस हया और उनके पूर्व पति शेख मोहम्मद बिन राशिद अल-मकतूम की है. प्रिंसेस हया जॉर्डन के किंग अब्दुल्लाह की सौतेली बहन हैं. शेख मोहम्मद दुबई के शासक हैं. इसके साथ-साथ वो संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के उप-राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी हैं. हया से उनकी शादी 2004 में हुई थी. वो शेख़ मोहम्मद की छठी पत्नी बनीं थी. दोनों की उम्र में 25 साल का अंतर था. लेकिन उनके रिश्ते में कोई उतार नहीं दिखता था. दोनों पब्लिक प्लेस में साथ नज़र आते. शेख़ मोहम्मद का विदेशी दौरा हो या हॉर्स रेसिंग के मुक़ाबले, हया हमेशा उनके साथ दिखतीं. प्रिंसेस हया इंटरव्यूज़ में अपने पति की जमकर तारीफ़ करतीं. एक समय उनकी जोड़ी की मिसालें दी जातीं थी. फिर 2019 का साल आया. 15 अप्रैल को प्रिंसेस हया चुपचाप दुबई से निकल गईं. अपने दोनों बच्चों के साथ. उन्होंने पहले जर्मनी में शरण मांगी. जब वहां बात नहीं बनी तो वो ब्रिटेन पहुंच गईं. प्रिंसेस हया दुबई से भागी क्यों? दरअसल, शेख मोहम्मद को अपनी सबसे प्यारी पत्नी पर शक होने लगा था. शक ये कि हया का उसके बॉडीगार्ड के साथ अफ़ेयर चल रहा है. इसको लेकर दोनों में झगड़ा भी हुआ. दुबई से निकलने से दो महीने पहले ही शेख मोहम्मद ने हया को तलाक भी दे दिया था. शरिया कानून के तहत. ये बात हया को पता नहीं थी. उसी समय शेख की बेटी लतीफ़ा का मैटर भी चर्चा में था. लतीफ़ा अपनी मर्ज़ी की ज़िंदगी जीना चाहती थी. उसने एक बार 2002 में भागने की कोशिश की थी. लेकिन उसे ओमान बॉर्डर पर पकड़ लिया गया. लतीफ़ा ने 2018 में दूसरी बार भागने का प्लान बनाया. वो यूएई से निकल भी आई. लेकिन भारत के समुद्री तट पर उसे गिरफ़्तार कर लिया गया. लतीफा से पहले शेख की एक और बेटी शम्सा ने चंगुल से निकलने की कोशिश की थी. लेकिन यूएई के एजेंट्स उसे दिनदहाड़े ब्रिटेन से किडनैप कर ले गए. उसके बाद से शम्सा को घर में बंद रखा गया है. उसे किसी से मिलने या बात करने तक की इजाज़त नहीं है. हया को डर था कि अगर वो दुबई में रुकीं तो उनके साथ भी वैसा ही कुछ हो सकता है. शेख मोहम्मद ने तलाक ज़रूर दिया था, लेकिन वो बच्चों की कस्टडी छोड़ने के लिए तैयार नहीं थे. इसको लेकर मई 2019 में ब्रिटेन की अदालत में मुकदमा शुरू हुआ. मई 2021 में अदालत ने बच्चों की कस्टडी प्रिंसेस हया को सौंप दी. केस के दौरान ही ये सामने आया कि शेख मोहम्मद ने प्रिंसेस हया, उनके वकीलों और बॉडीगार्ड्स के फ़ोन्स की निगरानी करवाई थी. वो भी पेगासस के ज़रिए. शेख के एजेंट्स ने हया के घर के पास प्रॉपर्टी खरीदने की भी कोशिश की थी. ताकि उनके ऊपर सीधी निगरानी रखी जा सके. आज इस मामले में नया क्या है? नया ये है कि अदालत ने शेख़ मोहम्मद को समझौते के तहत लगभग पांच हज़ार करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया है. इसमें से आधी रकम बैंक गारंटी के तौर पर दी जाएगी. इसे