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ब्राज़ील में दंगा-तख्तापलट की कोशिश, क्या है पूरी कहानी?

ब्राज़ील की राजधानी में दंगे की साज़िश किसने रची?

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9 जनवरी 2023 (अपडेटेड: 9 जनवरी 2023, 09:18 PM IST)
ब्राज़ील की राजधानी में दंगे की साज़िश किसने रची? (AP)
ब्राज़ील की राजधानी में दंगे की साज़िश किसने रची? (AP)
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08 जनवरी 2023 की रात जब भारत में हम-आप गहरी नींद में सो रहे थे, उसी समय भारत से लगभग 15 हज़ार किलोमीटर दूर एक तांडव रचा जा रहा था. एक मुल्क़ की संसद, सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति के घर के अंदर तोड़फोड़ हो रही थी. ज़मीन पर दंगाइयों की भीड़ संविधान और लोकतंत्र की धज्जियां उड़ाने पर उतारु थी. भीड़ देखकर मौके पर मौजूद पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए थे. फिर सेना बुलाई गई. आसमान में हेलिकॉप्टर्स मंडराए. हवाओं में आंसू गैस घोले गए. सड़कों पर सख़्ती बरती गई. तब जाकर अराजकता को शांत कराया जा सका. हालांकि, शांति के कायम रहने पर संशय बना हुआ है.

ये कहानी साउथ अमेरिकी महाद्वीप के सबसे विशाल देश ब्राज़ील की है. ब्राज़ील और भारत के समय में साढ़े आठ घंटे का अंतर है. ब्राज़ील साढ़े आठ घंटा पीछे है. यानी, जब भारत में रात के बारह बजते हैं, उस समय ब्राज़ील में दिन के साढ़े तीन बज रहे होते हैं. यही वो समय था, जब ब्राज़ील पूर्व राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो के समर्थकों की भीड़ राजधानी ब्राजीलिया की सड़कों पर मार्च करने उतरी. जल्दी ही ये मार्च हिंसक हो गया. नतीजा, घंटे भर के अंदर देश की सबसे अहम और सबसे सुरक्षित इमारतों पर दंगाइयों का क़ब्ज़ा हो चुका था.

आइए समझते हैं

- ब्राज़ील में 08 जनवरी को क्या-क्या हुआ?

- ब्राज़ील की राजधानी में दंगे की साज़िश किसने रची?

- और, इस घटना में पूरी दुनिया के लिए क्या सबक छिपा है?

दो तारीख़ों पर गौर कर लीजिए.

तारीख़ नंबर एक. 06 जनवरी 2021.

अमेरिका की संसद ‘कांग्रेस’ में जो बाइडन की जीत पर मुहर लगाने की तैयारी चल रही थी. नवंबर 2020 में हुए राष्ट्रपति चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी के बाइडन ने रिपब्लिकन पार्टी के नेता और तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को हरा दिया था. ट्रंप ये हार नहीं पचा पाए. वो सोशल मीडिया से लेकर पब्लिक रैलियों तक में वोटर फ़्रॉड की बात करते रहे. 06 जनवरी 2021 को उन्होंने वॉशिंगटन में एक सभा की. इसमें उन्होंने अपने सपोर्टर्स के सामने वोटिंग फ़्रॉड वाली बात दोहराई. और, उनसे कैपिटल हिल पर ‘शांतिपूर्ण’ मार्च करने के लिए कहा. कैपिटल हिल वाली इमारत से ही अमेरिका की संसद चलती है.

ट्रंप के उकसाने के बाद हज़ारों की भीड़ कैपिटल हिल में दाखिल हो गई. इसके बाद जो हुआ, वो एक अलग इतिहास है.

अब दूसरी तारीख़ के बारे में जान लेते हैं. 08 जनवरी 2023.

कैपिटल हिल दंगे के ठीक दो बरस और दो दिन बाद वैसा ही वाकया ब्राज़ील में दिखा. राजधानी ब्राजीलिया में पूर्व राष्ट्रपति जाएर बोल्सोनारो के समर्थकों ने संसद, सुप्रीम कोर्ट और प्रेसिडेंशियल पैलेस पर क़ब्ज़ा कर लिया. वे मौजूदा राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा को हटाने की मांग करने लगे. लूला ने हफ़्ते भर पहले ही राष्ट्रपति पद की शपथ ली है. उन्होंने अक्टूबर 2021 में हुए चुनाव में जाएर बोल्सोनारो को हराया था. डोनाल्ड ट्रंप की ही तरह बोल्सोनारो भी चुनाव में धांधली के आरोप लगा रहे थे. उन्होंने अभी तक अपनी हार भी स्वीकार नहीं की है. बोल्सोनारो की राजनैतिक विचारधारा ट्रंप की विचारधारा से मेल खाती है. दोनों ही नेता लगभग समान तरह की कट्टर और आक्रामक राजनीति का प्रतिनिधित्व करते हैं. ब्राज़ील में हुए दंगे को ‘कैपिटल हिल 2.o’ का नाम दिया जा रहा है.

