The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Who is Rajendra Pal Gautam who quit as Delhi minister after controversies over Dr Ambedkars 22 vows

आंबेडकर की प्रतिज्ञाएं लेने वाले राजेंद्र पाल गौतम, जिनकी बहन की शादी में हुआ दबंगों का हमला

दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम कहते हैं शादी में हमला उनके लिए आंबेडकर को समझने और जानने का प्वाइंट बन गया.

Advertisement
pic
10 अक्तूबर 2022 (अपडेटेड: 10 अक्तूबर 2022, 10:37 PM IST)
Rajendra Pal Gautam
दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री राजेंद्र पाल गौतम. (फोटो- Twitter/Rajendra Pal Gautam)
Quick AI Highlights
Click here to view more

"पिछले कुछ वर्षों से मैं लगातार देख रहा हूं कि मेरे समाज की बहन-बेटियों की इज्जत लूटकर उनका कत्ल किया जा रहा है, कहीं मूछ रखने पर हत्याएं हो रही हैं, कहीं मंदिर में घुसने पर और मूर्ति छूने पर अपमान के साथ पीट-पीटकर हत्या की जा रही है. यहां तक कि पानी का घड़ा छू लेने पर बच्चों तक की दर्दनाक हत्याएं की जा रही हैं. घोड़ी पर बारात निकालने पर घृणास्पद हमला कर जान तक ली जा रही है. ऐसी जातिगत भेदभाव की घटनाओं से मेरा हृदय हर दिन छलनी होता है."

ये कहना है राजेंद्र पाल गौतम का. जो एक दिन पहले तक दिल्ली के सामाजिक कल्याण, अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री थे. ऊपर की ये पंक्तियां राजेंद्र पाल ने मंत्री पद से इस्तीफा देते हुए लिखी थीं. पूरा विवाद उनके बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह में शामिल होने के बाद शुरू हुआ. इसी कार्यक्रम में डॉक्टर भीम राव आंबेडकर की उन 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराया गया था, जो उन्होंने साल 1956 में बौद्ध धर्म अपनाने के दौरान कहा था.

इन 22 प्रतिज्ञाओं में हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानने और भगवान के अवतार में विश्वास नहीं मानने की बातें हैं. एक प्रतिज्ञा में ये भी कहा गया है कि हिंदू धर्म मानवता के लिए हानिकारक है और ये मानवता के विकास में बाधक है. राजेंद्र पाल गौतम ने भी कार्यक्रम में इन 22 प्रतिज्ञाओं को दोहराया. इसी मुद्दे पर बीजेपी ने राजेंद्र पाल गौतम और आम आदमी पार्टी को घेर लिया. बीजेपी नेताओं ने दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल के इस्तीफे की मांग कर दी.

इसके बाद 9 अक्टूबर को राजेंद्र पाल गौतम ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. गौतम ने कहा कि वो नहीं चाहते कि उनकी वजह से अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी पर किसी तरह की आंच आए. बाबा साहेब की 22 प्रतिज्ञाओं से बीजेपी को आपत्ति है, जिसका इस्तेमाल कर वो गंदी राजनीति कर रही है. उन्होंने कहा कि वे इसी बात से आहत होकर मंत्री पद से इस्तीफा दे रहे हैं.

कौन हैं राजेंद्र पाल गौतम?

राजेंद्र पाल गौतम केजरीवाल कैबिनेट में एकमात्र दलित मंत्री थे. राजनीति में आने से पहले वकालत करते थे. 26 अप्रैल 1968 को दिल्ली के घोंडा इलाके में जन्म हुआ. पांच भाई-बहनों में तीसरे नंबर पर. दिल्ली में ही पले-बढ़े. उनकी मां घोंडा में ही रहती थीं. पिता दिलीप सिंह यूपी के बागपत से थे. दिल्ली में इनकम टैक्स विभाग में नौकरी लगी. राजेंद्र पाल बताते हैं कि उन पर पिता का बहुत ज्यादा प्रभाव है.

राजेंद्र पाल खुद को आंबेडकरवादी बताते हैं. उनका कहना है कि आंबेडकर के कारण मिले शिक्षा के अधिकार की वजह से वो आज यहां तक पहुंचे हैं. हमने उनसे इस विचारधारा से जुड़ने की वजह पूछी. वो 19 अप्रैल 1979 का एक किस्सा सुनाते हैं. राजेंद्र बताते हैं, 

"इस दिन मेरी बड़ी बहन की शादी थी. शादी में बारात निकलते वक्त दबंगों ने हमला किया था. बहुत ज्यादा झगड़ा हुआ था. इसके बाद CRPF के 50 जवान उनके घर के पास रहे. ये केस भी करीब 3-4 साल तक चला था. यही मेरे लिए आंबेडकर को समझने और जानने का एक प्वाइंट बन गया था."

राजेंद्र पाल ने दिल्ली के रामजस कॉलेज से ग्रेजुएशन की डिग्री ली. इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से कानून में स्नातक (LLB) भी किया. उन्होंने श्रम कानून में भी डिप्लोमा की अलग डिग्री ली. इसके अलावा HR मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया. LLM भी कर रहे थे. इस बीच साल 1995 उनकी शादी हो गई. परिवार ने घर की जिम्मेदारी संभालने को बोल दिया. फिर फर्स्ट ईयर में ही LLM की पढ़ाई.

