The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • This is why Yoga Guru Baba Ramdev chose 4 june to praise narendra modi government with BJP president Amit Shah

रामदेव ने अमित शाह के साथ प्रेस कॉंफ्रेंस करने के लिए आज ही का दिन क्यों चुना?

सात साल पहले बाबा रामदेव के साथ जो हुआ, वो शायद जिंदगीभर नहीं भूल पाएंगे.

Advertisement
pic
4 जून 2018 (अपडेटेड: 4 जून 2018, 09:49 AM IST)
Img The Lallantop
बाबा रामदेव बड़ी तेजी से बुलंदी पर चढ़े हैं. इसमें उनके राजनीतिक कनेक्शन ने काफी मदद की है.
Quick AI Highlights
Click here to view more

"मैंने स्वयं अपनी मां को देखा है, बचपन में रोटी पकाते हुए. हम राजस्थान और हरियाणा के बॉर्डर के छोटे से गांव में पैदा हुए. सरसों काटने के बाद उसके डंठल बच जाते हैं, उन्हें 'धांसे' बोलते हैं. इसके माध्यम से और गाय-भैंस के गोबर से उपले बनाकर रोटी पकाई जाती है. मैंने अपनी मां के आंखों में सैंकड़ो नहीं, हजारों बार आंसू देखे और मेरी मां की नेत्रज्योति उससे कम हो गई. नहीं तो वो जिस सुई से कपड़े सिला करती थीं, तो बिना चश्मे के उसमें धागा डाल लेती थी. ऐसी करोड़ों माताओं के आंसू मोदी जी ने पोंछे हैं."

योग गुरु बाबा रामदेव 4 जून 2018 को जब मीडिया के सामने यह बयान दे रहे थे, उस समय बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह उनके बगलगीर थे. अमित शाह बीजेपी के महासंपर्क अभियान के तहत दिल्ली के पतंजलि फार्महाउस पहुंचे हुए थे. इस अभियान में उन्हें देश के 50 नामी-गिरामी लोगों से मिलना है.

अमित शाह के साथ प्रेस कॉंफ्रेंस में बैठे रामदेव बीजेपी प्रवक्ता से नजर आ रहे थे. वो लगातार मोदी सरकार की तारीफ कर रहे थे. उन्होंने मोदी सरकार को कालेधन और टैक्स सुधार के मोर्चे पर सफल बताया. उन्होंने सड़कें बनाने को लेकर परिवहन मंत्री नितिन गडकरी की तारीफ की. उन्होंने नरेंद्र मोदी को 100 लोक कल्याणकारी योजनाएं चलाने के लिए धन्यवाद दिया.


अमित शाह के साथ प्रेस कॉंफ्रेंस करते बाबा रामदेव
अमित शाह के साथ प्रेस कॉंफ्रेंस करते बाबा रामदेव

नरेंद्र मोदी की सरकार को चार साल पूरे हो चुके हैं. यह चार साल देश के लिए कैसे भी रहे हों, लेकिन पतंजलि के लिए काफी अच्छे गुजरे हैं. पिछले तीन वित्तीय वर्षों में पतंजलि के उत्पादों की बिक्री हर साल दोगुनी रफ़्तार से बढ़ी है. 2014-15 के वित्तीय वर्ष में पतंजलि की बिक्री 2006.75 करोड़ थी. यह 2015-2016 में बढ़कर 5000 करोड़ पर पहुंच गई. 2016-17 के में पतंजलि ने कामयाबी के नए झंडे गाड़े. इस साल पतंजलि ने अपनी बिक्री को दोगुना करते हुए 10,000 करोड़ पर पहुंचा दिया. पतंजलि की वेबसाइट के मुताबिक उनके देशभर में 47,000 रिटेल काउंटर हैं, 3500 डिस्ट्रीब्यूटर हैं और 18 वेयरहाउस हैं. इस लिहाज से देखा जाए, तो पतंजलि देश की सबसे बड़ी रिटेल चेन है.

रामदेव बीजेपी के समर्थक हैं. यह कोई छिपा रहस्य नहीं है. उन्हें Z प्लस सुरक्षा हसिल है. वो हरियाणा के ब्रांड एंबेस्डर हैं. उन्हें खट्टर सरकार ने कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे रखा है. इसके बावजूद 4 जून को अमित शाह के साथ प्रेस कॉन्फ्रेस करने का एक और कारण और है. यह ठीक सात साल पहले हुई बेज्जती का बदला है, जिसे रामदेव बड़े जायके के साथ ले रहे हैं.


