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पार्क ग्यून हे की राष्ट्रपति की कुर्सी से रुखस़ती क्यों हुई?

4 साल 9 महीने जेल में गुजारने के बाद पार्क को क्षमादान मिल गया

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24 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 24 दिसंबर 2021, 02:52 PM IST)
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4 साल 9 महीने जेल में गुजारने के बाद पार्क को क्षमादान मिल गया
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आज की कहानी एक क्षमादान की है. एक राष्ट्रपति को मिली माफ़ी की. दो दश राष्ट्रपति, जो अपने मुल्क़ की सर्वोच्च कुर्सी पर बैठने वाली पहली महिला बनी. लेकिन इससे भी उसका मन नहीं भरा. लालच आया और वो सारा हासिल छीन कर ले गया. पद गया, प्रतिष्ठा गई, समर्थकों ने मुंह फेर लिया. हिस्से में आई, 24 बरस की जेल. ये कहानी साउथ कोरिया की पूर्व राष्ट्रपति पार्क ग्यून हे की है. हम जानेंगे, पार्क ग्यून हे की पूरी कहानी क्या है? वो राष्ट्रपति कैसे बनी? कुर्सी से उनकी रुखस़ती क्यों हुई? और, आज के दिन हम पार्क की चर्चा क्यों कर रहे हैं? सबसे पहले बैकग्राउंड समझ लेते हैं. 15 अगस्त 1974 का दिन था. साउथ कोरिया की राजधानी सियोल के नेशनल थियेटर में तत्कालीन राष्ट्रपति पार्क चोंग-ही भाषण दे रहे थे. मौका लिबरेशन डे का था. थियेटर में उस रोज़ डेढ़ हज़ार लोगों की भीड़ जमा थी. माहौल उल्लास का था. इसी बीच भीड़ से किसी ने गोलियां चलानी शुरू कर दी. निशान प्रेसिडेंट के ऊपर था. लेकिन गोली का निशाना चूक गया. वो जाकर लगी, प्रेसिडेंट की पत्नी और साउथ कोरिया की फ़र्स्ट लेडी यक यंग-सो को. उन्हें अस्पताल ले जाया गया. लेकिन शाम होते-होते उन्होंने दम तोड़ दिया. साउथ कोरिया की फ़र्स्ट लेडी का पद खाली हो चुका था. प्रेसिडेंट पार्क चोंग-ही ने फिर शादी नहीं की. इसलिए, ये उपाधि उनकी सबसे बड़ी बेटी को मिली. चोंग-ही सेना में अफ़सर थे. उन्होंने 1961 में तख़्तापलट के जरिए सत्ता हासिल की थी. उस समय उनकी सबसे बड़ी बेटी पार्क ग्यून हे मात्र नौ साल की थी. 22 की उम्र में ग्यून हे साउथ कोरिया की फ़र्स्ट लेडी बन गई. वो राष्ट्रपति के साथ नज़र आने लगी. अक्टूबर 1979 में पार्क चोंग-ही की हत्या हो गई. उनके आधिकारिक आवास ब्लू हाउस के अंदर. हत्यारा कोई और नहीं बल्कि खुफिया एजेंसी का डायरेक्टर किम जे-क्यू था. पिता की मौत के साथ ही ग्यून हे नेपथ्य में चली गई. हालांकि, ये उसके कैरियर का अंत नहीं था. पिक्चर अभी बाकी थी. ग्यून हे ने पांच सालों तक फ़र्स्ट लेडी के तौर पर काम किया था. इसी दौरान उसकी मुलाक़ात चोई ते-मिन से हुई. ते-मिन एक ईसाई धर्मगुरू था. अय्याश और रसिक. उसे साउथ कोरिया का रासपुतिन भी कहते हैं. रासपुतिन कौन था? रासपुतिन रशियन ज़ारशाही के अंतिम दिनों में चर्चा में आया था. वो तंत्र-विद्या में माहिर था. वो लोगों को, खासकर महिलाओं को अपनी तरफ़ आसानी से आकर्षित कर लेता था. उसके दीवानों में ज़ार निकोलस द्वितीय की पत्नी अलेक्ज़ेंड्रा भी थी. उस दौर में रूस पहला विश्व युद्ध लड़ रहा था. निकोलस द्वितीय मोर्चे पर सैनिकों को मोटिवेट कर रहे थे. इधर रासपुतिन अलेक्ज़ेंड्रा को अपने वश में कर चुका था. उसके इशारे पर रूस में कुछ भी हो सकता था. इससे कुलीन वर्ग नाराज़ हो गया. फिर उन्होंने साज़िश करके उसकी हत्या करवा दी. हम चलते हैं साउथ कोरिया के रासपुतिन यानी चोई ते-मिन की तरफ़. ते-मिन ने पार्क ग्यून-हे पर अपना प्रभाव स्थापित कर दिया था. वो उसके इशारों पर काम करने लगी थी. ये संबंध उसके पिता की हत्या के बाद भी बरकरार रहे. चोई ते-मिन की एक बेटी थी. अभी भी है. चोई सोन-सिल. ग्यून-हे और सोन-सिल में दोस्ती हो गई. ये दोस्ती आगे चलकर बड़ा गुल खिलाने वाली थी. पिता की मौत के बाद ग्यून हे साइडलाइन हो चुकी थी. 