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अमेरिका के दो राष्ट्रपतियों के चहेते सेक्स एब्यूज़र ने बचने के लिए क्या तिकड़म अपनाई?

जेफ़्री ने ज़मानत पर छूटने के लिए 4 हज़ार करोड़ रुपये का बॉन्ड भरने का ऑफ़र दिया था

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21 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 21 दिसंबर 2021, 05:47 PM IST)
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जेफ़्री ने ज़मानत पर छूटने के लिए 4 हज़ार करोड़ रुपये का बॉन्ड भरने का ऑफ़र दिया था
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आपने पिरामिड स्कीम का नाम सुना है? ये एक बिजनेस मॉडल है. जिसमें नए लोगों को जोड़कर पैसा कमाने का सपना दिखाया जाता है. एक ने दो को जोड़ा. अगले स्टेप में वे दो लोग चार को जोड़ेंगे. चार से आठ. आठ से सोलह और ये गिनती बढ़ती रहती है. तब तक, जब तक कि नए लोग जुड़ते रहें. फिर एक दिन पोल खुल जाती है. पिरामिड भरभरा कर गिर जाता है. पैसे वाले पिरामिड स्कीम आज भी चल रहे हैं. अगर हम बताएं कि एक देश में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का पिरामिड चल रहा था, तो आपको शायद ही यकीन होगा. लेकिन ये हुआ है. वो भी, सभ्यता का सर्टिफ़िकेट बांटने वाले देश अमेरिका में. इस कांड का मुख्य आरोपी अमेरिका के दो-दो राष्ट्रपतियों का चहेता था. वो सालों तक अपने गुनाहों से बचता रहा. फिर एक दिन वो पकड़ में आ गया. तब उसने नया दांव चला. ज़मानत पर छूटने के लिए चार हज़ार करोड़ रुपये का बॉन्ड भरने का ऑफ़र दिया. ये कहानी अमेरिकन फ़ाइनेंशर जेफ़्री एपस्टीन की है. राजनीति और सिनेमा की दिग्गज हस्तियों का दोस्त. आलीशान प्रॉपर्टीज़ का मालिक. शर्मीला लेकिन शातिर व्यक्तित्व. इन सबके अलावा, उसके साथ एक और विशेषण जुड़ता है. कुख़्यात आरोपी. दर्जनों नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण का. जेफ़्री एपस्टीन और उसके पिरामिड स्कीम की पूरी कहानी क्या है? सबूत और गवाह होने के बावजूद वो कैसे कानून से बचता रहा? आख़िर में उसका क्या हुआ? और, आज हम ये सब क्यों सुना रहे हैं? अक्टूबर 2002 की बात है. न्यू यॉर्क मैगज़ीन में एक प्रोफ़ाइल छपी. इसका टाइटल था, Jeffrey Epstein: International Moneyman of Mystery जेफ़्री एपस्टीन: एक रहस्यमयी धनकुबेर प्रोफ़ाइल अंग्रेज़ी में थी. हम उसके इंट्रो का हिंदी अनुवाद बता रहे हैं. इंट्रो में लिखा था, उसके पास बेहिसाब पैसा है, एरोप्लेन्स का कारवां है और महिलाओं के मामले में उसकी नज़र पारखी है. वो नोबेल विजेता वैज्ञानिकों को टक्कर देता है. दुनियाभर के वित्तीय बाज़ारों को लेकर उसका दिमाग हमेशा चलता रहता है. जब से बिल क्लिंटन ने अपने नए दोस्त के आलीशान बोइंग 727 पर केविन स्पेसी और क्रिस टकर के साथ अफ़्रीका का दौरा किया है. तब से ये सवाल हर किसी के मन में घूम रहा है, आख़िर, ये जेफ़्री एपस्टीन है कौन? मैगज़ीन इस सवाल का जवाब तलाश रही थी. इसके लिए उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क किया. ट्रंप इंटरव्यू के 14 बरस बाद अमेरिका के राष्ट्रपति बने. उस समय ट्रंप ने कहा था, मैं जेफ़ को पंद्रह सालों से जानता हूं. वो कमाल का आदमी है. मेरी ही तरह वो भी ख़ूबसूरत महिलाओं का दीवाना है. खासकर कम उम्र की महिलाओं का. प्रोफ़ाइल छपने के बाद दो चीज़ें हुई. पहली, अमेरिकी जनता जेफ़्री एपस्टीन के बारे में