कोविड और पीएम मोदी को लेकर विदेशी मीडिया क्या कह रही?
कोरोना से लड़ाई में कौन से देश भारत का साथ दे रहे?

- पहला, भारत में कोरोना का कहर सुनामी में बदल चुका है. देश में उपलब्ध संसाधन कम पड़ रहे हैं. इलाज की गुहारों और संसाधन की उपलब्धता में खाई बढ़ रही है. भारत ने ज़रूरत के समय आगे बढ़कर दुनिया की मदद की. चाहे वो हाइड्रोक्सी-क़्लोरोक़्वीन की बात हो या रेमेडिसिविर के निर्यात की. अब जबकि भारत संकट में है, उसे कहां-कहां से सहायता मिल रही है?
- दूसरा, हमने बार-बार कहा है कि ये जवाबदेही तय करने और जागरुकता बढ़ाने का समय है. भारतीय मीडिया की ख़बरों से तो आप वाकिफ़ होंगे ही. हम जानेंगे कि इंटरनैशनल मीडिया में भारत के बारे में क्या छप रहा है? वहां किसे दोषी ठहराया जा रहा है? उस स्पेस में ‘सिस्टम’ के चेहरे से नक़ाब उतरा है या नहीं? सब विस्तार से बताएंगे.
पहले हिस्से में विदेशों से मिल रही मदद की बात
भारत लंबे समय से अमेरिका से डिफ़ेंस प्रोडक्शन ऐक्ट में ढील देने की गुज़ारिश कर रहा था. सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने इस बाबत ट्वीट भी किया था. उन्होंने राष्ट्रपति जो बाइडन को टैग कर अपील की थी. ताकि वैक्सीन के कच्चे माल के निर्यात पर लगा प्रतिबंध हटाया जा सके. अमेरिका ने कोरोना महामारी की शुरुआत में ही ये ऐक्ट लगाकर ज़रूरी सामानों का निर्यात रोक दिया था. पिछले हफ़्ते तक अमेरिका कच्चा माल देने के लिए तैयार नहीं था. व्हाइट हाउस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यहां तक कह दिया था कि उनकी प्राथमिकता अमेरिका के लोग हैं.
जब इंटरनैशनल प्रेस में भारत के हालात पर रिपोर्ट आनी शुरू हुई और कुछ अमेरिकी सांसदों ने अपनी सरकार पर दबाव बनाया, तब जाकर बाइडन प्रशासन की नींद खुली. अब अमेरिका वैक्सीन का कच्चा माल देने के लिए तैयार हो गया है.
अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सलिवान ने अपने भारतीय समकक्ष अजित डोभाल से फ़ोन पर बात की. इस बातचीत के बाद अमेरिकी प्रशासन की तरफ से बयान जारी किया गया. मेन पॉइंट्स जान लेते हैं-Spoke today with National Security Advisor Ajit Doval about the spike in COVID cases in India and we agreed to stay in close touch in the coming days. The United States stands in solidarity with the people of India and we are deploying more supplies and resources: pic.twitter.com/yDM7v2J7OA
— Jake Sullivan (@JakeSullivan46) April 25, 2021
- अमेरिका ने कोविशील्ड वैक्सीन के लिए ज़रूरी कच्चे माल के सोर्सेज़ की पहचान कर ली है. इसे जल्दी ही भारत को उपलब्ध कराया जाएगा. - कोरोना के मरीज़ों के इलाज और फ़्रंटलाइन हेल्थ वर्कर्स की सुरक्षा के लिए ज़रूरी दवाएं, टेस्ट किट्स, वेंटिलेटर्स और पीपीई किट्स भेजे जाएंगे. अमेरिका ऑक्सीजन उत्पादन और उससे जुड़े संसाधन पहुंचाने के लिए भी काम कर रहा है. - सेंटर फ़ॉर डिजिज कंट्रोल (CDC) और यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फ़ॉर इंटरनैशनल डेवलपमेंट (USAID) के एक्सपर्ट्स की टीम भी तैनात की जाएगी. ये टीम भारत सरकार के साथ मिलकर काम करेगी और अमेरिका से मिल रही आपातकालीन मदद को जल्द-से-जल्द पहुंचाने में भी मदद करेगी.
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी इसी बयान से एक लाइन उठाकर ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा,
इन सबके अलावा, एक मांग और भी है. अमेरिका के पास एस्ट्राज़ेनेका वैक्सीन की 4 करोड़ खुराक स्टॉक में रखी हैं. इनका अभी इस्तेमाल नहीं हो रहा है. संक्रामक रोगों के टॉप विशेषज्ञ डॉ. एंथनी फ़ाउची ने बताया कि इस स्टॉक को भारत को सौंपने पर विचार चल रहा है.Just as India sent assistance to the United States as our hospitals were strained early in the pandemic, we are determined to help India in its time of need. https://t.co/SzWRj0eP3y
— President Biden (@POTUS) April 25, 2021
अमेरिका के रूख़ में अचानक से आए बदलाव की वजह क्या है?