ब्रिटेन के इतिहास का सबसे महंगा तलाक बताया जा रहा है. इन पैसों का इस्तेमाल कहां-कहां होगा? - पहला, बंगलों के रख-रखाव में. प्रिंसेस हया की लंदन और सरे में दो महंगी प्रॉपर्टीज़ हैं. उन्हें मेंटेन रखने के लिए अच्छी-खासी रकम चाहिए. - दूसरा, प्रिंसेस हया और उनके बच्चों की सुरक्षा. कोर्ट ने कहा कि हया को सबसे ज़्यादा ख़तरा शेख मोहम्मद से है. शेख ने पारिवारिक मसले के लिए पेगासस का इस्तेमाल किया था. वो पहले भी अपनी दो बेटियों कि किडनैप करवा चुके हैं. इसलिए, हया के मामले में कोई रिस्क नहीं लिया जा सकता. - तीसरा, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई में. प्रिंसेस हया को शेख मोहम्मद से दो बच्चे हुए. बेटी 14 साल की है. बेटा 09 साल का. दोनों की पढ़ाई पूरी होने तक हर साल सौ करोड़ रुपये दिए जाएंगे. इन सबके अलावा, छुट्टी, एक नर्स और एक दाई का वेतन, परिवार के लिए बुलेटप्रूफ़ गाड़ियों और पालतू जानवरों को रखने में होने वाला खर्च भी जोड़ा गया है. कोर्ट ने फिजूलखर्ची के लिए हया को लताड़ भी लगाई. मसलन, हया का बेटा सिर्फ़ नौ साल का है. उसे गिफ़्ट के तौर पर तीन महंगी कारें दी गईं है. जब प्रिंसेस हया दुबई में रहतीं थी, तब उन्हें घर चलाने के लिए हर साल 8 अरब रुपये दिए जाते थे. दूसरे खर्चों के लिए 90 करोड़ रुपये अलग से मिलते थे. इसके अलावा, उन्हें हमेशा महंगे गिफ़्ट भी मिलते रहते थे. इसी रकम में से लगभग 60 करोड़ रुपये हया ने अपना अफ़ेयर छिपाने के लिए दिए. अपने चार बॉडीगार्ड्स को. उन्हीं में से एक के साथ शादी से पहले हया का अफ़ेयर चल रहा था. कोर्ट की कार्यवाही के दौरान प्रिंसेस हया ने अपने लिए रुपये नहीं मांगे थे. उन्होंने कहा था कि मेरे गिफ़्ट और कपड़े दुबई में छूट गए हैं, मुझे उसके बदले पैसे दे दिए जाएं. शेख़ मोहम्मद की तरफ़ से क्या बयान आया? कहा गया कि प्रिंसेस हया के कपड़े और उनके गिफ़्ट्स उन्हें लौटा दिए जाएंगे. उन्होंने अपनी वेबसाइट्स से विरह और बेवफ़ाई वाली कविताएं हटाने की बात भी कही है. शेख मोहम्मद ने वे कविताएं प्रिंसेस हया के लिए लिखीं थी. हया ने कहा था कि इससे उन्हें ख़तरा महसूस हो रहा है. कोर्ट के फ़ैसले पर शेख के वकील ने आधिकारिक बयान जारी किया. उन्होंने कहा कि शेख हमेशा चाहेंगे कि उनके बच्चों को बेहतरीन परवरिश मिले. कोर्ट ने फ़ैसला सुना दिया है. अब इस पर कुछ और कहने की ज़रूरत नहीं है. दुबई के चैप्टर को यहीं पर विराम देते हैं. हम चलते हैं मकाऊ की तरफ़. मकाऊ चीन के दक्षिणी तट पर बसा एक स्वायत्त क्षेत्र है. हॉन्ग कॉन्ग की तरह. दोनों में एक खास अंतर है. हॉन्ग कॉन्ग पर ब्रिटेन का क़ब्ज़ा हुआ करता था. जबकि मकाऊ पर पुर्तगाल का. मकाऊ में इंसानों की बसावट का सबसे पुराना निशान पांच हज़ार साल पहले का है. तीसरी शताब्दी ईसापूर्व से चीनी राजवंशों का नियंत्रण रहा. पांचवीं शताब्दी के आस-पास ये समुद्री जहाजों के ठहराव का केंद्र बना. 