ये तो हुई दो तारीख़ों की कहानी.

अब ब्राज़ील में हुए दंगे की टाइमलाइन जान लीजिए.

- 02 अक्टूबर 2022. ब्राज़ील में राष्ट्रपति, उप-राष्ट्रपति, गवर्नर्स और दूसरे पदों के लिए आम चुनाव कराए गए. राष्ट्रपति चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत से अधिक वोट नहीं मिले. यानी, कोई स्पष्ट विजेता नहीं था. ऐसे में पहले राउंड के टॉप-दो उम्मीदवारों के बीच फिर से वोटिंग कराई गई. 30 अक्टूबर को हुए दूसरे राउंड की वोटिंग में लूला डि सिल्वा ने 50 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर लिया. उन्होंने 50.9 प्रतिशत वोट हासिल किए थे. इसके साथ ही उन्हें विजेता घोषित कर दिया गया.

- 01 नवंबर 2022. ब्राज़ील में परंपरा रही है कि हारने वाला उम्मीदवार विजेता को फ़ोन करके अपनी हार स्वीकार करता है. बोल्सोनारो राष्ट्रपति रहते हुए चुनाव हारे थे. इसलिए, उनसे विनम्रता की उम्मीद थी. मगर ये उम्मीद बेमानी साबित हुई. बोल्सोनारो पहले दो दिनों तक चुप रहे. 01 नवंबर को वो पब्लिक के सामने आए. इसमें उन्होंने कहा कि वो संविधान का पालन करेंगे. हालांकि, इसमें भी उन्होंने अपनी हार नहीं मानी. उस समय तक बोल्सोनारो के समर्थक ब्राज़ील के कई शहरों में चक्का जाम कर रहे थे. वे आर्मी की बैरकों के सामने जाकर लूला का तख़्तापलट करने की गुहार लगा रहे थे. कई जगहों पर आगजनी की भी ख़बरें आ रहीं थी. बोल्सोनारो ने अपने भाषण में उनके बारे में एक शब्द नहीं कहा. वे हिंसा को मौन समर्थन दे रहे थे.

- 10 नवंबर 2022. ब्राज़ील की डिफ़ेंस मिनिस्ट्री ने 63 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की. मिनिस्ट्री ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि, चुनाव में धांधली का कोई सबूत नहीं मिला है. इससे पहले बोल्सोनारो ईवीएम में फ़्रॉड का आरोप लगा रहे थे. वो कहते रहे कि अगर मैं हारा तो समझो की चुनाव में धांधली हुई है. बोल्सोनाराो अपनी चुनावी रैलियों में कहा करते थे कि, 

‘मेरे पास सिर्फ तीन विकल्प हैं. जेल, मौत या जीत. उन नमकहरामों से कह दो कि मुझे कोई गिरफ़्तार नहीं कर सकता.’

- 23 नवंबर 2022. ब्राज़ील की सर्वोच्च अदालत ने बोल्सोनारो की पार्टी का केस रद्द कर दिया. पार्टी की मांग थी कि राष्ट्रपति चुनाव का रिजल्ट पलट दिया जाए. उनका कहना था कि कुछ ईवीएम के वोट्स अवैध हैं. इसलिए, उन्हें फ़ाइनल रिजल्ट में नहीं गिना जाना चाहिए.

अदालत ने अपने फ़ैसले में कहा कि इस आरोप में कोई दम नहीं है. केस बुरी नीयत से किया गया है. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अलेक्जेंडर डि मोरास ने बोल्सोनारो की पार्टी पर लगभग 34 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया.

- 13 दिसंबर 2022. बोल्सोनारो के समर्थकों ने ब्राजीलिया में पुलिस हेडक़्वार्टर पर हमले की कोशिश की. उन्होंने इमारत के पास खड़ी गाड़ियों में आग लगा दी. पुलिस ने बोल्सोनारो के एक करीबी को अरेस्ट किया था. वो लोगों को हिंसा के लिए उकसा रहा था. दंगाई उसे छुड़ाने की कोशिश कर रहे थे. पुलिस को उन्हें भगाने के लिए आंसू गैस के गोले और रबर की गोलियां दागनी पड़ीं.