इंटरनैशनल प्रेस और सांसदों के दबाव के अलावा किस बात का फ़र्क़ पड़ा है? जानकारों का कहना है कि जब से चीन, रूस और पाकिस्तान ने भारत को मदद की पेशकश की थी, अमेरिका इस बढ़त को रोकने की कोशिश में जुटा था. भारत को पहुंचाई जा रही मदद इसी कोशिश का नतीजा है. खैर, सच्चाई जो भी हो. ये लोगों की जान बचाने का समय है. जितनी जल्दी ये मदद ज़रूरी लोगों तक पहुंचेगी, भारत उतनी जल्दी इस अनचाहे दौर से बाहर निकलने में कामयाब हो सकेगा.
अमेरिका के अलावा, ब्रिटेन ने भी भारत का हाथ पकड़ा है
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने ट्वीट कर कहा कि उनका देश कोविड-19 के साथ साझी लड़ाई में भारत के साथ कदम मिलाकर खड़ा है. उन्होंने ये भी बताया कि ज़रूरी मेडिकल उपकरणों की खेप भारत के रास्ते में है. ब्रिटेन, भारत को लगभग 600 ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर्स और वेंटिलेटर्स की मदद दे रहा है. कोरोना की दूसरी लहर में इन दोनों उपकरणों की ज़रूरत बढ़ी हुई है.
भारत में ब्रिटेन के राजदूत एलेक्स एलिस ने हिंदी में वीडियो जारी कर भारत का सहयोग करने की बात कही. उन्होंने कहा कि मुश्किल के इस वक़्त में ब्रिटेन, भारत के साथ है. इसके अलावा, ब्रिटिश एशियन ट्रस्ट नामक संगठन इस लड़ाई का सामना करने के लिए फ़ंड इकट्ठा कर रहा है. कई जाने-माने पत्रकारों और ब्रिटिश सांसदों ने सोशल मीडिया पर इसके लिए अपील भी की है.
यूरोपियन यूनियन (EU) भी दुख की इस घड़ी में भारत के साथ आया है. EU कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लियेन ने कहा है कि वे मदद पहुंचाने के लिए तैयार हैं. उन्होंने भारत के आग्रह पर ज़रूरी संसाधनों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया है. EU, भारत में ऑक्सीजन और दवाओं का स्टॉक भेज रहा है.We are supporting our Indian friends with medical equipment to help them in the battle against Coronavirus. We will win this fight together. pic.twitter.com/6hooGtbI3M
— Alex Ellis (@AlexWEllis) April 25, 2021
फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत का सहयोग करने की बात कही है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फ़्रांस ऑक्सीजन भेजने के लिए तैयार हो गया है. फ़्रांस के अलावा, सऊदी अरब ने 80 टन ऑक्सीजन की मदद भेजी है. सिंगापुर ने भी चार क्रायोजेनिक ऑक्सीजन टैंकर भेजे हैं. रूस भी ऑक्सीजन और ज़रूरी दवाएं भेज रहा है. इसके लिए विशेष विमान चलाने की तैयारी हो रही है. इससे पहले भारत ने रूसी वैक्सीन स्पूतनिक-फ़ाइव के इस्तेमाल की मंज़ूरी दी थी.
फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों. (तस्वीर: एपी)
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ऑक्सीजन टैंकर्स भारत भेजने के लिए भारतीय अधिकारियों के साथ कोऑर्डिनेट कर रहा है. 25 अप्रैल को दुबई के बुर्ज़ खलीफ़ा पर लाइट शो में भारत का तिरंगा झंडा प्रदर्शित किया गया. और, भारत का साथ देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई.
भारत के पड़ोसी देशों ने भी हरसंभव मदद पहुंचाने का ऐलान किया है. चीन ने कहा है कि वो भारत के साथ संपर्क में है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कोरोना से बीमार लोगों की सलामती की दुआ मांगी. पाकिस्तान के एधी फ़ाउंडेशन ने अपने 50 एंबुलेंस भारत भेजने की बात कही थी. पाकिस्तान में सोशल मीडिया पर भी भारत के लिए दुआएं मांगी जा रही हैं.
इंटरनैशनल मीडिया में क्या चल रहा?
ये तो हुई भारत को मिल रहे इंटरनैशनल सहयोग की बात. अब बारी है इंटरनैशनल मीडिया को खंगालने की. कहां भारत के बारे में क्या छप रहा है? वहां कोरोना के भारतीय वर्ज़न को लेकर क्या बात की जा रही है?
25 अप्रैल को ‘द न्यू यॉर्क टाइम्स’ ने पहले पन्ने पर दिल्ली की तस्वीर लगाई. तस्वीर में क्या था? श्मशान में जलती चिताएं. ईंट जोड़कर बनाए गए कच्चे प्लेटफ़ॉर्म. उनके ऊपर ठंडी पड़ी राख. और, लाशों को जलाने की जगह ढूंढते लोग.