13वीं सदी में जब मंगोलों ने चीन पर आक्रमण किया. तब लोग शरण लेने के लिए भागे. उस दौरान 50 हज़ार से अधिक लोगों ने मकाऊ में शरण ली. 1557 में चीन ने मकाऊ को पुर्तगाल को लीज पर दे दिया. मकाऊ का पोर्ट लंबे समय तक एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का मुख्य केंद्र बना रहा. 19वीं सदी के आख़िर में चीन की राजशाही कमजोर पड़ चुकी थी. चीन में गृहयुद्ध शुरू होने लगा था. इसका फायदा उठाकर पुर्तगाल ने मकाऊ को अपना उपनिवेश घोषित कर दिया. 1949 की कम्युनिस्ट क्रांति के बाद और भी चाइनीज़ लोग मकाऊ पहुंचे. इससे चीन का प्रतिनिधित्व बढ़ा. 1987 में चीन और पुर्तगाल समझौते पर राजी हो गए. तय हुआ कि दिसंबर 1999 में पुर्तगाल मकाऊ पर से अपना दावा छोड़ देगा. इसके अगले 50 साल तक मकाऊ स्वायत्त रहेगा. वहां के लोगों के पास अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार होगा. वे अपनी मर्ज़ी से यात्रा कर सकेंगे. रक्षा और विदेश मामलों में अंतिम निर्णय मेनलैंड यानी पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना का होगा. 2049 के बाद मकाऊ में चीन के सारे कानून लागू हो जाएंगे. हॉन्ग कॉन्ग में ये डेडलाइन 2047 की है. हॉन्ग कॉन्ग में चीन के बढ़ते दखल और लोकतंत्र की मांग को लेकर प्रदर्शन चलता रहता है. हालांकि, मकाऊ के साथ ऐसा नहीं है. मकाऊ में सब शांति-शांति है. वहां की जनता ने चीन का प्रभुत्व स्वीकार लिया है. इसका एक कारण ये भी है कि आबादी का बड़ा हिस्सा मेनलैंड चाइना से आया है. चीन मकाऊ को वन नेशन, टू सिस्टम के आदर्श उदाहरण के तौर पर पेश करता है. पुर्तगाल के शासन के समय मकाऊ में कैसिनो बिजनेस का एकाधिकार एक कंपनी के पास था. 2001 में चीन ने मोनोपॉली खत्म कर दी. उसने अलग-अलग देशों की कंपनियों को कैसिनो खोलने का लाइसेंस दिया. इसके बाद मकाऊ में दुनिया की दिग्गज कंपनियों का आगमन हुआ. चीन में गैम्बलिंग को अपराध की श्रेणी में रखा गया है. मकाऊ में ये लीगल है. लेकिन वहां जाने के लिए वीजा या परमिट की ज़रूरत होती है. ये नियम चीन के नागरिकों पर भी लागू है. मकाऊ के कैसिनो बिजनेस का फ़ोकस बड़े क्लाइंट्स पर था. जो ज़्यादा से ज़्यादा खर्च कर सकें. ऐसे ग्राहकों को लाने के लिए उन्होंने कुछ अनुभवी लोग चुने. उन्हें जंकेट ऑपरेटर्स कहा गया. इनका जिम्मा ग्राहक लाने से लेकर उन्हें घुमाने और पैसा वसूलने तक होता था. मकाऊ का कैसिनो बिजनेस चल निकला. जल्दी ही इसने लास वेगास को पीछे छोड़ दिया. चीन को भी इससे अरबों-खरबों का फायदा हो रहा था. 