दिल्ली में बौद्ध धम्म दीक्षा समारोह के दौरान राजेंद्र गौतम (फोटो- Rajendra Pal Gautam)
आंबेडकर के बनाए संगठन से जुड़े

साल 1983 में राजेंद्र पाल ने कुछ लोगों के साथ मिलकर घोंडा में डॉक्टर आंबेडकर जागृति संघ बनाया. राजेंद्र बताते हैं कि उनके साथ 25-30 युवा लड़के जुड़े और 1985 से घोंडा इलाके में ही कुछ बच्चों को मुफ्त पढ़ाना शुरू किया. ये सिलसिला कई सालों तक चला. 1987 में भीम राव आंबेडकर के बनाए समता सैनिक दल (SSD) से जुड़े. आंबेडकर ने इस संगठन की स्थापना साल 1924 में की थी. इसी संगठन में अलग-अलग पदों पर काम करते रहे. साल 2002 में वे संगठन के राष्ट्रीय प्रधान महासचिव बनाए गए. साथ में उनकी वकालत भी चलती रही.

जिला अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक केस लड़ते रहे. शुरुआत सिविल के मामलों से की थी. लेकिन बाद में वे क्रिमिनल लॉयर बन गए. राजेंद्र का दावा है कि उनका 99 फीसदी केस जीतने का रिकॉर्ड रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि वो 25 फीसदी केस मुफ्त में लड़ते थे. विधायक बनने से पहले राजेंद्र पाल ने 22 साल वकालत की. मंत्री बनने के बाद लाइसेंस रद्द हो गया. उन्होंने कहा कि अब वो लाइसेंस रिन्यू करवा दोबारा वकालत शुरू करेंगे.

आम आदमी पार्टी में कैसे आए?

साल 2015 की शुरुआत में दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने थे. आम आदमी पार्टी पूरी दिल्ली में अच्छे उम्मीदवारों की तलाश कर रही थी. नवंबर 2014 में AAP के कुछ लोगों ने राजेंद्र पाल गौतम से संपर्क किया. राजेंद्र ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने शामिल होने से मना कर दिया था. लेकिन उनके एक दोस्त प्रदीप नारायण मिश्रा ने दबाव बनाया कि वे पार्टी से जुड़ जाएं. एक महीने बाद 25 दिसंबर 2014 को आम आदमी पार्टी ने घोषणा कर दी कि राजेंद्र पाल सीमापुरी से चुनाव लड़ेंगे. राजेंद्र पाल करीब 49 हजार वोटों से जीत गए.

AAP के शीर्ष नेताओं की तरह राजेंद्र पाल साल 2011-12 में भ्रष्टाचार के खिलाफ दिल्ली में हुए 'आंदोलन' में शामिल नहीं थे. आम आदमी पार्टी की शुरुआत इसी आंदोलन के बाद हुई थी. हालांकि, राजेंद्र पाल बताते हैं कि वे और उनके पार्टनर वकील आंदोलन को देखने जरूर गए थे.

राजेंद्र पाल गौतम (फोटो- Twitter/Mission Jai Bheem)

अगस्त 2016 में दिल्ली के तत्कालीन अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण मंत्री संदीप कुमार का एक विवादित वीडियो सामने आया. अरविंद केजरीवाल ने संदीप कुमार को मंत्री पद से हटा दिया. दिल्ली के 7 मंत्रिपदों में एक अनुसूचित जाति और जनजाति से आने वाले व्यक्ति के लिए आरक्षित है. संदीप कुमार के हटने के बाद राजेंद्र पाल को मंत्रिपद की जिम्मेदारी मिल गई. 

राजेंद्र पाल का कहना है कि मंत्री बनने के बाद उन्होंने दिल्ली में सीवर में सफाईकर्मियों के उतरने पर पूरी तरह से बैन लगाया. इसके अलावा ‘जय भीम मुख्यमंत्री प्रतिभा विकास योजना’ शुरू की गई. इसके तहत सभी जाति-वर्ण के बच्चों को, जिनके परिवार की आय सालाना 8 लाख से कम है, उन्हें सिविल सर्विसेस, इंजीनियरिंग, NEET और दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की मुफ्त कोचिंग दी जा रही है. फिलहाल 15 हजार बच्चे इसका लाभ ले रहे हैं.

गौतम बुद्ध के नाम पर ली शपथ

2020 में आम आदमी पार्टी लगातार दूसरी बार बड़े अंतर से जीतकर सत्ता में वापस लौटी. राजेंद्र पाल भी दोबारा सीमापुरी से जीतकर आए. 16 फरवरी 2020 को केजरीवाल के मंत्रियों ने रामलीला मैदान में शपथ ली थी. मंत्री अक्सर ईश्वर या संविधान की शपथ लेते हैं. राजेंद्र पाल गौतम ने परंपरा से अलग होकर गौतम बुद्ध के नाम की शपथ ली थी.

राजेंद्र पाल गौतम ने हमसे कहा कि वे मानवता को मानते हैं. उन्होंने कहा, 

"मैं सबकी आस्थाओं की कद्र करता हूं. किसी इंसान को किसी की आस्था को ठेस पहुंचाने का अधिकार नहीं है. भारत का संविधान इसकी इजाजत देता है."

5 अक्टूबर को जिस कार्यक्रम के कारण विवाद हुआ, वहां करीब 10 हजार लोगों ने बौद्ध धर्म अपनाया था. लंबे समय से बुद्ध और आंबेडकर के विचारों को मानने वाले राजेंद्र अब तक कागजों पर हिंदू धर्म के तहत ही नामित थे. राजेंद्र पाल ने बताया कि बौद्ध धम्म की शिक्षाओं को तो उन्होंने बहुत पहले अपना लिया था. लेकिन दीक्षा लेने के बाद उन्होंने कहा कि अब वे आधिकारिक रूप से इसकी घोषणा करेंगे. यानी बौद्ध धर्म अपना लेंगे.

वीडियो: नेतानगरी में ऐसी कहानियां जो आपको रोमांच से भर देगी

Advertisement

Advertisement

()