# आज तक किसी भी सरकार ने हैंडरसन- ब्रुक्स रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया.# नेहरू और तब के आर्मी चीफ के मामले में रिपोर्ट चुप है.# सभी ने अनुमान लगाया कि था कि चीन आक्रमण नहीं करेगा.# नेहरू द्वारा अपनाई गई फॉरवर्ड पॉलिसी को माना जाता है इसके लिए ज़िम्मेदारएनडीए के राष्ट्रपति पर के कैंडिडेट घोषित किए जाने के साथ ही रामनाथ कोविंदसुर्खियों में आ गए हैं. तमाम लोग इस बात के भी कयास लगा रहे हैं कि एक राष्ट्रपतिके रूप में आखिर उनका पहला काम क्या होगा. दावे से तो नहीं कहा जा सकता लेकिन एकबात का अनुमान लगाया जा सकता है.बात 1997 की है. संयुक्त मोर्चा की सरकार थी और मुलायम सिंह रक्षा मंत्री थे. उससमय रामनाथ कोविंद राज्यसभा से सांसद थे. कोविंद ने राज्य सभा में मांग की किहैंडरसन-ब्रुक्स रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए, ताकि 1962 के भारत-चीन युद्ध मेंभारत की हार के कारणों का पता चले. लेकिन मुलायम सिंह यादव ने यह कह कर रिपोर्ट कोसार्वजनिक करने से मना कर दिया कि यह बहुत ही संवेदनशील मुद्दा है.क्या है हैंडरसन-ब्रुक्स रिपोर्टः1962 में भारत चीन युद्ध में भारत को मुंह की खानी पड़ी थी. युद्ध खत्म होने के बादभारत सरकार ने एक रिपोर्ट तैयार करवाई. लेकिन रिपोर्ट आने के बाद उसे रक्षामंत्रालय ने क्लासीफाइड कह के आलमारी में बंद कर दिया और सार्वजनिक नहीं किया. कारणबताया गया कि ये काफी संवेदनशील मुद्दा है. तब से लेकर अब तक तमाम सरकारें बनतीरहीं, चाहे वो बीजेपी रही हो या कांग्रेस लेकिन किसी ने भी इस रिपोर्ट को सार्वजनिकनहीं किया.इस रिपोर्ट को इंडियन आर्मी के दो अधिकारियों लेफ्टिनेंट जनरल हेंडरसन ब्रुक्स औरब्रिगेडियर जनरल परमिंदर सिंह भगत ने तैयार किया इसीलिए इसे हेंडरसन ब्रू्क्स-भगतरिपोर्ट भी कहते हैं.एक ऑस्ट्रेलियन लेखक और पत्रकार नेविल मैक्सवेल के हाथ मार्च 2014 में इस रिपोर्टका कुछ अंश लग गए. मैक्सवेल उस वक्त ''द टाइम्स ऑफ लंदन'' के लिए काम करते थे औरवॉर के समय दिल्ली में रहकर इन्होंने रिपोर्टिंग की थी. इसके बाद 1970 में मैक्सवेलने ''इंडियाज़ चायना वॉर'' के नाम से एक किताब भी लिखी जिसने भारत सरकार को काफीनाराज़ किया क्योंकि उस किताब में लिखा गया था कि सरकार के गलत फैसलों के कारण हीभारत, चीन से हार गया. खैर, इस रिपोर्ट को बाद में उन्होंने अपनी वेबसाइट पर इसेअपलोड कर दिया. उनकी मानें तो इंडिया की ''फॉरवर्ड पॉलिसी' के कारण चीन ने चिढ़ केभारत पर आक्रमण किया और पुरानी हो चुकी इंटेलिजेंस इस बात का पता नहीं लगा पाई. जबभी दो देशों के बीच बॉर्डर डिस्प्यूट होता है और कोई एक देश विवादित एरिया में अंदरघुसने की या उसे हड़पने की कोशिश करता है तो इसे ''फॉरवर्ड पॉलिसी'' कहते हैं. किसीभी नेता, यहां तक कि तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू को भी इस बात का अनुमान नहीं थाकि चीन भारत पर आक्रमण कर देगा. इस युद्ध में करीब 2000 भारतीय सैनिक मारे गए और4000 लोगों को कैद कर लिया गया था.किन लोगों को ठहराया गया है दोषी?इस रिपोर्ट के जारी कुछ अंशों के आधार पर इन लोगों को ज़िम्मेदार ठहराया गया है-1.कृष्णा मेनन, रक्षा मंत्रीःरिपोर्ट के अनुसार उस वक्त के रक्षा मंत्री कृष्णा मेनन ने सेना के अधिकारियों केसाथ जितनी भी बैठकें कीं उसमें जिन भी बिंदुओं पर चर्चा हुई उसका रिकॉर्ड अपने पासनहीं रखा. इसके बहुत भयंकर परिणाम हुए क्योंकि युद्ध के दौरान जो भी निर्णय लिए गएउसके लिए पूरी तरह से किसी को भी ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सका. उत्तरदायित्व नसिद्ध होने के कारण जो भी फैसले लिए गए वो सभी उतनी गंभीरता से नहीं लिए गए जितनीज़रूरत थी.2.बी.एम.मलिक, डायरेक्टर इंटेलीजेंस ब्यूरोःरिपोर्ट में मलिक औऱ इंटेलीजेंस के ऊपर आरोप लगाया गया है कि उस दौरान जो सूचनाएंइंटेलीजेंस ने जुटाईं वो बहुत ही कामचलाऊ तरीके से जुटाई गईं और इनका सूचनाओं काविश्लेषण भी ठीक ढंग से नहीं किया गया. इंटेलीजेंस ब्यूरो को लग रहा था कि भारतीयसेना द्वारा सीमा-पार नये-नये पोस्ट बनाए जाने के बावजूद चीन किसी भी हालत में भारतपर हमला नहीं करेगा. इस मामले में डायरेक्टर जनरल ऑफ इंटेलीजेंस ने मौखिक रूप से जोअनुमान लगाए उसी पर विश्वास कर लिया गया.3.