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क्यों यूपी सरकार ने प्रदूषण के लिए पाकिस्तान को ज़िम्मेदार ठहराया?

CJI एनवी रमना ने पूछा क्या पाकिस्तान के उद्योंगों पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं?

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3 दिसंबर 2021 (अपडेटेड: 3 दिसंबर 2021, 06:06 PM IST)
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CJI एनवी रमना ने पूछा क्या पाकिस्तान के उद्योंगों पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं?
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एक मुल्क जो 1947 में हमसे अलग हो गया था, उसकी याद जैसे हम भुला नहीं पा रहे हैं. तभी तो राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ चुनाव से लेकर टिड्डी और टिड्डी से लेकर प्रदूषण तक हमें पाकिस्तान की याद आ ही जाती है. वो भी सुप्रीम कोर्ट में. अब दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण के मुद्दे को ही ले लीजिए. केंद्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब में विधायिका और कार्यपालिका ने इतना बढ़िया काम किया, कि न्यापालिका दखल देने से खुद को रोक नहीं पाई. सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के कई दौर बीत चुके हैं. आज फिर तारीख लगी थी. सुप्रीम कोर्ट ने आज हलफनामा दायर करके बताया कि हमने टास्क फोर्स और फ्लाइंग स्क्वॉड बनाई है जो रोज बैठक करेगी और जरूरी कदम उठाएगी. ये फ्लाइंग स्क्वॉड पूरे दिल्ली-NCR में काम करेगी. सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन के फैसले को लागू करने के आदेश दिए हैं. कोर्ट ने ये आदेश केंद्र और दिल्ली सरकार को दिए हैं. इससे एक दिन पहले ही सुप्रीम कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद आयोग ने कई फैसले लिए थे. आज 03 दिसंबर को इन फैसलों के बारे में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी. कमीशन की तरफ से साफ ईंधन का प्रयोग ना करने वाले उद्योगों पर प्रतिबंध लगाने के फैसले पर उत्तर प्रदेश सरकार ने आपत्ति जताई. यूपी सरकार की तरफ से कहा गया कि इस प्रतिबंध से उत्तर प्रदेश के गन्ना और दूध से जुड़े उद्योगों पर बुरा असर पड़ेगा. यूपी सरकार की तरफ से यह भी कहा गया कि दिल्ली में प्रदूषित हवा पाकिस्तान से आ रही है. इस दलील के जवाब में CJI एनवी रमना ने पूछा कि तो क्या आप पाकिस्तान में उद्योंगों पर प्रतिबंध लगाना चाहते हैं? पाकिस्तान भारत का पड़ोसी मुल्क है. और प्रकृति रैडक्लिफ लाइन में नहीं मानती. ये समझ आने वाली बात है कि जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर दोनों देशों के काम एक दूसरे को प्रभावित करते ही हैं. लेकिन जब एक सरकार देश की सबसे बड़ी अदालत को ये बता देती है कि प्रदूषित हवा पाकिस्तान से आ रही है. और साथ में ये भी कह देती है कि उत्तर प्रदेश में उद्योगों का राजधानी में प्रदूषण से कोई लेना देना नहीं है, तो बात समझ से परे जाने लगती है. ईंधन या बिना ईंधन उद्योगों के साथ साथ पश्चिमी उत्तर प्रदेश में होने वाली किसी भी गतिविधी का असर दिल्ली के वातावरण पर पड़ता है, ठीक वैसे ही, जैसे हरियाणा और पंजाब में जो होता है, उसका असर हम दिल्ली में देखते हैं. और ये समझने के लिए आपको वकील या पर्यावरण विशेषज्ञ होने की ज़रूरत नहीं है. एक कॉमन सेंस नाम की चिड़िया भी होती है. जिसे पत्थर न मारो, तो वो कम से कम पास के पेड़ पर बैठी रहती है. सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने उन मीडिया रिपोर्ट्स पर आपत्ति जताई, जिनमें यह बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर दिल्ली सरकार प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो वो सरकार चलाने के लिए किसी और को नियुक्त कर देगा. कोर्ट ने भी माना कि उसने ऐसी टिप्पणी कभी नहीं की और मीडिया को जिम्मेदार तरीके से रिपोर्टिंग करनी चाहिए. कोर्ट की तरफ से कहा गया कि मीडिया का एक हिस्सा उसे विलेन के तौर पर पेश करने की कोशिश करता है. हालांकि कोर्ट ने ये भी कहा कि हम प्रेस की स्वतंत्रता नहीं छीन सकते.

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