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क्या झारखंड में भी बीजेपी सरकार बनाने वाली है?

तृणमूल कांग्रेस ने दिल्ली पुलिस पर पश्चिम बंगाल पुलिस को काम नहीं करने देने का लगाया आरोप.

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3 अगस्त 2022 (अपडेटेड: 3 अगस्त 2022, 12:03 AM IST)
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झारखंड कांग्रेस ने कैश कांड में शामिल तीन विधायकों की किया सस्पेंड, भाजपा पर लगाया सरकार को अस्थिर करने का आरोप (फोटो: अजतक)
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संविधान में भारत को यूनियन ऑफ स्टेट्स कहा गया है. बीते दिनों एक बड़ा दिलचस्प मामला सामने आया. जिसमें जगहों और किरदारों की वैसी ही विविधता है, जैसी मिले सुर मेरा तुम्हारा में पंडित भीमसेन जोशी ने गाकर सुनाई थी. झारखंड के कांग्रेस विधायक पश्चिम बंगाल में पैसों के साथ धरे गए. कांग्रेस ने आरोप लगाया कि दिल्ली में बैठी भाजपा शासित केंद्र सरकार झारखंड में भी ऑपरेशन लोटस की तैयारी कर रही है. और इसमें नोडल एंजेट थे असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा.

आप इस जटिलता को समझने की कोशिश करें, तब तक आपको एक और बात बता देते हैं. झामुमो-कांग्रेस सरकार को गिराने की कोशिश की जांच के लिए तृणमूल कांग्रेस शासित राज्य की पुलिस दिल्ली आई, जहां की कानून व्यवस्था भाजपा शासित केंद्र के पास है. तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगा दिया है कि दिल्ली पुलिस, पश्चिम बंगाल पुलिस को काम नहीं करने दे रही है. सुनकर लगता है कि कुछ लोग हैं जो देश-देश खेल रहे हैं. उनके बीच झगड़ा हो जाता है, तो आरोप-प्रत्यारोप चालू कर देते हैं. आम दर्शक बूझता रह जाता है कि हो क्या रहा है.  

2005 में प्रकाश झा ने एक फिल्म बनाई थी ''अपहरण''. बिहार में एक वक्त बड़े पैमाने पर चलने वाला और अब छोटे पैमाने पर चलने वाला अपहरण उद्योग इस फिल्म की थीम था. अपहरण के साथ-साथ फिल्म बिहार के समाज, राजनीति और प्रशासन पर भी टिप्पणियां करती चलती है. इस फिल्म में एक बड़ा दिलचस्प सीन है. नाना पाटेकर का पात्र तबरेज़ आलम अपनी गाड़ी की डिक्की में एक अपहृत शख्स को लेकर जा रहा है. तबरेज़ एक माफिया है और एक विधायक भी. लेकिन चौकी पर ज़िले के कप्तान खुद नाके पर खड़े हैं. गाड़ी नाके पर आती है और SP खुद गाड़ी की जांच के लिए आगे बढ़ते हैं. तब तबरेज़ और SP के बीच बहस हो जाती है और तबरेज़, SP से एक बड़ी मारक बात कहता है. वो कहता है, ''डीजीपी साहेब, बताइए इनको, ये जनता के नौकर हैं और हम जनता के सेवक.

असलीयत फिल्म के पर्दे पर आते आते अतिरेक की सीमा को छूने लगती है. लेकिन नौकर और सेवक वाली इस बात में दम तो था. लेकिन इधर कुछ दिनों से, ''बदले बदले मेरे सरकार नज़र आते हैं.'' पुलिस या कानून व्यवस्था से जुड़ी दूसरी एजेंसियां धड़ाधड़ रसूखदारों को गिरफ्तार कर रही हैं. अब इससे पहले कि आप ये सोचें कि पुलिस ने ''अपहरण'' में हुई अपनी बेइज़्ज़ती से सबक ले लिया, गिरफ्तारियों का संदर्भ भी देख लेना चाहिए. कि कौन गिरफ्तार हो रहा है और कौन गिरफ्तार कर रहा है.