पतंजलि का सेल और प्रॉफिट ग्राफ (सोर्स: patanjaliayurved.org)
पतंजलि का सेल और प्रॉफिट ग्राफ (सोर्स: patanjaliayurved.org)

जून 4, 2011. जन लोकपाल बिल पर अन्ना हजारे का अनशन अभी खत्म ही हुआ था. तत्कालीन यूपीए सरकार की इस आंदोलन की वजह से काफी किरकिरी हो चुकी थी. इस बीच बाबा रामदेव मीडिया की सुर्ख़ियों में चढ़े हुए थे. वो 4 जून 2011 से दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन पर बैठने वाले थे. अन्ना आंदोलन की तरह उनका मुद्दा भी भ्रष्टाचार था. अन्ना हजारे के नेतृत्व वाले आंदोलन में लोग अपने से रामलीला मैदान पहुंचे थे. रामदेव के आंदोलन में मामला थोड़ा अलग था इस बार रामलीला मैदान पर मौजूद लोगों में से ज्यादातर उनके समर्थक थे. उनके गलों में पतंजली योग ट्रस्ट और भारत स्वाभिमान ट्रस्ट के बिल्ले थे.

4 जून की शाम के 8 बजे थे. रामदेव को अभी अनशन शुरू किए 12 घंटे भी नहीं बीते थे. वो अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कह रहे थे-


अगर पुलिस मुझे यहां से उठाकर ले जाए या गिरफ्तार कर ले, तो कितने लोग यहां अनशन पर बैठे रहेंगे?

बाबा के समर्थकों ने दोनों हाथ उठाकर पूरे जोश के साथ 'हम' की आवाज की, जोकि माइक तक पहुंचते-पहुंचते 'हो' में बदल गई. इस जोश को महज चार घंटे में ठंडा हो जाना था.


रामलीला मैदान में हुए पुलिस क्रेकडाउन के बाद बाबा रामदेव.
रामलीला मैदान में हुए पुलिस क्रेकडाउन के बाद बाबा रामदेव.

अन्ना आंदोलन के समय खुद की किरकिरी करवा चुकी मनमोहन सिंह सरकार इस बार सतर्क थी. वो एक महीने के भीतर दूसरा सरकार विरोधी प्रदर्शन नहीं चाहती थी. 4 और 5 जून की दरम्यानी रात पुलिस ने रामलीला मैदान पर धावा बोल दिया. रामदेव और उनके समर्थक उस समय सो रहे थे. अचानक से पुलिस ने मैदान में आंसू गैस के गोले छोड़ने शुरू कर दिए. लाठीचार्ज किया गया और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर कर दिया गया. मीडिया फुटेज में बाबा रामदेव मंच से छलांग लगाते दिखाई दिए थे.

वो एक नाटकीय घटनाक्रम में पुलिस को चकमा देने में कामयाब रहे और कुछ महिला कार्यकर्ताओं के साथ रामलीला मैदान के मुख्यद्वार से बाहर निकलने में कामयाब रहे. उन्होंने भगवा बाना उतार दिया था और पुलिस को चकमा देने के लिए सफ़ेद सलवार-सूट पहन लिया था. रामदेव को घेरकर चल रहीं महिला कार्यकर्ताओं में से एक ने इस नाजुक मौके पर एक भूल कर दी. उसने पुलिस को देखते ही चिल्लाना शुरू किया कि कोई पुलिसवाला पास नहीं आएगा. इसके बाद पुलिस ने इस समूह की तलाशी ली और दुप्पटे से मुंह ढंके हुए रामदेव को गिरफ्तार कर लिया.

बाबा रामदेव को दिल्ली से उठाकर हरिद्वार छोड़ दिया गया. यहां उन्होंने उसी सफ़ेद सलवार-कुरते में प्रेस कॉन्फ्रेस की, जिसे पहनकर वो पुलिस से भागने की नाकाम कोशिश कर चुके थे. उन्होंने बड़े भावुक अंदाज में कहा कि पुलिस उन्हें जान से मारने की पूरी तैयारी करके बैठी थी. रामदेव की इस प्रेस कॉन्फ्रेस ने सरकार को जितना नुकसान पहुंचाया, उतना शायद वो अनशन के ज़रिए न पहुंचा पाते.

4 और 5 जून 2011 के दरम्यानी रात बाबा रामदेव ने भगवा कपड़े छोड़कर सफ़ेद सलवार सूट धारण किए थे. यह वो वक़्त था, जब उनके ऊपर सियासत का रंग पूरी तरह चढ़ गया. फिलहाल वो देश के सबसे ताकतवर लोगों में से एक हैं और उनकी सियासत का रंग उनके कपड़ों की तरह गेरुआ है.



यह भी पढ़ें 

पतंजलि सिम टेस्टिंग: ऐसे फीचर्स जो किसी और सिम में नहीं मिले!

आसाराम के गुरु लीलाशाह की कहानी, जिन्होंने उसे भगा दिया था!

इंडिया टुडे पावर लिस्ट 2018: देश के वो नाम जो पैसे और रसूख में टॉप पर हैं

Advertisement

Advertisement

()