- 24 दिसंबर 2022. ब्राजीलिया पुलिस ने एयरपोर्ट के पास एक शख़्स को गिरफ़्तार किया. मीडिया रपटों के अनुसार, वो लूला के शपथ-ग्रहण से पहले बम धमाके की साजिश रच रहा था.

- 30 दिसंबर 2022. राष्ट्रपति के तौर पर बोल्सोनारो के कार्यकाल में एक दिन बचा था. उससे पहले ही बोल्सोनारो ने ब्राज़ील छोड़ दिया. वो सरकारी प्लेन में बैठकर अमेरिका के फ़्लोरिडा चले गए.

- 01 जनवरी 2023 को लूला ने राष्ट्रपति पद की शपथ ले ली. इस समारोह में बोल्सोनारो मौजूद नहीं थे. इस तरह एक और पुरानी परंपरा टूटी. ब्राज़ील में जाने वाले राष्ट्रपति, आने वाले को पीले रंग का कमरबंद पहनाते हैं. बोल्सोनारो ने इसको भी तिलांजलि दे दी थी.

बोल्सोनारो के बाहर निकलने के बाद ब्राज़ील में दो धड़े बन गए थे. एक धड़ा इस बात से दुखी था कि बोल्सोनारो को उनके किए की सज़ा नहीं मिल सकी. कोविड के दौरान उनकी ग़लत नीतियों ने हज़ारों लोगों की जान ली. उनके ख़िलाफ़ जांच भी बिठाई गई. जांच कमिटी ने उनके ऊपर मानवता के ख़िलाफ़ अपराध का मुकदमा चलाने की सिफ़ारिश की थी.

वहीं, दूसरा धड़ा इस बात से खुश था कि एक सनकी नेता से पीछा छूटा. बोल्सोनारो ब्राज़ील में रहते हुए कहीं ज़्यादा ख़तरनाक थे.

लेकिन ये खुशफहमी ज़्यादा समय तक नहीं टिकी. बोल्सोनारो भले ही देश से बाहर थे. मगर उनको अपना आदर्श मानने वाले पर्याप्त संख्या में ब्राज़ील के अंदर मौजूद थे. उनमें से कुछ सरकारी मशीनरी में थे. कुछ आम जनता के बीच अफवाहें फैला रहे थे. और, कुछ तो पिछले दो महीनों से आर्मी की बैरकों के बाहर डेरा डालकर बैठे हुए थे. वे इस बात पर अड़े हुए थे कि सेना देश की कमान अपने हाथों में ले.

अब सवाल ये कि 08 जनवरी को क्या हुआ?

ब्राजीलिया, 1960 से ब्राज़ील की राजधानी है. उससे पहले राजधानी का दर्जा रियो डि जनेरो को मिला हुआ था. रियो डि जनेरो ब्राज़ील के पूर्वी तट पर था. 1950 के दशक में सरकार को लगा कि, यहां से पूरे देश का शासन चलाने में मुश्किल हो रही है. राजधानी किनारे की बजाय सेंटर में होनी चाहिए. ताकि, आबादी का फैलाव बराबर हो सके. इसी सोच के साथ ब्राजीलिया का प्लान तैयार हुआ. अप्रैल 1960 में शहर बनकर तैयार हो गया. और, इसे ब्राज़ील की राजधानी बना दिया गया.

ब्राजीलिया से ही मुल्क़ की सरकार चलती है. यहां सरकार के तीनों अंगों का मुख्यालय है. विधायिका के लिए संसद, न्यायपालिका के लिए सुप्रीम कोर्ट और कार्यपालिका के लिए प्रेसिडेंशियल पैलेस. ब्राज़ील में अमेरिका वाला सिस्टम चलता है. वहां भी राष्ट्रपति ही सरकार का मुखिया होता है.

08 जनवरी के दंगे में एक संदेश छिपा था. दंगाइयों ने एक साथ पूरी सरकार को निशाना बनाया था. संसद, सुप्रीम कोर्ट और प्रेसिडेंशियल पैलेस. ये तीनों इमारतें सबसे सुरक्षित और सबसे संवेदनशील मानी जाती हैं. हमले के वक़्त राष्ट्रपति लूला डि सिल्वा साओ पाउलो में थे. सवाल ये पूछा जा रहा है कि, अगर लूला अपने पैलेस में होते और उसी वक़्त ये दंगाई घुस जाते तो राष्ट्रपति का क्या हुआ होता? उनकी सुरक्षा की गारंटी क्या है?