जानने लगी. उससे पहले तक वो एक रहस्यमयी शख़्स था. हर कोई उसके बारे में जानना चाहता था. लेकिन पब्लिक में आने में उसकी कोई दिलचस्पी नहीं थी. दूसरी चीज़ ये हुई कि 2003 में जेफ़्री ने न्यू यॉर्क मैगज़ीन को खरीदने की कोशिश की. हालांकि, डील फ़ाइनल नहीं हो पाई. एक बार चर्चा में आने के बाद उसे छपने में मज़ा आने लगा. उसकी शोहरत, उसके डोनेशन्स, उसकी पार्टीज़ को लेकर ख़ूब ख़बरें छपीं. वो गॉसिप न्यूज़ के संपादकों का पसंदीदा बन चुका था. फिर आया साल 2005. फ़्लोरिडा पुलिस के पास एक फ़ोन आया. 14 साल की एक बच्ची के मां-बाप का. उन्होंने डरे-सहमे लहजे में अपनी शिकायत दर्ज कराई. आरोप था कि पाम बीच के एक बंगले में उनकी बच्ची का यौन शोषण हुआ है. पाम बीच दक्षिणी फ़्लोरिडा में पड़ता है. ये अमेरिका के सबसे पॉश इलाकों में से एक है. पुलिस ने फ़ोन कॉल के आधार पर पड़ताल की. पता चला कि ये बंगला जेफ़्री एपस्टीन का है. पुलिस सर्च वॉरंट लेकर पहुंची. वहां उन्हें बहुत सारी आपत्तिजनक पेंटिंग्स, सीडीज़ और तस्वीरें मिली. जेफ़्री को कटघरे में खड़ा करने के लिए सबूत पर्याप्त थे. लेकिन ये पूरे नहीं थे. असल में, पाम बीच पुलिस डिपार्टमेंट में किसी ने रेड की ख़बर पहले ही लीक कर दी थी. जेफ़्री ने लगभग पूरा डेटा हटवा दिया था. हालांकि, उसकी ये चाल नाकाम रही. पुलिस की जांच में सामने आया कि ये सिर्फ़ ऊपरी परत है. अगर इसको हटाया जाए तो बहुत सारे राज़ खुलेंगे. उन्होंने एक-एक कर परतें हटानी शुरू कीं. तीस से अधिक महिलाओं ने अपना बयान दर्ज़ कराया. बयान सुनने के बाद एक पैटर्न का खुलासा हुआ. ये पैटर्न क्या था? सारी की सारी पीड़िताएं यौन शोषण के समय नाबालिग थीं. कॉलेज जाने वालीं. वे मध्यम-वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखतीं थी. उन्हें ज़ेबखर्च के लिए एक्स्ट्रा पैसों की ज़रूरत थी. लड़कियों को जेफ़्री के बारे में कॉलेज में पता चला था. किसी दोस्त के ज़रिए. क्या पता चलता था? पाम बीच पर एक बंगला है. वहां एक अधेड़ उम्र का आदमी रहता है. वो कॉलेज की लड़कियों को मसाज के लिए दो सौ डॉलर देता है. लड़कियां इसके लिए तुरंत हामी भर देतीं थी. फिर उसकी दोस्त उस लड़की को बंगले तक छोड़कर लौट आती. लड़की को मसाज वाले कमरे में ले जाया जाता था. वहां जेफ़्री सिर्फ़ तौलिया लपेटे लेटा होता था. वो मसाज का इशारा करता. जब मसाज खत्म हो जाता. तब वो ग़लत तरीके से इधर-उधर छूने लगता था. लड़कियों के पास वहां से निकलने का कोई ऑप्शन नहीं होता था. उन्हें चुपचाप सब सहना पड़ता था. काम खत्म करने के बाद जेफ़्री उन्हें पैसे के साथ-साथ एक ऑफ़र देकर वापस भेजता था. ऑफ़र क्या होता था? अगर तुमने एक और लड़की को यहां आने के लिए राज़ी किया तो कमीशन मिलेगा. दो सौ डॉलर का. कच्ची उम्र, पैसे का लालच और जेफ़्री की शख़्सियत. लड़कियों के लिए इससे पार पाना नामुमकिन होता गया. जेफ़्री ने इसका भरपूर फायदा उठाया. वो इन लड़कियों को अपने अमीर दोस्तों के पास भेजने लगा. इसके बदले में वो अपना काम निकलवाता था. इन अमीर दोस्तों में से एक ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रू भी थे. वर्जीनिया रॉबर्ट्स नाम की एक सर्वाइवर ने आरोप लगाया कि जेफ़्री ने उसे प्रिंस एंड्रू को खुश करने के लिए विवश किया था. प्रिंस एंड्रू ब्रिटेन की महारानी एलिज़ाबेथ के बेटे हैं. वो ब्रिटिश रॉयल फ़ैमिली से ताल्लुक रखते हैं. इस आरोप पर उनका बयान आया कि वो