NYT ने शीर्षक लगाया- As COVID-19 devastates India, Deaths go undercounted
‘भारत में कोविड-19 के बढ़ते कहर के बीच मौतों की गिनती में बेमानी.’
ख़बर के भीतर क्या था? कुछ खास बातें बता देते हैं. श्मशानों में काम कर रहे लोगों के इंटरव्यू से ये पता चला कि मौतों की असली संख्या सरकारी आंकड़े से कहीं ज़्यादा है. कई मामलों में परिवारवाले शर्म की वजह से कोरोना का नाम नहीं ले रहे. मौत की वजह ‘कमज़ोरी’ लिखकर बताई जा रही है. ऐसा देश के अधिकतर शहरों में हो रहा है. भारत पर नज़र रख रहे एक महामारी विशेषज्ञ ने यहां तक कह दिया कि ‘ये आंकड़ों का क़त्लेआम है’.
ब्रिटिश अख़बार ‘द गार्डियन’ ने अपने संपादकीय में सीधे-सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार बताया है. अख़बार ने लिखा कि कोरोना से निपटने में भारत की विफ़लता का कारण मोदी का अति-आत्मविश्वास है. मार्च की शुरुआत में पीएम मोदी ने दावा किया कि कोरोना महामारी के अंत की शुरुआत हो चुकी है. उन्होंने ये भी ऐलान किया कि भारत महामारी से पहले के दौर में लौट सकता है. अख़बार ने लिखा, गार्डियन ने अपने संपादकीय में सलाह दी कि पीएम मोदी को अपनी ग़लतियां मानकर उसमें सुधार करना चाहिए. अगर वो अपने पुराने रवैये पर कायम रहते हैं तो इतिहास उनका कठोरता से मूल्यांकन करेगा.
ऑस्ट्रेलिया का एक अख़बार है ‘द ऑस्ट्रेलियन’. भारत के हालात पर उसने लिखा है,
Modi leads India into Viral Apocalypse मोदी की वजह से भारत क़यामत की स्थिति में पहुंच गया है.
अख़बार ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘भीड़ से प्यार करनेवाला’ बताया. ये भी लिखा कि घमंड, उग्र-राष्ट्रवाद और अफ़सरों की अक्षमता ने मिलकर भारत में असाधारण स्तर का संकट खड़ा कर दिया है.
टाइम मैगज़ीन ने लिखा, ‘ये नरक है. प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की विफ़लता ने भारत का कोरोना संकट और गहरा कर दिया है.’
22 अप्रैल को गल्फ़ न्यूज़ ने अपने पहले पन्ने पर भारत की ख़बर छापी. अख़बार ने शीर्षक लगाया,
INDIA GASPING FOR BREATH 'सांसों के लिए संघर्ष करता भारत'
वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि इस तबाही से बचा जा सकता था. संक्रमण के खतरे के बीच स्टेडियम्स, कुंभ और चुनावी रैलियों की भीड़ ने सब बर्बाद कर दिया. इसके अलावा, बीबीसी और अल जज़ीरा लगातार ग्राउंड ज़ीरो से लगातार रिपोर्ट कर रहे हैं. विदेशी मीडिया में सरकार द्वारा 50 से अधिक ट्वीट्स हटवाने का मुद्दा भी छाया हुआ. सरकार पर आरोप भी लगे कि जिस वक़्त में उनका ध्यान लोगों को बचाने पर होना चाहिए, उस वक़्त में वो ट्वीट हटवाने पर जोर लगा रही है.
ऑस्ट्रेलियाई अख़बार ‘फ़ाइनेंशियल रिव्यू’ में धराशायी हो चुके हाथी पर सवार पीएम मोदी का कार्टून भी सुर्खियों में रहा है. कार्टून में हाथी की सूंड़ पर भारत का नक़्शा दिखाया गया है और उसके ऊपर पर मोदी माइक लेकर बैठे हैं. कार्टून का टाइटल है,
Death rides A Pale Elephant…? ‘निर्बल हाथी पर सवार मौत…?’
इस कार्टून पर भारी बहस भी चल रही है. कोई इसे भारत का अपमान बता रहा है तो कोई इसे सटीक दृश्यांकन कहकर सराहना कर रहा है.Death Rides A Pale Elephant...?? Cartoon in Australian Financial Review newspaper.#GetWellSoonPM
— ShuaibMuhammed (@shuaibmuhammed_) April 26, 2021
pic.twitter.com/HxErkE7sCu
तमाम आलोचनाओं का एक ज़रूरी मकसद होता है. जो जवाबदेह हैं, उनकी जिम्मेदारी तय हो. वे अपनी ग़लतियों को छद्म प्रचार से न ढकें. वे लीडर हैं तो लीडर की तरह सामने आएं. लोग रहेंगे तभी लोकतंत्र रहेगा. लोग बचेंगे तभी देश बचेगा. इन गुज़ारिशों का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि सरकारों की आंखों में कितना पानी बचा हुआ है!

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