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रूस की खेरसोन में हार, पुतिन कहां गायब हुए?

रूस को खेरसोन से पीछे क्यों हटना पड़ा?

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रूस को खेरसोन से पीछे क्यों हटना पड़ा?
रूस को खेरसोन से पीछे क्यों हटना पड़ा?
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साजिद खान
11 नवंबर 2022 (अपडेटेड: 11 नवंबर 2022, 08:02 PM IST)
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ये कहने में अतिश्योक्ति नहीं होगी कि,

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन अपने राजनैतिक जीवन के सबसे मुश्किल दौर से गुज़र रहे हैं. उनके अपने ही मुल्क़ में उनकी छवि तार-तार हुई जा रही है. पुतिन ने 2022 की शुरुआत में रूस का गौरवशाली अतीत लौटाने का विजन पेश किया था. इसी के तहत उन्होंने फ़रवरी में यूक्रेन पर हमले का आदेश दिया था. जैसे-जैसे ये साल बीत रहा है, उनकी कोशिश किसी बुरे सपने में बदलती जा रही है. यूक्रेन के जिस खेरसोन प्रांत को पुतिन ने रूस का हिस्सा घोषित किया था, रूसी सेना अब वहां से वापस लौट रही है. रूस के रक्षामंत्री सर्गेइ शोइगु ने 09 नवंबर को इसका ऐलान किया. दिलचस्प ये रहा कि इस मौके पर पुतिन मौजूद नहीं थे. कहा जा रहा है कि वो अपना चेहरा बचाने में व्यस्त हैं. हालांकि, उनके लिए इस सदमे से उबरना बहुत मुश्किल होने वाला है.

आज हम बात करेंगे,

- रूस को खेरसोन से पीछे क्यों हटना पड़ा?
- पुतिन ने इतने दिनों से चुप्पी क्यों साध रखी है?
- और, रूस-यूक्रेन युद्ध में नया क्या हो रहा है?

पहले दो तारीख़ों पर नज़र डालते हैं.

नंबर एक.

तारीख़, 30 सितंबर 2022.

जगह, रूसी सत्ता-प्रतिष्ठान के केंद्र क्रेमलिन का सेंट जॉर्ज हॉल..

पुतिन, यूक्रेन के चार प्रांतों को रूस का हिस्सा बताने वाले दस्तावेज पर दस्तख़त करते हैं. ये चार प्रांत थे - लुहान्स्क, दोनेश्क, ज़ेपोरज़िया और खेरसोन.
इस मौके पर पुतिन ने कहा था,

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 यूक्रेन के चार प्रांतों को रूस का हिस्सा बताने वाले दस्तावेज पर दस्तख़त करते पुतिन (क्रेडिट -AFP)

इतना सुनते ही सेंट जॉर्ज हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजने लगता है.

अब दूसरी तारीख़ की बात कर लेते हैं.

तारीख़, 09 नवंबर 2022.
जगह, अज्ञात.

रूस के नेशनल टीवी पर रक्षामंत्री सर्गेई शोइगु का एक बयान चलता है. क्या?

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रूसी रक्षामंत्री सर्गेई शोइगु

इस मौके पर यूक्रेन में लड़ रही रूसी सेना के कमांडर सर्गेई सुरोविकिन भी मौजूद थे. उनका बयान था,

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जिस समय रूसी सैन्य अधिकारी ख़ेरसोन से वापसी का ऐलान कर रहे थे, उस समय पूरे कमरे में कोई और मौजूद नहीं था. दोनों कमांडर्स के कंधे झुके हुए थे. और तो और, इस मौके पर पुतिन किसी गैर-ज़रूरी कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे.

इसका आकलन इस तरह से किया जा रहा है कि पुतिन ख़ुद को असफ़लताओं से दूर रखना चाहते हैं. वो अपनी विजेता वाली छवि को कायम रखना चाहते हैं. लेकिन इतना ज़रूर है कि खेरसोन की हार ने उनका मनोबल ज़रूर हिला दिया है. किसी दौर में पुतिन की स्पीच लिखने वाले अब्बास गेलियामोव ने न्यू यॉर्क टाइम्स को कहा,

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अब समझते हैं कि खेरसोन इतना ख़ास क्यों है? पहले ये नक़्शा देखिए.

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क्रेडिट - www.understandingwar.org

खे़रसोन, यूक्रेन के दक्षिण में है. ये नाइपर या निप्रो नदी के किनारे पर बसा है. निप्रो नदी बहकर काले सागर में गिरती है. काले सागर के आसपास नेटो के तीन देश बसे हैं. तुर्की, बुल्गारिया और रोमेनिया. इसके अलावा, यूक्रेन और जॉर्जिया नेटो का मेंबर बनना चाहते हैं. खेरसोन के ज़रिए यूक्रेन ब्लैक सी पर नियंत्रण रख सकता था.