1990 के दशक में साउथ कोरिया में सही मायनों में लोकतंत्र आया. उसी दौरान वो लोकल पॉलिटिक्स में उतरी. 1998 में पार्क को पहली बार नेशनल असेंबली में जगह मिल गई. पार्क ने पहली बार 2007 में राष्ट्रपति पद के लिए दावेदारी पेश की. लेकिन पार्टी ने दूसरे उम्मीदवार के नाम पर मुहर लगा दी. हालांकि, पार्क को लंबा इंतज़ार नहीं करना पड़ा. 2012 के चुनाव में दावेदारी पेश की और वो चुनाव जीत भी गई. पार्क ग्यून-हे साउथ कोरिया की पहली महिला राष्ट्रपति बनने का रेकॉर्ड अपने नाम कर चुकी थी. ये ऐतिहासिक था. कार्यकाल के शुरुआती दिनों में उनकी ख़ूब तारीफ़ भी हुई. कहा गया कि पार्क साउथ कोरिया को स्वर्णिम-युग में ले जाएंगी. फिर आया साल 2014. सियोल के एक आलीशान घर में झगड़ा हुआ. एक महिला और एक पुरुष के बीच. दोनों में क्या संबंध थे, इसकी पुष्टि कभी नहीं हो पाई. हालांकि, कोरियन मीडिया मानती है कि महिला ने उस पुरुष को ‘टॉय बॉय’ बनाकर रखा था. पुरुष का नाम, कू यंग-ते. कू साउथ कोरिया के लिए एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल जीत चुके हैं. बाद में वो बिजनेसमैन बन गए. काफ़ी सफ़ल भी हुए. झगड़ा करने वाली महिला चोई सोन-सिल थी. पार्क ग्यून-हे की 40 साल पुरानी दोस्त. चोई और कू की मुलाक़ात 2012 में हुई थी. उसी साल, जब पार्क साउथ कोरिया की राष्ट्रपति बनी. दोस्ती के बाद कू ने चोई को सौ से अधिक महंगे हैंडबैग और कपड़े सप्लाई किए थे. इन सबके पैसे चोई ने अपने अकाउंट से दिए. चोई इन्हें गिफ़्ट के तौर पर पार्क को देती थी. दोस्ती अच्छी चल रही थी. फिर झगड़ा किस बात पर हुआ? दरअसल हुआ ये कि एक दिन चोई अपनी बेटी का पपी लेकर कू के घर आई. उसने कू को कहा कि थोड़ी देर पपी का ध्यान रखो, मैं आती हूं. जब देर हुई तो कू गोल्फ़ खेलने चले गए. इसी बीच में चोई घर पहुंच गई. वहां उसने देखा कि पपी अकेला है. ये देखकर वो भड़क गई. जब कू वापस आया, तब उसने बहुत बुरा-भला सुनाया. कू ने इस घटना के बारे में बाद में कहा था, ‘उसने मुझे भद्दी-भद्दी गालियां दी. चोई ने मुझे ग़ुलाम समझ रखा था.’ इस अपमान से नाराज़ कू मीडिया के पास चले गए. उन्होंने चोई और पार्क के संबंधों का कच्चा-चिट्ठा खोल दिया. कू ने सीसीटीवी फुटेज़ इकट्ठा किए. जिनमें चोई राष्ट्रपति को मिली सुविधाओं का इस्तेमाल करते हुए दिख रही थी. फिर कू ने एक इंटरव्यू दिया. इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि चोई राष्ट्रपति के भाषणों को एडिट करती है. इस आरोप ने तहलका मचा दिया. रिपोर्टर्स इस सुराग के सहारे जांच में जुट गए. उन्हें एक टैबलेट मिला. इसमें उन्हें राष्ट्रपति के भाषणों वाली फ़ाइल के साथ चोई की सेल्फ़ी वाली तस्वीरें मिली. एक बार जो सिरा खुला तो फिर धड़ाधड़ राज़ खुलते चले गए. पता चला कि चोई ने पार्क से रिश्ते का फायदा उठाकर बड़ी-बड़ी कंपनियों से पैसे उठाए. इन कंपनियों में सैमसंग भी