वर्जीनिया से कभी मिले ही नहीं. रेप की बात बिल्कुल झूठी है. इसके कुछ दिनों के बाद प्रिंस एंड्रू का एक फ़ोटो लीक हुआ. इसमें वो वर्जीनिया के साथ दिख रहे हैं. एक अपार्टमेंट में. प्रिंस एंड्रू का हाथ वर्जीनिया की कमर पर है. वर्जीनिया के मुताबिक, ये तस्वीर 2001 में लंदन में खींची गई थी. उस वक़्त उसकी उम्र 18 साल से कम थी. उसका आरोप है कि प्रिंस एंड्रू ने कम-से-कम तीन मौके पर उसका यौन शोषण किया. नवंबर 2019 में दिए एक इंटरव्यू में प्रिंस ने कहा कि वो तस्वीर के बारे में कुछ नहीं कह सकते. इसी तस्वीर में एक तीसरी शख़्स भी दिखती है. किनारे पर. घिलेन मैक्सवेल. ये नाम याद रखिएगा. इसका ज़िक्र फिर से आएगा. अभी हम जेफ़्री पर वापस लौटते हैं. पाम बीच पुलिस और FBI की जांच के बाद उसके ऊपर केस शुरू हुआ. लेकिन 2008 में केस का दी एंड हो गया. पुलिस के पास 36 लड़कियों के बयान थे. जेफ़्री ने कुछ गुनाह कबूल भी कर लिए थे. लेकिन स्टेट प्रासीक्यूटर्स ने उन बयानों की गंभीरता को नज़रअंदाज़ किया. उन्होंने केस बंद करने की डील कर ली. इस डील के तहत, जेफ़्री को सिर्फ़ 18 महीने की जेल हुई. इसमें भी उसे काम के लिए बाहर जाने की इजाज़त थी. तेरह महीने बाद ही उसे जेल से रिहा कर दिया गया. इस विवादित डील को करवाने वालों में से एक थे, अलेक्जेंडर अकोस्टा. उस समय वो फे़डरल प्रॉसीक्यूटर की भूमिका में थे. 2019 में मियामी हेराल्ड ने इस डील में एक चौंकाने वाला खुलासा किया. मियामी हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, जेफ़्री की सताई लड़कियों की संख्या कम-से-कम 80 है. अकोस्टा पर आरोप लगा कि उन्होंने मामले की गंभीरता को छिपाया. उस समय तक अकोस्टा ट्रंप सरकार में मंत्री बन चुके थे. रिपोर्ट के बाद हंगामा मचा. दबाव बना तो अकोस्टा को पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा. इस्तीफ़े से पहले तक ट्रंप ये कहते फिर रहे थे कि अकोस्टा बहुत शानदार आदमी है. उसने हार्वर्ड से पढ़ाई की है. जैसे ही इस्तीफ़े की बात आई, ट्रंप ने कहा कि हायर करने से पहले मैं इसके बारे में नहीं जानता था. उधर, जेफ़्री पहली बार छूटने के बाद अपने काम पर वापस लौट गया. उसका एलीट पार्टियों में आना-जाना जारी रहा. उसकी अमेरिका के कई रईस इलाकों में बंगले थे. वो वहां पर मज़े करता रहा. उधर, पीड़िताएं न्याय के लिए संघर्ष करतीं रही. फिर मीटू आंदोलन की शुरुआत हुई. महिलाओं ने मुखर होकर बोलना शुरू किया. कई और महिलाओं ने जेफ़्री की कारस्तानी के ख़िलाफ़ अपनी आवाज़ बुलंद की. उसके ऊपर केस दर्ज़ कराए. नतीजा, 06 जुलाई 2019 को उसे न्यू जर्सी में गिरफ़्तार कर लिया गया. फिर प्रॉसीक्यूटर्स ने उसके न्यू यॉर्क वाले घर को खंगाला. वहां उन्हें चाइल्ड पोर्नोग्राफ़ी का जख़ीरा मिला. इसके अलावा भी बहुत सारे आपत्तिजनक सामान ज़ब्त किए गए. उसके घर के हर हिस्से में सीसीटीवी कैमरा लगा था. बाथरूम से लेकर बेडरूम तक. जेफ़्री ज़मानत के लिए अपनी पूरी संपत्ति दांव पर लगाने के लिए तैयार था. लेकिन कोर्ट ने ज़मानत देने से मना कर दिया. न्यू यॉर्क वाले घर में फ़र्ज़ी पासपोर्ट भी मिले थे. उसने मौका मिलते ही फरार होने की पूरी तैयारी कर रखी थी. उसे वो मौका नहीं मिला. वहीं पर तय हो चुका था कि जेफ़्री की बाकी ज़िंदगी जेल में गुजरेगी. ट्रायल 2020 की गर्मियों में शुरू होने वाला था. लेकिन 10 अगस्त 2019 को फिर से एक सदमा लगा. ख़बर चली कि जेफ़्री