जैसे अब तक रेड और गिरफ्तारियों में ED सबसे आगे चल रही थी. क्या नेता, क्या अभिनेता, एजेंसी छापे पर छापे मारती रही और बरामद कैश से ''E'' और ''D'' बनाती रही. ये सब हो रहा था, और कोलकाता पुलिस, जिसके इलाके में ये सब हो रहा था, वो खबरों से बाहर थी. लेकिन 30 जुलाई के रोज़ कोलकाता पुलिस की किस्मत खुली. पुलिस को एक टिप मिली कि भारी भरकम कैश के साथ कुछ लोग एक गाड़ी में जा रहे हैं. और इसी सिलसिले में हावड़ा के पांचाल इलाके से तीन तीन माननीय हिरासत में लिए गए. ये झारखंड कांग्रेस के विधायक थे. -
  इरफान अंसारी
  राजेश कच्छप
  नमन बिक्साल कोंगरी
इनके साथ दो लोग और थे. और गाड़ियों में 49 लाख रुपए कैश. कोलकाता से कैश बरामदगी की खबर आई तो एक बार लगा कि पार्था चैटर्जी मामले में ही अपडेट आया है. SSC घोटाले के संबंध में वो ईडी की हिरासत में हैं और उनकी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के यहां से भारी भरकम कैश पहले मिला भी है. पश्चिम बंगाल भाजपा के मुखिया सुकांत मजूमदार ने तो कह भी दिया कि संभवतः ये पैसा तृणमूल कांग्रेस का है, जिसे सोनिया गांधी और कांग्रेस की मदद के लिए भेजा जा रहा था. इसके जवाब में तृणमूल की तरफ से प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि मजूमदार साहब आइडेंटिटी क्राइसिस से जूझ रहे हैं. पैसे के बारे में जानकारी चाहिए हो, तो उन्हें अधीर रंजन चौधरी से बात करनी चाहिए.

ये नोंकझोंक चलती रही, लेकिन जैसे ही एक चिर परिचित शब्द का इस्तेमाल हुआ, सारी बात बदल गई. ये शब्द था - ऑपरेशन लोटस. कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि भाजपा झारखंड में भी ऑपरेशन लोटस चलाने की कोशिश कर रही है. और कोलकाता में पकड़ में आया कैश इसी के लिए इस्तेमाल होने वाला था.

अगले दिन, माने 31 जुलाई को हिरासत में लिए गए तीन विधायक और दो अन्य को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 अगस्त तक पश्चिम बंगाल पुलिस के क्रिमिनल इंवेस्टिगेशन डिपार्टमेंट CID की कस्टडी में भेज दिया. विधायकों ने दावा किया था कि वो इस पैसे से साड़ियां खरीदना चाहते थे. लेकिन कोलकाता पुलिस ने दावा किया कि ये विधायक गुवाहाटी से लौटे हैं. गुवाहाटी और विधायक सुनकर आपके दिमाग में कुछ कौंधा? जून और जुलाई में शिवसेना के विधायक मुंबई से पहले सूरत गए थे और फिर पहुंचे थे गुवाहाटी. और महाराष्ट्र की महाअघाड़ी सरकार गिर गई थी.

31 जुलाई को ही कांग्रेस ने तीनों विधायकों को पार्टी से निलंबित कर दिया. इनके खिलाफ रांची के एक थाने में मामला भी लिखवा दिया गया. ये मामला लिखवाया झारखंड की बरमो सीट से कांग्रेस विधायक कुमार जयमंगल उर्फ अनूप सिंह ने. अनूप सिंह ने रांची में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की और दावा किया, कि कोलकाता पुलिस द्वारा गिरफ्तार तीनों विधायक उन्हें और दूसरे कांग्रेस विधायकों को प्रलोभन दे रहे ते. कि अगर भाजपा सरकार बनती है, तो पाला बदलने वाले विधायकों को मंत्रिपद और 10 करोड़ रुपया मिलेगा. जयमंगल के मुताबिक इरफान अंसारी का तो मंत्रालय तक फिक्स हो गया था. उन्हें स्वास्थ्य मंत्री बनाया जाना था. आगे जयमंगल ने दावा किया कि तीनों विधायक उन्हें कोलकाता से गुवाहाटी ले जाना चाहते थे, जहां उनकी असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात फिक्स हुई थी.

