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वो खालिस्तानी, जिसने कहा - "खालिस्तानी झंडा फहराओ, करोड़ों रुपये ले जाओ"

क्या है गुरपतवंत सिंह की कहानी?

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13 अक्तूबर 2022 (अपडेटेड: 13 अक्तूबर 2022, 01:44 PM IST)
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गुरपतवंत सिंह पन्नू को भारत सरकार ने जुलाई 2020 में आतंकवादी घोषित किया था | फाइल फोटो: आजतक
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गुरपतवंत सिंह पन्नू (Gurpatwant Singh Pannun), एक खालिस्तानी आतंकवादी. इसे लेकर इंटरपोल (Interpol) ने भारत को बड़ा झटका दिया है. इंटरपोल ने गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस (Red Corner Notice) जारी करने की भारत की मांग ठुकरा दी है.

आजतक के मुताबिक इंटरपोल का कहना है कि भारत सरकार पन्नू के खिलाफ पर्याप्त सबूत देने में असफल रही, जिस वजह से पन्नू के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं किया जाएगा. भारत की केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) ने एजेंसियों के सभी इनपुट के आधार पर पन्नू के खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की मांग की थी. भारत ने ये याचिका 6 से 7 महीने पहले भेजी थी, लेकिन इंटरपोल की आपत्ति की वजह से इसे अब तक लंबित रखा गया था.

कौन है Gurpatwant Singh Pannun?

गुरपतवंत सिंह पन्नू मूल रूप से पंजाब के अमृतसर जिले के गांव खानकोट का रहने वाला है. उसने पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ में ग्रेजुएशन किया. उसके बाद न्यूयॉर्क के टूरो लॉ कॉलेज से मास्टर्स और यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टफोर्ड से एमबीए की डिग्री ली. इसके बाद वो कनाडा चला गया. आरोप है कि वो पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की मदद से पंजाब में खालिस्तानी मुहिम को फिर से जिंदा करने में लग गया. इसी मकसद से उसने 'सिख फॉर जस्टिस' (SFJ) की स्थापना की. भारत में यह संगठन प्रतिबंधित है. भारत सरकार ने 2019 में इस पर बैन लगाया था.

1 जुलाई 2020 को गुरपतवंत सिंह पन्नू काफी चर्चा में आया था. तब भारत सरकार ने उसे UAPA कानून के तहत आतंकवादी घोषित किया था. जुलाई 2020 में ही पंजाब पुलिस ने अमृतसर और कपूरथला में उसके खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज किया था. उसके बाद NIA ने UAPA एक्ट 1967 की धारा 51 ए के तहत अमृतसर स्थित उसकी अचल संपत्तियों की जब्ती का आदेश दिया था.

किसान आंदोलन के दौरान भड़काने की कोशिश

साल 2020 में किसान आंदोलन के दौरान गुरपतवंत सिंह पन्नू ने पंजाब के किसानों की सहानुभूति हासिल करने की भी कोशिश की. उसने 30 सितंबर, 2020 को 'घेराव मोदी' रैली का आह्वान किया था. पन्नू ने दावा किया था कि दिल्ली की रैली के बाद 'सिख फॉर जस्टिस' पंजाब और हरियाणा के किसानों में 10 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 7.5 करोड़ रुपये बांटना शुरू करेगा. इससे किसानों के आंदोलन मजबूती मिलेगी.

लालच देकर पंजाब के छात्रों को भड़काने की कोशिश

पन्नू पैसों का लालच देकर पंजाब के युवाओं को भटकाने की कोशिश करता रहा है. 2020 में उसने इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर पंजाब के छात्रों से स्कूलों, कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में खालिस्तानी झंडा फहराने की अपील की थी. बदले में उसने छात्रों को iphone-12 देने की बात कही थी. इसी तरह उसने ऐलान किया था कि जो शख्स भारत के स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले पर खालिस्तानी झंडा फहराएगा, उसे 5 लाख डॉलर का नगद इनाम दिया जाएगा. पंजाब में ब्लॉक स्तर और ऐसा करने वालों को उसने 50 हजार रुपये देने का ऐलान किया था.

अप्रैल 2022 में पंजाब की आजादी का ऐलान किया  

अप्रैल 2022 में पन्नू ने अपने यूट्यूब चैनल पर ऐलान किया था कि गुरुग्राम से लेकर हरियाणा के अंबाला तक सभी एसपी और डीसी कार्यालयों में खालिस्तानी झंडा फहराया जाएगा. पन्नू ने 29 अप्रैल 2022 को 'खालिस्तान दिवस' मनाने का ऐलान करते हुए दावा किया था कि इस दिन हरियाणा, पंजाब का हिस्सा होगा और पंजाब को भारत से मुक्त कराया जाएगा. इसके बाद 16 अप्रैल को गुरुग्राम में भी उसके खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज हुआ था.

'इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के मुताबिक गुरपतवंत सिंह पन्नू के खिलाफ 6 जुलाई, 2017 से लेकर 28 अगस्त, 2022 तक आतंकवाद और देशद्रोह सहित विभिन्न धाराओं में कुल 22 मामले दर्ज किए गए हैं. ये सभी मामले केवल पंजाब में दर्ज हैं. 

वीडियो देखें : स्वर्ण मंदिर में छिपे खालिस्तानी उग्रवादियों का कैसे किया सफ़ाया?

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