शामिल था. सैमसंग के डि फ़ैक्टो हेड ली जे-यंग ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए चोई के दो फ़ाउंडेशंस को करोड़ों की रकम दी. इसके अलावा, चोई की बेटी चुंग यु-रा के लिए एक घोड़ा और लाखों डॉलर्स दिए गए. फ़रवरी 2017 में ली जे-यंग को घूस देने और गबन के मामले में पांच साल जेल की सज़ा सुनाई गई. चोई के स्कैंडल में सैमसंग के अलावा भी कई अधिकारी, मंत्री, सेलिब्रिटीज़ आदि शामिल थे. चोई ने अपनी बेटी को पास करवाने के लिए यूनिवर्सिटी के अधिकारियों पर दबाव डाला था. चोई की बेटी बिना परीक्षा दिए पास होती चली गई. इसके अलावा, राष्ट्रपति पार्क, चोई को अपनी स्पीच भेजा करतीं थी. एडिटिंग के लिए. पार्क ने चोई को सीक्रेट दस्तावेज़ों का एक्सेस भी दे रखा था. ये पूरी तरह से गैर-कानूनी था. इसे साउथ कोरिया की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ खिलवाड़ माना गया. चोई ना तो सरकारी अधिकारी थी और ना ही उसे सिक्योरिटी क्लीयरेंस मिला हुआ था. जब परतें खुलीं तो लोग गुस्सा हो गए. साउथ कोरिया में ज़बरदस्त प्रदर्शन शुरू हुए. लोग पार्क ग्यून-हे की इस्तीफ़े की मांग को लेकर सड़कों पर उतरने लगे. नवंबर 2016 में पार्क जनता के सामने आईं. उन्होंने चोई को सरकारी मामलों में हस्तक्षेप की छूट देने के लिए माफ़ी मांगी. लाइव भाषण में पार्क रोने लगीं. लेकिन जनता इस दिखावटी आंसू से पिघलने के लिए तैयार नहीं हुई. जनता इस्तीफ़े की मांग पर अड़ी रही. आख़िरकार, मार्च 2017 में महाभियोग के तहत उन्हें पद से बर्ख़ास्त कर दिया गया. इसके बाद पार्क को अरेस्ट कर लिया गया. उनके ऊपर मुकदमा शुरू हुआ. अप्रैल 2018 में निचली अदालत ने उन्हें 24 साल जेल की सज़ा सुनाई. जनवरी 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने पार्क की सज़ा को घटाकर बीस साल कर दिया. साथ ही, उन्हें एक अरब रुपये का ज़ुर्माना चुकाने का आदेश भी दिया. चोई सोन-सिल को जून 2017 और फ़रवरी 2018 में दो अलग-अलग मामलों में 23 साल क़ैद की सज़ा सुनाई गई. उसके ऊपर लगभग 120 करोड़ रुपये का ज़ुर्माना भी लगाया गया. आज हम ये सब क्यों सुना रहे हैं? दरअसल, साउथ कोरिया ने पार्क ग्यून-हे को क्षमादान देने का ऐलान किया है. पार्क चार साल नौ महीने जेल में गुजार चुकीं है. उनकी पंद्रह साल की सज़ा अभी भी बाकी है. पार्क को 31 दिसंबर 2021 को रिहा कर दिया जाएगा. जस्टिस मिनिस्ट्री ने अपने बयान में कहा कि ये राष्ट्रीय एकता को सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ये फ़ैसला पार्क के बिगड़ते स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया. पार्क की उम्र 69 साल की हो चुकी है. उन्हें इसी साल तीन बार अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था. साउथ कोरिया के संविधान के अनुसार, राष्ट्रपति के पास क़ैदियों को माफ़ी देने का अधिकार है. साउथ कोरिया में अगले साल राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं. वर्तमान राष्ट्रपति मून जे-इन दोबारा चुनाव नहीं लड़ सकते. उनकी पार्टी और विपक्ष में कांटे की टक्कर है. साउथ कोरिया में अभी भी ऐसे लोग हैं, जो ये मानते हैं कि पार्क को साज़िश के तहत जेल भेजा गया. मून की पार्टी इसका फायदा उठाने की फ़िराक़ में है. ये आकलन कितना सच होगा, ये तो आने वाला समय ही बताएगा.

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