भारत में सबसे सख्त सुरक्षा के पहरे में रहने वाले प्रधानमंत्री मोदी का काफिला जिसतरह एक फ्लाईओवर पर रुका रहा, उसमें गलती आखिरी किसकी थी. पीएम मोदी को पंजाब केफिरोजपुर में एक रैली करनी थी. लेकिन हुसैनवाला शहीद स्मारक जाने के रास्ते मेंप्रदर्शनकारियों ने रास्ता रोक लिया था. इसके चलते पीएम मोदी को अपने काफिले समेत15 से 20 मिनट तक फ्लाइओवर पर इंतजार करना पड़ा था. काफिला यहीं से लौट गया और पीएममोदी बिना रैली किए ही वापस दिल्ली लौट आए थे. इसके बाद केंद्रीय गृहमंत्रालय नेपंजाब सरकार से विस्तृत रिपोर्ट के साथ सुरक्षा में हुई चूक की जिम्मेदारी तय करनेऔर सख्त कार्रवाई करने को कहा था. अपने बचाव में पंजाब के मुख्यमंत्री चरणजीत सिंहचन्नी ने खेद तो प्रकट किया था, लेकिन साथ में ये भी जोड़ दिया था कि पीएम ने सड़करास्ते से जाने का फैसला अचानक किया था और इसीलिए ये पंजाब पुलिस की विफलता कानजीता नहीं था. इस मामले में दो बड़े पक्ष हैं, जिनपर हम बारी बारी से बात करेंगे.पहला है भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा. गलती चाहे स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप SPGकी हो या पंजाब पुलिस की. इस मामले में ज़िम्मेदारी तय होना बहुत ज़रूरी है. दूसरापक्ष है इस मुद्दे पर हो रही राजनीति. आइए इन दोनों पक्षों पर बारी बारी से गौरकरें. हम सब ये जानते हैं कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा कीज़िम्मेदारी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप एसपीजी की है. जब प्रधानमंत्री इंदिरा गांधीकी हत्या उनके ही सुरक्षाकर्मियों ने कर दी, तब ये फैसला लिया गया कि एक ऐसी एजेंसीकी आवश्यकता है, जिसका सिर्फ एक काम हो - भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा. इसएजेंसी का नाम पड़ा स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप SPG. इसने 1985 से काम करना शुरू करदिया था. एसपीजी का मोटो है ''शौर्यम समर्पणम सुरक्षणम.'' एसपीजी के गठन के बाद सेआज तक उसका रिकॉर्ड बेदाग है. ऐसा नहीं है कि कभी कोई चूक नहीं हुई. लेकिन हर बारचूक से इस दस्ते ने आगे के लिए सबक लिए हैं. 2 अक्टूबर 1986 को प्रधानमंत्री राजीवगांधी और राष्ट्रपति ज्ञानी ज़ैल सिंह राजघाट पर बापू को श्रद्धा सुमन अर्पित करनेपहुंचे थे. तब करमजीत सिंह नाम के एक शख्स ने छिपकर थोड़े थोड़े अंतराल पर तीनगोलियां चलाई थीं. लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ था और अंततः करमजीत सिंह को पकड़ लियागया था. SPG के इतिहास में ये निर्विवाद रूप से सबसे ''क्लोज़ कॉल'' था. 1987 मेंराजीव गांधी पर फिर श्रीलंका में हमला हुआ था, जब वो गार्ड ऑफ ऑनर का निरीक्षण कररहे थे. एसपीजी आज जिस तरह पीएम की सुरक्षा करती है, वो ऐसे ही अनुभवों से तैयारहुई है. और इसी का नतीजा है कि आज तक एसपीजी की सुरक्षा में कोई हताहत नहीं हुआ.एसपीजी की फिलॉसफी है ''ज़ीरो एरर'' और कल्चर ऑफ एक्सीलेंस. माने कोई चूक बर्दाश्तनहीं और हमेशा अपने प्रोटेक्टी की सुरक्षा के सर्वश्रेष्ठ परंपराओं का पालन. आम तौरपर तस्वीर के फ्रेम में अलग बगल नज़र आने वाले एसपीजी अधिकारियों का कैसे खतरों सेपाला पड़ता रहता है, ये आप उन्हें मिले अलंकरणों से जानिए. 1 शौर्य चक्र, 43President medal, 323 police medals for meritorious service. ये सारी बातें आपकोहमने इसलिए बताईं ताकि आप समझ सकें कि हम जिस एजेंसी से जवाब मांग रहे हैं, उसकापिछला रिकॉर्ड क्या है. हम ये जानना चाहते हैं कि ये कब तय हुआ कि प्रधानमंत्रीहुसैनवाला जाएंगे. इस बारे में एसपीजी की तैयारी क्या थी? जब हेलिकॉप्टर से जानासंभव नहीं रहा, तो फिर अपने VIP को हवाई अड्डे से बाहर निकालते हुए क्या SPG ने येमालूम किया था कि रास्ता सैनिटाइज़ कर लिया गया है. माने वो पूरी तरह से सुरक्षितहै SPG एडवांस्ड सेक्योरिटी लायज़निंग करती है. इसके लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो औरस्थानीय पुलिस के साथ बैठ कर तय किया जाता है कि कार्यक्रम क्या है. रूट कौनसाहोगा. अगर कोई आपात स्थिति होगी, तो VIP को कहां ले जाया जाएगा. और वहां जाने कारास्ता कौनसा होगा. हमेशा