दंगाइयों ने पूरे तीन घंटे तक तीनों इमारतों में तबाही मचाई. इस दौरान पुलिस और सिक्योरिटी फ़ोर्सेज़ मूकदर्शक बने रहे. दंगाइयों का मार्च इमारतों से सात किलोमीटर पहले शुरू हुआ था. पूरे रास्ते उन्हें मिलिटरी पुलिस ने सुरक्षा दी. सवाल ये भी उठ रहा है कि, क्या इस दंगे में मिलिटरी के कुछ लोग भी शामिल थे?

दंगे के बाद क्या-क्या हुआ?

- दंगे की ख़बर मिलते ही राष्ट्रपति लूला राजधानी लौटे. उन्होंने घटनास्थल का दौरा किया. लूला ने दंगाइयों पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है. उन्होंने दंगे के लिए बोल्सोनारो को ज़िम्मेदार ठहराया.

- अधिकारियों का कहना है कि दंगाई ब्राजीलिया के अलावा दूसरे शहरों से भी आए थे. उन्हें सोशल मीडिया के जरिए फ़्री बस और खाने का लालच देकर बुलाया गया था. पुलिस ये पता कर रही है कि बसों का किराया किसने भरा? इससे ये पता चल सकेगा कि दंगे के पीछे कौन था?

- सुप्रीम कोर्ट ने ब्राजीलिया के गवर्नर इबानेस रोसा को तीन महीने के लिए पद से बर्खास्त कर दिया है. अदालत ने कहा कि इस दंगे में स्थानीय अधिकारियों और खुफिया एजेंसियां भी शामिल हो सकतीं है.

- दंगे पर जाएर बोल्सोनारो की प्रतिक्रिया भी आई है. उन्होंने ट्वीट किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र के लिए ज़रूरी हैं. बोल्सोनारो ने लूला के आरोपों को नकार दिया है.

- अमेरिका में बोल्सोनारो के ख़िलाफ़ माहौल बन रहा है. दो अमेरिकी सांसदों ने बोल्सोनारो को बाहर निकालने के लिए चिट्ठी लिखी है. उनका कहना है कि ऐसे शख़्स को मुकदमा झेलने के लिए ब्राज़ील भेजा जाना चाहिए.

इस मामले पर बाकी दुनिया से क्या रिएक्शन आए हैं?

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर ब्राज़ील के हालात पर चिंता जताई. उन्होंने लिखा कि हम इस समय में ब्राज़ील के अधिकारियों के साथ खड़े हैं.

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने इस घटना को लोकतंत्र पर हमला बताया. उन्होंने लिखा कि हम लूला के साथ काम करते रहेंगे.

यूएन के सेक्रेटरी जनरल अंतोनियो गुतेरेस ने भी इस घटना की निंदा की है. उन्होंने उम्मीद जताई कि ब्राज़ील की लोकतांत्रिक संस्थाओं का सम्मान होता रहेगा. ब्राज़ील साउथ अमेरिका में पड़ता है. साउथ अमेरिका में कुल 12 देश हैं. इसमें से सिर्फ दो देश ऐसे हैं, जिनकी ज़मीनी सीमा ब्राज़ील से नहीं लगती. चिली और इक्वाडोर. बाकी सभी देश ब्राज़ील के पड़ोसी हैं. इससे आपको आकार का अंदाज़ा लग गया होगा. ब्राज़ील क्षेत्रफल के लिहाज से दुनिया का पांचवा और जनंसख्या के हिसाब से छठा सबसे बड़ा देश है. इसके अलावा, ब्राज़ील दुनिया की सबसे तेज़ी से उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में भी गिना जाता है.

अगर इतिहास में जाएं तो, ब्राज़ील लंबे समय तक राजनैतिक अस्थिरता का शिकार रहा. 20वीं सदी में ब्राज़ील में कई सैन्य तख़्तापलट हुए. इस दौरान लोगों के बुनियादी अधिकारों का जमकर हनन हुआ और अर्थव्यवस्था चौपट स्थिति में रही. 1985 में सत्ता सिविलियन सरकार के पास आ गई. तब से ब्राज़ील की गाड़ी पटरी पर लौटने लगी. जब 2018 में बोल्सोनारो चुनाव जीते, तब इसमें रुकावट की आशंका जताई गई. बोल्सोनारो मिलिटरी में रह चुके थे. और, वे मिलिटरी के अत्याचारों को जायज भी ठहराते थे. उन्होंने अपने कार्यकाल में तमाम आशंकाओं को सच साबित किया. अक्टूबर 2022 में उनकी हार ने ब्राज़ील को उभरने का मौका दिया था. मगर हालिया घटना ने उम्मीद के पहिये में सुई चुभो दी है.

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