2020 के साल में कोरोना ने मकाऊ के बिजनेस को भारी नुकसान पहुंचाया. सितंबर 2021 के बाद स्थिति सामान्य होने लगी. लेकिन नवंबर में कुछ ऐसा हुआ कि आशंका के बादल पहले से अधिक गहरे हो गए. मकाऊ पुलिस ने 29 नवंबर को 11 लोगों को गिरफ़्तार किया. पुलिस ने कहा कि ये लोग मेनलैंड चाइना में अवैध तरीके से ऑनलाइन कैसिनो बिजनेस चला रहे थे. जैसा कि हमने बताया कि आप मकाऊ में जुआ खेल या खिला सकते हैं. लेकिन चीन में ऐसा करने पर दस साल तक की जेल हो सकती है. साथ में, ज़ुर्माना भी लगाया जा सकता है. छापेमारी के दो दिनों बाद पता चला कि गिरफ़्तार लोगों में से एक एल्विन चाउ भी है. चाउ जंकेट कंपनी सनसिटी ग्रुप का बॉस था. सनसिटी को कैसिनो बिजनेस में सबसे ज़्यादा पैसा लाने वाली कंपनी के तौर पर जाना जाता है. एल्विन चाउ का जन्म 1974 में मकाऊ में हुआ था. उसने कंस्ट्रक्शन सेक्टर में मजदूर के तौर पर अपना कैरियर शुरू किया. फिर उसने माफ़िया बॉस वान क्वोक-की के साथ काम करना शुरू किया. वान के गिरोह में एक समय दस हज़ार से अधिक लोग काम करते थे. पुर्तगाल के जाने के बाद चीन ने शिकंजा कसना शुरू किया. इसमें वान भी पकड़ा गया. उसे 15 सालों के जेल भेज दिया गया. चाउ जेल में अपने पुराने बॉस से मिलने जाता रहता था. वान चाउ से खुश हुआ. उसने अपने एक दोस्त को मनाया कि वो चाउ को कुछ पैसों की मदद करे. इसी पैसों से 2007 में सनसिटी ग्रुप की नींव रखी गई. ये ग्रुप फिलहाल मकाऊ के जंकेट बिजनेस के 40 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखता है. इसमें सबसे बड़ी भूमिका चाउ की थी. वो अमीरतम लोगों को आसानी से आकर्षित कर लेता था. जब सनसिटी बड़ी हुई, तब उसने फ़िल्म और रियल एस्टेट में निवेश करना शुरू किया. इस तरह से वो लगातार नए ग्राहकों को मकाऊ की तरफ़ खींचता रहता था. गिरफ़्तारी के दो दिनों के बाद चाउ ने सनसिटी के सीईओ का पद छोड़ दिया. इसके बाद कंपनी के शेयर धड़ाम से नीचे गिर गए. आशंका जताई जा रही है कि मकाऊ का कैसिनो बिजनेस बुरी तरह प्रभावित हो सकता है. चाउ ने समय-समय पर चीन के प्रति वफ़ादारी साबित करने की कोशिश की. 2020 में आरोप लगा कि उसकी कंपनी हॉन्ग कॉन्ग के प्रोटेस्टर्स को फ़ंड दे रही है. चाउ ने इसका सिरे से खंडन किया था. चीन सरकार चाउ के ख़िलाफ़ क्यों हुई? चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 2014 में करप्शन के ख़िलाफ़ अभियान शुरू किया था. रिपोर्ट्स हैं कि जुए के चलते चीन से 14 लाख करोड़ रुपयों की मनी लॉन्ड्रिंग हो रही है. मकाऊ के ज़रिए. चीन सरकार मानती है कि इसमें जंकेट ऑपरेटर्स का बड़ा हाथ है. एल्विन चाउ पर पिछले साल ही गुप्त जांच बिठाई गई थी. पता चला कि वो फ़िलीपींस और कम्बोडिया से ऑनलाइन कैसिनो बिजनेस चला रहा था. जो लोग मकाऊ नहीं जा सकते थे, उनके लिए चीन में बैठकर जुआ खेलने की व्यवस्था की गई थी. सबूत जुटाने के बाद अरेस्ट वॉरंट निकला और फिर मकाऊ पुलिस ने चाउ को अरेस्ट कर लिया. चाउ ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है. एक समय तक पैपरात्ज़ी के ज़ेहन और एंटरटेनमेंट अख़बारों की सुर्खियों में बना रहने वाला अरबपति बिजनेस टाइकून जेल में बंद है. बहुत संभावना है कि ये उसके कैरियर का अंत होगा.

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