लेफ्टिनेंट जनरल बी.एम. कौल, चीफ ऑफ जनरल स्टाफःरिपोर्ट, पूर्वी क्षेत्र में भारतीय सेना की बुरी हार के लिए लेफ्टिनेंट जनरल बीएमकौल को अप्रत्यक्ष रूप से ज़िम्मेदार मानती है. कौल को इस मामले में बरी नहीं कियाजा सकता क्योंकि वो उस समय चीफ ऑफ स्टाफ थे और उन्होंने युद्ध के समय सेना के लिएजिस तरह के लक्ष्य निर्धारित किए थे उसे पूरा कर पाना लगभग असंभव था. जनरल कौल भीसरकार की इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि चीनी सेना आक्रमण नहीं करेगी. उस दौरान NEFAयानी नॉर्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (अभी के अरुणांचल प्रदेश) के एरिया के लिए 4 सैन्यटुकड़ियां बनाई गई थीं जिसकी कमान कौल को दी गई और चीफ ऑफ स्टाफ का पद खाली हो गया.इस 4 सैन्य टुकड़ियों को बनाने के पीछे उद्देश्य था कि युद्ध से संबंधित मामलों मेंज़ल्दी निर्णय लिया जा सके और तेज़ी से ऑपरेशन किया जा सके. हालांकि जिसकी भी सेनाके ऑपरेशन के तौर तरीकों के बारे में थोड़ी भी जानकारी है वो इस फैसले को सही नहींठहरायेगा.4.एम.जे. देसाई, विदेश सचिवः22 सितंबर 1962 को रक्षा मंत्री के साथ मीटिंग में एम.जे. देसाई ने भी यही बात कहीकि चीन कभी हमला नहीं करेगा, ज़्यादा से ज़्यादा वो एक या दो पोस्ट को कैप्चर करसकता है.5.ब्रिगेडियर डी.के. पालित, डायरेक्टर मिलिट्री ऑपरेशनःब्रिगेडियर डी.के. पालितअगस्त 1962 में मिलिट्री ऑपरेशन के डायरेक्टर ब्रिगेडियर डी.के.पालित ने कहा कि चीनभारत की फॉरवर्ड पॉलिसी पर प्रतिक्रिया नहीं करेगा. उनका अनुमान था कि चीन इसस्थिति में नहीं है कि वो भारत से युद्ध कर सके.6. जवाहर लाल नेहरू, प्रधानमंत्री-रिपोर्ट वैसे तो नेहरू के बारे में कुछ नहीं कहती लेकिन नेहरू की फॉरवर्ड पॉलिसी परसवालिया निशान लगाती है, जिसकी वजह से भारतीय सेना ने इंडिया-चीन को अलग करने वालीरेखा मैकमोहन लाइन से पार चीन की ओर काफी तक अंदर कई पोस्ट बना लिया था.7. जनरल वी.एम. थापर, चीफ ऑफ जनरल स्टाफ-आर्मी चीफ का ज़िक्र रिपोर्ट में सिर्फ एक जगह है जहां वो रक्षामंत्री कृष्णा मेननकी ऑफिस में हुई मीटिंग में शरीक होते हैं. जनरल थापर इस मीटिंग में कहते हैं किचीन भारत द्वारा अपनाई जाने वाली फॉरवर्ड पॉलिसी पर लद्दाख में प्रतिक्रिया कर सकताहै और गलवान वैली को कैप्चर करके 1960 की क्लेम लाइन तक पहुंच सकता हैं. 1960 मेंचीन ने भारत के सामने प्रस्ताव रखा था कि भारत अक्साई चिन एरिया को चीन का हिस्सामान ले बदले में चीन अरुणांचल प्रदेश को भारत का हिस्सा मान लेगा.प्रधानमंत्री और आर्मी चीफ की भूमिका पर चुप है रिपोर्टःरिपोर्ट में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और आर्मी चीफ जनरल वी.एम. थापरकी भूमिका के बारे में कोई ज़िक्र नहीं है. हालांकि इस घटना से नेहरू और थापर कोकाफी झटका लगा. जिस दिन चीन ने युद्ध के समाप्ति की घोषणा की उसके अगले दिन थापर ने22 नवंबर 1962 को त्यागपत्र दे दिया और इस घटना के दो साल नेहरू की मृत्यु हो गई.खैर, अब अगर रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति बनते हैं तो राष्ट्रपति बनने के साथ ही वोतीनों सेनाओं के सर्वोच्च कमांडर भी बन जायेंगे जिससे वो इस रिपोर्ट को मंगवाकर पढ़भी सकते हैं और सार्वजनिक भी कर सकते हैं.--------------------------------------------------------------------------------वीडियो भी देखें- https://www.youtube.com/watch?v=pbbI6e9hUXshttps://www.youtube.com/watch?v=QfvdYOzUoQsये भी पढ़ेंःप्रधानमंत्री मोदी को क्यों कहना पड़ा, 'अब जाओ अम्मा!'राष्ट्रपति पद की रेस में शामिल है ये आदमी, क्या सोनिया गांधी समर्थन देंगी?शमी से "बाप कौन है" पूछने वाला वीडियो देखा होगा, अब उसके बाद का वीडियो देख लोयूपी में आम लोग टेंडर न डाल पाएं, ये साजिश है या लापरवाही?