भाजपा ने तुरंत इन आरोपों को खारिज किया. चूंकि सवाल हिमंता बिस्वा सरमा पर उठाया गया था, इसलिए उन्होंने भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा, 

''कांग्रेस नेताओं से तो मेरा संपर्क बना ही रहता है, क्योंकि वहां मेरे कई पुराने दोस्त हैं. मैं 20 साल इसी पार्टी में था. वो गुवाहाटी आते हैं, तो मुझसे मिलते हैं. मैं दिल्ली जाता हूं, तब भी मुलाकात होती रहती है. इसमें कोई नई बात नहीं है.''

 बिस्वा सरमा इतने पर ही नहीं रुके, उन्होंने वो तस्वीरें ट्वीट कीं, जिनमें खुद कुमार जयमंगल बिस्वा सरमा और केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी के साथ नज़र आ रहे थे. सरमा ने तंज़ करते हुए लिखा कि झारखंड में दर्ज हुई कथित FIR वैसी ही है, जैसे कांग्रेस ओतावियो क्वात्रोची को बोफोर्स मामले में केस दर्ज कराने को कहे. दर्शक जानते ही हैं कि क्वात्रोची पर बोफोर्स मामले में दलाली खाने का आरोप था.

इसके जवाब में जयमंगल ने कहा कि उनकी बिस्वा सरमा और प्रह्लाद जोशी से मुलाकात हुई तो थी. लेकिन विषय था कोल इंडिया से जुड़ा. क्योंकि प्रह्लाद जोशी केंद्रीय कोयला मंत्री हैं. और इस बारे में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सूचित भी किया गया था. वैसे दर्शकों को ये बात मालूम होनी चाहिए कि जयमंगल ने सरकार गिराने की कोशिशों वाला आरोप पहली बार नहीं लगाया है. 2021 की जुलाई में भी जयमंगल ने रांची कोतवाली में एक ऐसा ही मामला लिखवाया था - कि झारखंड में चल रही गठबंधन सरकार को गिराने की कोशिश हो रही है. तब भी तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, लेकिन उसके बाद ज़्यादा कुछ घटा नहीं.

2 अगस्त को झारखंड MLA कांड में पश्चिम बंगाल CID ने कोलकाता के एक व्यापारी के यहां भी छापा मारा था. इस दौरान भी कैश बरामद हुआ. पुलिस उस होटल से सीसीटीवी फुटेज भी निकलवा रही है, जहां गिरफ्तारी से एक दिन पहले विधायक 20 मिनट के लिए रुके थे. अब आ जाते हैं आज पर. आज पश्चिम बंगाल CID के चार अधिकारियों की एक टीम दिल्ली आई. ये टीम सिद्धार्थ मजूमदार के ठिकानों पर छापा मारना चाहती थी. मजूमदार पर आरोप है कि उन्होंने ही तीनों विधायकों की 20 जुलाई के रोज़ हिमंता बिस्वा सरमा से मुलाकात करवाई थी. इसी संबंध में जांच होनी थी, जिसके नतीजे में आनी थीं वो तस्वीरें, जिनमें पुलिस अधिकारी किसी घर के बाहर खड़े नज़र आते हैं. खबरों की दुनिया में छापे का संकेत ऐसी ही तस्वीरों से किया जाता है.

लेकिन सामने आया एक ट्वीट. CID पश्चिम बंगाल ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लिखा,

''पांचाल पुलिस थाने में दर्ज मामला संख्या 276/22 में न्यायालय द्वारा जारी सर्च वॉरंट की तामील के लिए CID की एक टीम दिल्ली पहुंची थी. लेकिन दिल्ली पुलिस के DCP, साउथ वेस्ट के निर्देश पर उन्हें अपनी ड्यूटी पूरी करने से रोका गया. इस मामले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर द्वारा हस्तक्षेप का निवेदन है.'' 

इस ट्वीट में दिल्ली पुलिस, दिल्ली पुलिस कमिश्नर और दिल्ली पुलिस के डीसीपी साउथ वेस्ट को टैग भी किया गया था. साथ में वॉरंट की तस्वीर भी लगाई गई थी.