इसके अलावा, खेरसोन में बना खेरसोन शिपयार्ड मर्चेंट शिप, टैंकर, कंटनेर शिप, आइसब्रेकर, फ़्रिज जैसे ज़रूरी सामान बनाता है. इस शहर के पास अपना इंटरनैशनल एयरपोर्ट भी है. खेरसोन क्रीमियन पेनिनसुला के नजदीक है. यहां पर रूस ने 2014 में क़ब्ज़ा किया था. इस जगह पर रूस के कई सैन्य अड्डे हैं. खेरसोन से वापसी के बाद ये इलाके यूक्रेन की जद में आ जाएंगे. इससे क्रीमिया में रूस की स्थिति कमज़ोर होगी.

ये तो हुई खेरसोन की खासियत. रूस ने इसपर क़ब्ज़ा कैसे किया था और अब वो इसे छोड़कर क्यों जा रहा है?
ये समझने के लिए हम टाइमलाइन देख लेते हैं.

- 24 फरवरी 2022. पुतिन यूक्रेन में स्पेशल मिलिटरी ऑपरेशन को हरी झंडी दिखाते हैं. उसी रोज़ रूसी सैनिक क्रीमिया के रास्ते से खेरसोन में घुस जाते हैं.

- 02 मार्च को रूस का रक्षा मंत्रालय खेरसोन पर दावा ठोक देता है. शहर की सड़कों पर रूसी सैनिकों की गश्त शुरू हो जाती है.

- 05 मार्च को खेरसोन की जनता प्रोटेस्ट शुरू कर देती है. वे रूसी कब्ज़े को अवैध बताते हैं. वे नारे लगाते हैं. ‘खेरसोन इज़ यूक्रेन’. 21 मार्च तक प्रदर्शन और तेज़ हो जाते हैं. कठपुतली गवर्नर व्लादिमीर साल्डो को हटाने की मांग होती है. इसी दिन रूसी सेना प्रदर्शनकारियों पर हथगोले और गोलियों का इस्तेमाल करती है. लेकिन प्रोटेस्ट खत्म नहीं होता.

- 25 मई को पुतिन एक ऐलान करते हैं. वो कहते हैं कि खेरसोन और उससे सटे जेपोरज़िया के लोगों को फास्ट-ट्रैक रूसी नागरिकता दी जाएगी. मतलब, उन्हें आसानी से रूस की नागरिकता दी जाएगी. उन लोगों कोई अहर्ता पूरी करने की ज़रूरत नहीं होगी.

- सितंबर में यूक्रेन आर्मी दावा करती है कि उसने खेरसोन में बड़ी कामयाबी हासिल की है. इसी महीने 2 और बड़ी घटनाएं हुईं.
एक तो ये हुआ कि रूस ने खेरसोन की सरकारी इमारतों पर बमबारी शुरू कर दी.
दूसरी चीज़ ये हुई कि पुतिन ने यूक्रेन के चार इलाकों में जनमत-संग्रह कराने का ऐलान किया. इन चार इलाकों में एक खेरसोन भी था. ये जनमत संग्रह, रूस में शामिल होने के लिए था.

- 23 से 27 सितंबर के बीच जनमत संग्रह कराया गया. रूस ने दावा किया कि सभी इलाकों में 90 प्रतिशत से अधिक लोगों ने रूस में शामिल होने के पक्ष में वोट दिया.

- 30 सितंबर को मॉस्को में आलीशान समारोह मनाया गया. इसमें पुतिन ने लंबा-चौड़ा भाषण दिया. इस मौके पर चारों प्रांतों के गवर्नर भी इकट्ठा हुए थे.

- पुतिन का दावा था कि चारों इलाके हमेशा के लिए रूस का हिस्सा बन चुके हैं. इंटरनैशनल कम्युनिटी ने इसका विरोध किया. यूक्रेन ने कहा कि वो रूस को सफ़ल नहीं होने देगा. उसने अपने दावे की लाज रखी. 03 अक्टूबर को यूक्रेन आर्मी ने नाइपर नदी के किनारे बसे कई गांवों को वापस हासिल कर लिया. इससे रूस की सप्लाई लाइन ख़तरे में पड़ गई. रूस बदला लेना चाहता था. इसी वजह से गवर्नर साल्दो ने लोगों से खेरसोन खाली करने की अपील की. नवंबर में पुतिन ने यही अपील फिर से दोहराई. रूस का दावा है कि उसने अभी तक 70 हज़ार लोगों को खेरसोन से बाहर निकाला है.

- फिर 09 नवंबर को एक बड़ी घटना घटती है. खेरसोन के डिप्टी गवर्नर किरिल स्त्रेमोसोव की कार पलट जाती है. इस दुर्घटना में किरिल मारे जाते हैं. किरिल यूक्रेनी नागरिक थे. लेकिन उन्होंने अपने मुल्क़ से गद्दारी की. वो यूक्रेन पर रूस के क़ब्ज़े के पक्षधर थे. यूक्रेन ने किरिल को मोस्ट वॉन्टेड लोगों की लिस्ट में रखा था.
रूस ने आरोप लगाया कि किरिल की हत्या हुई है. पुतिन ने किरिल को मरणोपरांत ऑर्डर ऑफ़ करेज़ का अवॉर्ड देने का ऐलान भी किया.