को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. उसके गले में फ़्रैक्चर की बात पता चली. कुछ देर बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया. जेल अधिकारियों ने कहा कि जेफ़्री ने सुसाइड किया है. इसके बाद साज़िश वाली थ्योरियों का तांता लग गया. जिस जेल में जेफ़्री को रखा गया था, उसमें चौबीसों घंटे निगरानी होती थी. सेल में सीसीटीवी कैमरे लगे हुए थे. हर आधे घंटे में गार्ड्स जाकर पड़ताल करते थे. लेकिन उस दिन सारे कैमरे ख़राब थे और गार्ड्स झपकियां ले रहे थे. एक थ्योरी ये भी थी कि जेफ़्री का खेल खत्म हो चुका था. उसके पास कई नामी-गिरामी लोगों से जुड़े सबूत थे. वो चाह लेता तो बहुतों की पद-प्रतिष्ठा को धूमिल कर सकता था. इसलिए, उन्होंने साज़िशन उसे जेल में ही मरवा दिया. जेफ़्री की मौत के बाद उसके ऊपर लगे आरोप हटा लिए गए. आज हम ये सब क्यों सुना रहे हैं? जेफ़्री एप्सटीन की मौत हो चुकी थी. उसके ऊपर लगे आरोप हटाए जा चुके थे. लेकिन मामला ख़त्म नहीं हुआ था. उसके गुनाहों में साथ देने वाले अभी भी बचे हुए थे. इनमें से एक थी, घिलेन मैक्सवेल. जिसकी फ़ोटो प्रिंस एंड्रू और वर्जीनिया रॉबर्ट्स के साथ बाहर आई थी. घिलेन मैक्सवेल प्रख्यात और कुख्यात रॉबर्ट मैक्सवेल की बेटी थी. रॉबर्ट मैक्सेवल चेकोस्लोवाकिया से ब्रिटेन आए. शरणार्थी बनकर. फिर उन्होंने ब्रिटेन के लिए युद्ध लड़ा. बिजनेस किया. सांसद बने और अंत में मीडिया मुगल के तौर पर जाने गए. उनकी मौत के बाद पता चला कि रॉबर्ट ने बेहिसाब घोटाला किया है. इसके बाद उन्हें डकैत तक कहा गया पिता की मौत के बाद घिलेन अमेरिका चली आई. उसने रियल एस्टेट में काम शुरू किया. उसी दौरान उसकी मुलाक़ात जेफ़्री से हुई. जेफ़्री अमीरतम लोगों के फ़ाइनेंस का काम हैंडल करता था. उसका नियम था कि जिसकी संपत्ति एक बिलियन डॉलर (अभी के हिसाब से लगभग 7700 करोड़ रुपये) होगी, वो उसी के लिए काम करेगा. जेफ़्री टैक्स बचाने से लेकर निवेश करने तक की सलाहें दिया करता था. इसी ज़रिए से उसने ताक़तवर लोगों से संपर्क बनाया था. घिलेन और जेफ़्री लंबे समय तक पार्टनर बनकर रहे. पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि घिलेन जेफ़्री की सहायक थी. हर अपराध में. वो लड़कियों को लाने और उन्हें क्लाइंट्स तक भेजने का काम करती थी. वो सेक्स ट्रैफ़िकिंग बिजनेस चलाती थी. 2012 के बाद घिलेन अलग रहने लगी. वो चर्चा से गायब हो गई थी. जेफ़्री का केस खुलने और उसकी मौत के बाद एक बार फिर उसकी चर्चा शुरू हुई. जुलाई 2020 में घिलेन को अरेस्ट कर लिया गया. घिलेन के ऊपर मुकदमा चल रहा है. न्यू यॉर्क सिटी कोर्ट में. 20 दिसंबर को दोनों पक्षों के वकीलों ने अंतिम बयान दर्ज़ कराया. प्रॉसीक्यूटर्स का कहना है कि घिलेन ने जान-बूझकर जेफ़्री का साथ दिया. वो ख़तरनाक थी. इसे सब पता था. ये समय उसे ज़िम्मेदार ठहराने का है. बचाव पक्ष ने कहा कि घिलेन को जेफ़्री के साथ रहने की सज़ा दी जा रही है. ये एक ग़लती हो सकती है, लेकिन ये कोई अपराध नहीं है. दोनों पक्षों के बयान खत्म हो चुके हैं. अब जूरी अपना फ़ैसला सुनाने वाली है. अगर सभी आरोप साबित हो गए और जूरी मान गई तो घिलेन मैक्सवेल को 80 साल तक की सज़ा हो सकती है. अगर आप इस मामले को विस्तार से जानना चाहते हैं तो एक सीरीज़ है. नेटफ़्लिक्स पर. जेफ़्री एपस्टीन: द फ़िल्दी रिच. वो आपको ज़रूर देखनी चाहिए.

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