एक से ज़्यादा रूट रखे जाते हैं. ताकि एक बंद होने परदूसरे रूट का इस्तेमाल किया जा सके. ये इंतज़ाम कैसे किए जाएंगे, ये एसपीजी की ब्लूबुक से तय होता है. सब तय होने के बाद ASL के मुताबिक ही सभी एजेंसिया कार्यक्रम केदिन अपना अपना काम करती हैं. स्थानीय पुलिस का काम होता है एसपीजी के काम में मददकरना. और उसके घेरे से बाहर सुरक्षा के और चक्र बनाना. इसीलिए ये जानना ज़रूरी हैकि क्या पंजाब पुलिस ने हुसैनवाला तक के रास्ते को क्लीयर बताया था? अगर उन्होंनेऐसा किया था, तो ये बहुत बड़ी चूक थी. अगर पंजाब पुलिस ने SPG को बता दिया था किरास्ता क्लीयर नहीं है, तो सारी गलती एसपीजी की हो जाएगी. क्योंकि तब एसपीजी को उसफ्लाईओवर तक जाना नहीं चाहिए था. ये मालूम करना बहुत आसान है कि 5 जनवरी को एसपीजीऔर पंजाब पुलिस के बीच क्या बात हुई. अगर कोई प्लान अचानक बना भी, तो उसे बनाने मेंदोनों एजेंसियों ने अपना काम ठीक से किया कि नहीं. और जब इन प्रश्नों का जवाब आजाएगा, तब एक सख्त कार्रवाई की आवश्यकता होगी. फिलहाल ये खबरें भी आ रही हैं किकेंद्र सरकार फिरोज़पुर मामले में SPG एक्ट 1988 के तहत कार्रवाई करने पर विचार कररही है. अगर ऐसा हुआ तो पंजाब पुलिस को चंडीगढ़ से लेकर नई दिल्ली तक ढेर सारे जवाबदेने पड़ जाएंगे. आज पंजाब सरकार ने इस मामले की जांच के लिए दो सदस्यों वाली एकउच्चस्तरीय जांच कमेटि का गठन किया है. इसमें रिटायर्ड जस्टिस महताब सिंह गिल केसाथ गृह और न्याय मामलों के प्रधान सचिव अनुराग वर्मा शामिल हैं. यह कमेटी तीन दिनके भीतर अपनी रिपोर्ट सौपेंगी. पंजाब से आने वाले कांग्रेस नेता मनीष तिवारी नेपूरे मामले को दुर्घटनापूर्ण बताते हुए कहा यह पॉलिटिकल फुटबॉल वाला मामला नहीं है.इसकी जांच हाई कोर्ट के सिटिंग जज द्वारा होनी चाहिए. कांग्रेस की कार्यकारीअध्यक्षा सोनिया गांधी ने भी पंजाब के मुख्यमंत्री से बात करके मामले में कार्रवाईके लिए कहा है. जांच से इतर पीएम की सुरक्षा में हुई चूक की ये घटना अब सुप्रीमकोर्ट तक भी जा पहुंची है. आज इस संबंध में एक याचिका डालकर सर्वोच्च अदालत से पीएमकी सुरक्षा में हुई चूक पर गंभीरता से जांच करने की बात कही गई है. lawyers voiceसंगठन की ओर से वरिष्ठ वकील मनिंदर सिंह ने ये याचिका लगाई है. और मामला उठाया गयाहै चीफ जस्टिस एन वी रमना की बेंच के सामने. इस याचिका में जांच के अलावा पंजाबपुलिस के बंदोबस्त से संबंधित सबूतों को बठिंडा जिला जज के कब्जे में देने कानिर्देश जारी करने की मांग भी की गई है. इसपर मुख्य न्यायधीश एन वी रमना नेयाचिकाकर्ता से कहा कि वह केंद्र सरकार और पंजाब सरकार को याचिका की कॉपी सौंपें.सुप्रीम कोर्ट इस मामले में 7 जनवरी को सुनवाई करने जा रहा है. पंजाब में हुईसुरक्षा चूक मामले पर आज दोपहर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने प्रधानमंत्री नरेन्द्रमोदी से मुलाकात की. इस मुलाकात की जानकारी राष्ट्रपति के आधिकारिक ट्विटर अकाउंटपर दी गई. ट्वीट के मुताबिक, राष्ट्रपति कोविंद ने घटना की जानकारी लेते हुएसुरक्षा चूक पर चिंता व्यक्त की. यहां तक बात हो गई तमाम तकनीकी पहलुओं की. अब आतेहैं राजनीति पर. पंजाब के मुख्यमंत्री ने कल ही कह दिया था कि कुर्सियां खाली रहगईं, इसमें वो क्या कर सकते हैं. लेकिन कल से लेकर आज तक कांग्रेस को अनमने ढंग सेही सही, ये मानना पड़ा है कि पीएम की सुरक्षा के मुद्दे पर वो अकेली पड़ गई है.पंजाब में किसान आंदोलन की पृष्ठभूमि में किसी नेता की रैली को लेकरप्रदर्शनकारियों का रोष और विरोध समझ आ सकता है. लेकिन क्या पीएम के काफिले को किसीफ्लाइओवर पर रोका जा सकता है, इस सवाल का जवाब हां में कोई नहीं दे सकता. अब आतेहैं भाजपा पर. भाजपा के हाथ रैली नहीं , लेकिन वो इस घटना को भुनाने में पीछे नहींरहना चाहती. कल ही एएनआई ने हवाईअड्डे के अधिकारियों के हवाले से कह दिया था किजाते हुए प्रधानमंत्री ने ये कहा कि सीएम चन्नी को शुक्रिया कहिए कि मैं ज़िंदा आगया. इसके बाद तो भाजपा बात को हत्या की साज़िश की तक ले गई. आज देश में जगह जगहपीएम के लिए महामृत्युंजय जाप किया गया. इस कवायद का पंजाब चुनाव में कितना फायदामिलेगा, ये देखना होगा.