- किरिल की मौत के कुछ घंटे बाद ही रूस के नेशनल टीवी पर दो लोग अवतरित हुए. रक्षा मंत्री सर्गेइ शोइगु और यूक्रेन में रूस के कमांडर सर्गेई सुरोविकिन. उन्होंने खे़रसोन के पश्चिमी तट से रूसी सैनिकों की वापसी का ऐलान कर दिया.

उन्होंने क्या-क्या कहा? एक बार सुन लीजिए.

सर्गेई सुरोविकिन ने कहा,

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इशके आगे सर्गेई शोइगु ने माइक संभाला. वो बोले,

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ये तो हुआ रूस का सरकारी बयान. उन्होंने खेरसोन की हार को मानवता के लिए हितकारी बताने में कोई कसर नहीं छोड़ी. ये अलग बात है कि रूस पर यूक्रेन के कई इलाकों में मानवाधिकार उल्लंघन और नरसंहार के आरोप लगते हैं. यूक्रेन का ये भी आरोप है कि रूस ने जान-बूझकर सरकारी इमारतों को निशाना बनाया. रूसी सरकार ने ज़ोर देकर अपने सैनिकों की सुरक्षा की बात कही. लेकिन उसी सरकार ने 21 सितंबर को अपने नागरिकों को युद्ध के मैदान में भेजने का आदेश जारी किया था. इसके ख़िलाफ़ प्रोटेस्ट हुआ तो उनका दमन भी किया गया. बाद में रूस ने ये आदेश वापस ले लिया था.

अब हम अगले सवाल की तरफ़ बढ़ते हैं.

खेरसोन में रूस की हार की वजह क्या रही?

तीन मुख्य वजहें गिनाई जा रहीं है.

- नंबर एक. सैनिकों की लामबंदी में कमी. अब आप बोलेंगे की क्या जटिल बात बता दी. चिंता मत कीजिये, पूरा समझाते हैं. युद्ध की शुरुआत में जब रूस, यूक्रेन के पूर्वी और उत्तरी शहरों में कब्ज़ा कर रहा था तो उसने अपनी सेना और हथियार वहां खपा दिए, जिससे दूसरे इलाकों में हथियार और सैनिकों की कमी पड़ी, ऐसे ही इलाकों में खेरसोन भी शामिल था. रूस इसकी भरपाई नहीं कर पाया. जिसके कारण उसकी पकड़ ढीली होने लगी.

- नंबर दो. खेरसोन पर शासन में कमी. रूस ने उस इलाके में जनमत संग्रह करवाया. अपने प्यादे बैठाए, मार्शल लॉ लागू किया लेकिन इन सबके बावजूद, रूस खेरसॉन पर प्रभावी रूप से शासन नहीं कर सका. रूसी कठपुतलियां खेरसोन के लोगों का भरोसा जीत पाने में नाकाम रहीं.

- नंबर तीन. यूक्रेन के बढ़ते जवाबी हमले. अगस्त तक यूक्रेन को पश्चिमी देशों से कम दूरी तक हमला कर पाने वाले औसत हथियार मिल रहे थे. लेकिन बाद में यूक्रेनी सैनिकों को अच्छी ट्रेनिंग मिली, आधुनिक हथियार मिले. जैसे हॉवित्ज़र, HIMARS, एयर-डिफ़ेंस सिस्टम, नई तकनीक से लैस टैंक और ड्रोन. इन हथियारों की खेप अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी से आ रही थी. जबकि दूसरी तरफ रूस की हथियारों की खरीद धीमी पड़ी हुई थी. इसके कारण यूक्रेन आगे बढ़ता चला गया. रूस के पास भागने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था. क्योंकि इसकी सप्लाई सिस्टम बिगड़ गया था और उनका कमांड सिस्टम भी ठीक से काम नहीं कर पा रहा था.

अब अंतिम सवाल की तरफ़ चलते हैं. अब आगे क्या होगा? 

यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने कहा कि रूस को पीछे हटने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगेगा.

तो क्या रूस हमेशा के लिए पीछे हट रहा है?

शायद नहीं. रूस ने कहा है कि वो अपना बेस निप्रो नदी के दूसरे तट पर बनाएगा. यानी, उसके सैनिक नदी की दूसरी तरफ़ तैनात रहेंगे. इस कदम को शक्ति बटोरने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है. रूस को ये भी दिखाना है कि वो वापसी कर सकता है. इसके लिए ज़रूरी है कि वो खेरसोन को पूरी तरह हाथ से छूटने ना दे.

हालिया दिनों में यूक्रेनी सैनिकों ने निप्रो नदी के कई पुलों को तबाह किया है, ताकि रूस को मदद मिलने में परेशानी हो. जानकारों की मानें तो यूक्रेन अभी ड्राइविंग सीट पर है. वो रूस के नियंत्रण वाले कुछ और हिस्सों में आगे बढ़ेगा. इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुतिन की गैरमौजूदगी ने उनकी शासन-क्षमता और युद्ध के भविष्य को लेकर कई शंकाएं पैदा कर दी हैं. आने वाले कुछ समय में एक सवाल ज़ोर-शोर से पूछा जाएगा, क्या पुतिन ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं?

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