पश्चिम बंगाल पुलिस के सूत्रों ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उनके अधिकारियों को हिरासत में ले लिया था. जवाब में दिल्ली पुलिस सूत्रों ने दावा किया कि एजेंसी ने किसी को जांच से नहीं रोका. मामले के जांच अधिकारी मौजूद नहीं हैं. और वॉरंट की जांच की जा रही है. इसके आगे नियमों का हवाला दिया जाने लगा. अब पश्चिम बंगाल से वरिष्ठ अधिकारी दिल्ली आ रहे हैं, ताकि मामले में प्रगति हो सके. नियमों के पालन वाली बात पर पश्चिम बंगाल पुलिस के सूत्रों ने दावा किया कि दिल्ली पुलिस को विधिवत सूचना दी गई थी. उनके एक प्रतिनिधि को भी मौके पर ले जाया गया था. तभी अचानक स्थानीय SHO वहां पहुंचे और कहा कि DCP साहब ने कोई कार्रवाई न करने को कहा है.

चूंकि संसद सत्र में है, इसीलिए तृणमूल कांग्रेस ने इस मामले को राज्यसभा में भी उठाया. यूएपीए को लेकर चर्चा चल रही थी, जिसपर बोलने का मौका तृणमूल सांसद डोला सेन को मिला. डोला सेन ने खड़े होकर बोलना शुरू किया, तो दिल्ली पुलिस द्वारा पश्चिम बंगाल पुलिस को रोकने पर सरकार से जवाब मांग लिया. उप सभापति हरिवंश ने सेन को टोका कि चर्चा का विषय यूएपीए है, इसीलिए सांसद को उसी विषय से जुड़ा सवाल पूछना चाहिए. लेकिन सेन अपनी बात दोहराती रहीं और उप-सभापति अगले वक्ता की ओर चले गए. और ये वाकया संसद के रिकॉर्ड से बाहर कर दिया गया.

लोकसभा में यही काम दमदम सीट से तृणमूल सांसद सौगत रॉय ने किया. उन्होंने कहा कि वो सेंट्रल यूनिवर्सिटीज़ अमेंडमेंट बिल का समर्थन करना चाहते थे, लेकिन उन्हें सदन में आने पर पश्चिम बंगाल पुलिस को रोके जाने की बात मालूम चली, इसीलिए पार्टी सदन से वॉकआउट करती है. तृणमूल सांसदों ने आरोप लगाया कि पूर्व में भी दिल्ली पुलिस ने विपक्षी राज्यों से आई पुलिस टीमों को जांच करने से रोका है. इसके जवाब में पश्चिम बंगाल भाजपा के प्रवक्ता शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि न्यायालय के आदेश पर तो कई जांच चल रही हैं. अगर किसी को दिक्कत आ रही है, तो उसे न्यायालय से राहत ले लेनी चाहिए.

आज वाली कहानी में ढेर सारे कथनाक आपस में गुंथे हुए हैं. एक गठबंधन सरकार है, जिसके मुखिया ने अब तक अपनी कुर्सी को आंच से बचाए रखा है. हेमंत सोरेन ने द्रौपदी मुर्मू से तब भी अच्छे संबंध रखे जब वो झारखंड राज्यपाल थीं, और उनके पक्ष में राष्ट्रपति चुनाव में वोट भी डाला. बीच-बीच में आने वाले बयानों और ट्वीट्स को छोड़ दें, तो सोरेन ने अपनी छवि non confrontational रखी. लेकिन इन दिनों गठबंधन सरकारें कुछ ज़्यादा सतर्क रहती हैं. वैसे हेमंत सोरेन ने रस्मी तौर पर कह दिया है कि उनकी सरकार को गिराने की कोशिश विफल हो गई है. लेकिन कब क्या हो जाए, कौन बता सकता है. दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल है, जहां तृणमूल के पास नेता भी है और पूर्ण बहुमत भी. बावजूद इसके, तृणमूल कांग्रेस और उसके नेता केंद्रीय एजेंसियों की तपिश झेल रहे हैं. क्या इसके चलते सोरेन और ममता बनर्जी साथ आने की सोच रहे हैं? और क्या ये दोनों मिलकर भाजपा का सामना कर सकते हैं? ये देखना बहुत दिलचस्प होगा. हम इस खबर पर अपनी नज़र बनाए रखेंगे, आप अपनी नज़र हम पर बनाए रखिएगा.  
 

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